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मंगलवार, अक्टुबर 14, 2014
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बनाने होंगे कई बेंगलूरू
1988 से 2008 के बीच मध्यवर्ग की आमदनी भारत में 50 फीसदी और अमेरिका में 26 फीसदी की दर से बढ़ी। वर्ल्ड बैंक ने दुनिया के मध्यवर्ग पर अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय मिडल क्लास की कमाई अपने अमेरिकी जोड़ीदार के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से बढ़ी है। वर्ष 1988 से 2008 के बीच भारत के मध्यवर्ग की आमदनी जहां 50 फीसदी की दर से बढ़ी, वहीं अमेरिका में इस तबके की आय में 26 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट के अनुसार मध्यवर्ग के बूते अंतरराष्ट्रीय कारोबार बढ़ने से भारत और चीन जैसे विकासशील देशों को सबसे अधिक फायदा हुआ है और इसी कारण चीन की तरह भारत भी कारखानों का देश बनता दिखाई दे रहा है। आज न केवल कंप्यूटर क्षेत्र में बल्कि इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल, फार्मास्युटिकल,...
शुक्रवार, अक्टुबर 10, 2014
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोल ब्लॉक आवंटन रद्द किए जाने का तात्कालिक असर बैंकों, निवेश के माहौल और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। जिन कंपनियों ने बैंकों से पैसा लेकर कोल ब्लॉकों में निवेश किया था वे कंपनियां अब बैकोें का पैसा शायद नहीं चुका पाएं। 
 
इससे बैंकों का पैसा फंस जाएगा। अर्थात एनपीए बढ़ेगा। इसकी भरपाई अंतत: सरकार को ही करनी पड़ेगी। सरकार ने निजी उद्यमियों से जो कांट्रेक्ट किए थे, वे ही रद्द हो गए हैं। इससे सरकारी कांट्रेक्ट की वैधता पर भी सवाल खड़ा होता है। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सरकार पर भरोसा सबसे महत्वपूर्ण होता है। सरकार में भरोसा होता है तो निवेशक आकर्षित होता है।
 
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गुरूवार, अक्टुबर 09, 2014
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एक बार फिर स्कूल एडमीशन की सरगर्मियां जोरो पर है। इसी बीच स्कूल संगठनों ने यह मांग दोहराई है कि उन्हें मैनेजमेंट कोटा के अंन्तर्गत एडमीशन की छूट दी जाए। पर जिस तरह से मैनेजमेंट सीटों की नीलामी की जाती है, उसे देखते हुए सरकार शायद ही इसे छूट दे। आखिर ऐसा क्यों है कि निजी स्कूल मनमाने पैसे वसूल कर नर्सरी में दाखिला देना चाहते है?

एक अनुमान के अनुसार, दिल्ली में एक लाख के करीब निजी नर्सरी सीटें और चार लाख बच्चे हैं। यह विडंबना ही है कि दिल्ली में सर्वोत्तम स्कूलों में से आधे दक्षिण दिल्ली में स्थित है, फिर भी नर्सरी सीटों की संख्या जनसंख्या के अनुपात सबसे कम है - ३ प्रति 1000 लोग। दक्षिण दिल्ली में एक बच्चे को स्कूल में दाखिल करवाना सबसे कठिन है। जिला उत्तरी दिल्ली में 1000 लोगों में ३.२ निजी नर्सरी सीटें हैं, जबकि जिला नई दिल्ली में १७ ह...

बुधवार, अक्टुबर 08, 2014
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इसरो के मंगलयान या मार्स आर्बिटर मिशन जैसी कुछ ही भारतीय उपलब्धियां ऐसी हैं, जिनसे तत्काल राष्ट्रीय गौरव की भावना पैदा हुई हो। प्रसार माध्यमों में सराहना की बाढ़ आ गई, ट्विटर व फेसबुक ने जश्न मनाया। हर राजनेता और सेलेब्रिटी कई दिनों तक इसरो को बधाइयां देते रहे। पिछली बार ऐसा माहौल 2011 की क्रिकेट विश्वकप विजय के बाद बना था। 
 
यह समझने में कोई भूल नहीं होनी चाहिए कि पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में उपग्रह स्थापित करना कोई छोटी बात नहीं है और इसे 450 करोड़ रुपए के छोटे से बजट में किया गया।  इस प्रकार यह सबसे सस्ता मंगल अभियान रहा। इस तथ्य ने इसे और भी उल्लेखनीय बना दिया है। इसरो के स्टाफ की धुन और अत्याधुनिक विज्ञान ने इस अभियान को सफल बनाया। इस सफलता पर भारत का गौरवान्वित महसूस करना पूरी तरह...
गुरूवार, सितंबर 25, 2014
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- चार दिवसीय मीडिया वर्कशॉप "आइ-पॉलिसी" का सोमवार को हुआ समापन 
- सेंटर फॉर सिविल सोसायटी, आजादी.मी और एटलस नेटवर्क द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था आयोजन
 
सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस), आजादी.मी व एटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट में चार दिवसीय मीडिया वर्कशॉप "आइ-पॉलिसी" का आयोजन किया गया। 18 से 21 सितंबर तक चले इस वर्कशॉप के दौरान विभिन्न मीडिया संस्थानों से 26 वरिष्ठ मीडियाकर्मियों ने हिस्सा लिया। वर्कशॉप के दौरान विभिन्न समस्याओं और उसके समाधान के लिए दुनिया भर में अपनाई गई नीतियों पर चर्चा की गई। इस दौरान नीतियों के सफल और असफल रहने के कारणों की भी पड़ताल की...
बुधवार, सितंबर 24, 2014
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हमारे सामने मजेदार दृश्य है। एक तरफ ‘मॉडर्न’ प्रधानमंत्री हैं, जो केवल विकास की बात करते हैं जबकि दूसरी ओर उनके सहयोगी वोट हासिल करने के लिए मतदाताओं में ‘अन-मॉडर्न’ धार्मिक आशंकाओं को हवा देते हैं। आधुनिकता के गुणों में धर्म और  राज्य का पृथक अस्तित्व भी एक गुण है, जहां धर्म आधुनिक व्यक्ति के निजी जीवन तक सीमित होता है। नरेंद्र मोदी के आधुनिक विकासवादी एजेंडे को पटरी से कोई चीज उतार सकती है तो वह है आरएसएस जैसे हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों की ‘अन-मॉडर्न’ मानसिकता, जो अब भी सार्वजनिक जीवन में हिंदुत्व एजेंडा भरने में लगा है। उत्तरप्रदेश विधानसभा के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को इससे होने वाले नुकसान का पहला संकेत मिला है, जिसमें पार्टी 11 सीटों में से 3 सीटें ही जीत सकी।
 
कई लोग मानते हैं कि भाजप...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

अनिल पांडेय, जगदीश पंवार व अतुल चौरसिया को पहला आजादी पत्रकारिता पुरस्कार

First Azadi Award Winners

- 8 जनवरी को दिल्ली के पांच सितारा होटल में आयोजित समारोह के दौरान किए गए सम्मानित

- एटलस ग्लोबल इनिसिएटिव के वाइज प्रेसिडेंट टॉम जी. पॉमर ने ट्रॉफी प्रदान कर किया सम्मानित

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आज़ादी ब्लॉग

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मंगलवार, अक्टुबर 07, 2014
बच्चा पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा है; तुम क्या करोगे? तुम तत्काल डर जाओगे--हो सकता है कि वह गिर जाए, हो सकता है वह अपना पैर तोड़ ले...

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सोमवार, सितंबर 01, 2014
"यदि आप ऐसे राजनेताओं को वोट देते आ रहे हैं जो आपको मुफ्त (दूसरों के खर्च पर) चीजें देने का वादा करते हैं, तब जब वे आपके पैसे से स...

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बुधवार, अगस्त 27, 2014
विगत कुछ समय से पंजाब में ड्रग्स के सेवन करने वालों की संख्या में हुई वृद्धि ने शासन प्रशासन सहित स्थानीय जनता के माथे पर चिंता की...

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मंगलवार, अगस्त 26, 2014
जिन लोगों को ये लगता हो कि किसानों की समस्या का एकमात्र समाधान सब्सिडी है, तो उन्हें न्यूजीलैंड देश से कुछ सबक सीखना चाहिए..। न्यू...

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सोमवार, अगस्त 11, 2014
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फेल नहीं किया जा सकता है. ऐसे में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हालत इत...

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