रूढ़िवादी दखलंदाजी...

क्या अपनी मर्जी से किसी के साथ, किसी विशेष दिन घूमना कोई अपराध है?  लेकिन अब ऐसा नहीं रहा है। समाज के कुछ ठेकेदार और परंपरा के पैरोकार अक्सर वैलेंटाइन डे के दिन अति सक्रिय हो जाते हैं और अपनी राजनीति चमकाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति की याद आती  है और वे कुछ युवाओं का मुंह काला कर या उन्हें भाई-बहन बनाकर समाज को ढर्रे पर लाने की बात करते है या फिर जबरन उनका ब्याह रचा डालते हैं। इस बार भी कुछ ऐसी ही धमकियां समाज के तथाकथित रखवालों ने दी है।

लेकिन एक ताजा मामले पर नजर डालें तो बंगलुरू में उस समय एक नाटकीय प्रकरण देखने को मिला जब कुछ युवाओं ने वैलेंटाइन डे के बहाने खुद को सुर्खियों में लाने वाले प्रमोद मुतालिक के मुंह पर ही कालिख पोत दी। मुतालिक की इस बार भी वेलेंटाइन्स डे का विरोध करने की तैयारी थी। उनके संगठन श्रीराम सेना ने युवाओं को चेताया था कि अगर वे वैलेंटाइन्स डे के मौके पर प्यार के पेंच लड़ाते नजर आए तो उनका विवाह करा दिया जाएगा।

इस घटना को पूरी तरह से राजनीतिक रंग मे रंगा माना जा सकता है और इस तरह के प्रयासों को बहुत सराहा नहीं जा सकता। लेकिन समाज में परंपरा और रुढियों के नाम पर उत्पात मचाना या फिर दूसरों की आजादी में दखल डालना कहां तक सही है?

  • क्या आपको लगता है कि वैलेंटाइन डे को मनाने से भारतीय संस्कृति या अस्मिता खतरे में आ सकती है?
  • ऐसे में क्या आप वेलेंटाइन डे के दिन युवाओं के साथ इन कट्टरपंथी संगठनों की बदसलूकी को सही मानते हैं?
  • किसी विशेष दिन को मनाने या न मनाने की आजादी क्या किसी का वैयक्तिक अधिकार नहीं है?