ताज़ा पोस्ट

गुरूवार, जुलाई 31, 2014
Milton-Friedman-02.jpg
व्यक्तित्व एवं कृतित्व [जन्म 1912]
 
मिल्टन फ्रीडमेन 20वीं सदी के प्रमुख अर्थशास्त्री हैं जो मुक्त बाजार की पैरवी करते हैं. उनका जन्म 1912 में एक यहुदी परिवार में न्यूयार्क शहर में हुआ. रटगर्स यूनिवर्सिटी से 20 साल की उम्र में बी.ए. की डिग्री लेने के बाद 1933 मे शिकागो यूनिवर्सिटी गए जहां उन्होंने एम.ए. की डिग्री हासिल की. उन्होंने अपनी पी.एचडी. की उपाधि 1946 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी से हासिल की. अपनी विलक्षण उपलब्धियों के लिए उन्हें 1951 में जॉन बेट्स क्लार्क मैडल से सम्मानित किया गया. यह सम्मान 40 वर्ष से कम उम्र के अर्थशास्त्रियों के लिए घोषित था. 1976 में फ्रीडमेन को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
...
बुधवार, जुलाई 23, 2014
GM foods.jpg
जेनेटिकली मोडिफाइड ऑर्गेनिज्म (जीएमओ) यानी आनुवांशिक रूप से परिवर्तित फसलें भारतीय कृषि को एक नया आयाम और मजबूती दे सकती हैं, लेकिन कुछ लोग इनकी भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं। कुछ गैर-सरकारी संगठनों ने जीएमओ के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है और बड़े ही बेपरवाह ढंग से वे इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) की हालिया रिपोर्ट पर भी दोषारोपण कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह रिपोर्ट कुछ बड़ी कंपनियों के असर में आकर तैयार की गई है, जो भारतीय बीज कारोबार को हथियाना चाहती हैं। इस किस्म का तुच्छ आरोप लगाकर इन एनजीओ ने न केवल बीज व बायोटेक उद्योग द्वारा भारतीय कृषि के क्षेत्र में दिए गए भारी योगदान को नगण्य बता दिया है, बल्कि इन्होंने देश की प्रतिष्ठित खुफिया एजेंसी आइबी का भी अपमान किया है। यह कहकर कि आइबी को कॉरपोरेट समूह अपने असर में ले सकते हैं। कुछ एनजीओ ने मात्र यही रवैया दर्शाया है कि हमला ही सबसे बढ़िया बचाव है।
...
सोमवार, जुलाई 21, 2014
_MG_7964.jpg

हिंदी पुस्तक “पूंजीवाद की नैतिकता” के विमोचन पर हिंदी के मुरीद हुए एटलस नेटवर्क के वाइस प्रेसिडेंट

 

एटलस इकोनॉमिक रिसर्च फाऊंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट डा. टॉम जी. पॉमर ने कहा है कि दुनिया में भारत और हिंदी का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और इसे अनदेखा करना अब दुनिया के लिए संभव नहीं रहा है। उन्होंने कहा है कि भारतीय जिस प्रकार पूरी दुनिया में अपना प्रभाव स्थापित कर रहे हैं उससे हिंदी की लोकप्रियता बढ़ रही है। डा. पॉमर ने कहा कि वैश्विक महाशक्ति बनने और चीन को पीछे छोड़ने के लिए भारत को अंतर्राष्ट्रीय और देसी व्यापार में ज्यादा पारदर्शिता लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब दो देशों के बीच व्यापार होता है तो दोनों देशों में समृद्धि आती है और सीमा पर संघर्ष कम होता है। लेकिन जब देशों के बीच व्यापार नहीं होता...

शुक्रवार, जुलाई 18, 2014
Doc_Attest_banner.jpg
डॉक्यूमेंट्स अटेस्ट कराने का झंझट अब खत्म होने जा रहा है। सरकारी दफ्तरों में ज्यादातर डॉक्यूमेंट्स में सेल्फ अटेस्टेशन को मानने के सरकार के फैसले से स्टूडेंट्स और कामकाजी लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे वक्त की बचत होगी, पैसे भी बचेंगे साथ ही बेवजह की मानसिक दिक्कत भी कम होगी। हालांकि इससे कुछ लोगों को नुकसान भी है। अटेस्ट करने की पावर के साथ विभिन्न पदों पर बैठे कुछ लोगों को मुफ्त में मिला अपना विशेषाधिकार खो देने का अहसास हो सकता है। ये वे लोग हैं जिन्होंने मार्कशीट, सर्टिफिकेट, एड्रेस प्रूफ जैसे दस्तावेजों पर साइन करने और स्टैंप लगाने को एक धंधा बना लिया था। फिर इसके जरिए अपनी राजनीति चमकाने वालों को भी धक्का लगेगा।
 
सरकार के फैसले के मुताबिक अब किसी गजिटेड ऑफिसर से अटेस्ट कराए बिना या नोटरी से अफिडे...
बुधवार, जुलाई 16, 2014
urbanisation of india.jpg
मोदी सरकार के कार्यकाल के पहले बजट को प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 100 स्मार्ट सिटी बसाने की योजना की घोषणा की है। स्मार्ट सिटी के लिए 7000 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है और इसमें एफडीआई अर्थात प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की शर्तों में ढील दी गई है। योजना के तहत स्मार्ट सिटी का विकास महानगरों और बड़े शहरों के उपनगर के तौर पर किया जाना है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को शहरों की विश्वस्तरीय सुविधा, रोजगार आदि उपलब्ध कराना और दिल्ली जैसे शहरों में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करना है।
 
चूंकि किसी देश की अर्थव्यवस्था में शहरों का योगदान काफी महत्वपूर्ण होता है इसलिए जरूरी है कि शहरीकरण को बढ़ावा दिए जाने के प्रयास की प्रशंसा की जाए। हालांकि व्यक्तिगत रूप से मैं शहरों के विकास में सरकार की भूम...
मंगलवार, जुलाई 15, 2014
gurcharan_das.jpg
नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने दो माह हो गए और यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि यह एक ‘मोदी सरकार’ है। उन्होंने सरकारी दफ्तरों के शीर्ष पर बैठे सभी प्रमुख सचिवों से सीधा संपर्क स्थापित कर लिया है। वे उन्हें फैसले लेने और यदि कुछ गड़बड़ हो जाता है तो उनसे संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। सचिवों और प्रधानमंत्री के बीच मंत्रियों की दुविधापूर्ण स्थिति है, कैबिनेट के साधारण दर्जे को देखते हुए यह शायद अच्छा ही है। मंत्री तो खुश हो नहीं सकते। उन्हें रिश्तेदारों को नौकरियां देने की मनाही है। वे फैसलों में व्यक्तिगत हित नहीं देख सकते।
 
महीनों की बातों के बाद अब हम कुछ होता देखना चाहते हैं। यह मौका पिछले हफ्ते आया जब इस सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया। मोदी ने वित्तीय अनुशासन कायम करने के लिए जरूरी ‘कड़े’...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

अनिल पांडेय, जगदीश पंवार व अतुल चौरसिया को पहला आजादी पत्रकारिता पुरस्कार

First Azadi Award Winners

- 8 जनवरी को दिल्ली के पांच सितारा होटल में आयोजित समारोह के दौरान किए गए सम्मानित

- एटलस ग्लोबल इनिसिएटिव के वाइज प्रेसिडेंट टॉम जी. पॉमर ने ट्रॉफी प्रदान कर किया सम्मानित

पूरी जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.

आज़ादी ब्लॉग

sanjeev sablok_0.jpg
शुक्रवार, अगस्त 01, 2014
भारतीय प्रशासनिक सेवा को छोड़कर सिविल सोसायटी और फिर स्वर्ण भारत पार्टी नामक उदारवादी राजनैतिक दल का गठन करने वाले संजीव सबलोक न...

ronald-reagan-quotes.jpg
मंगलवार, जुलाई 08, 2014
अंग्रेजी के सात सबसे भयानक शब्द हैं, " आय'एम फ्रॉम द गवर्मेंट एंड आय'एम हियर टू हेल्प..." (मैं सरकारी व्यक्ति हूं और यहां आपकी म...

austrian economist.png
सोमवार, जून 23, 2014
सरकार के तीन प्राथमिक कार्य होते हैं-   पहला, देश के लिए सैन्य सुरक्षा उपलब्ध कराना।   दूसरा, लोगों के बीच हुए...

Right to recall
शुक्रवार, जून 06, 2014
ब्रिटेन के मतदाताओं को अपना एमपी वापस बुला लेने का हक मिल गया है। अगर किसी क्षेत्र के मतदाताओं को लगता है कि उनके सांसद का बर्ता...

Quote_Milton-Friedman-on-private-property_US-1.png
सोमवार, जून 02, 2014
कोई और, किसी और के धन को उतना ध्यानपूर्वक खर्च नहीं करता जितना कि 'वह' स्वयं। कोई और, किसी और के संसाधनों को उतना ध्यानपूर्वक प्...

आपका अभिमत

क्या देश में निजी कंपनियों को सैन्य आयुद्ध तैयार करने की अनुमति दी जानी चाहिए?:

सबस्क्राइब करें

अपना ई-मेल पता भरें:

फीडबर्नर द्वारा वितरित

आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक

आज़ादी वी‌डियो

See video पांच साल तक अपने चुनावी क्षेत्र से गायब रहने वाले राजनेता चुनाव आते ही किस प्रकार अपनी लच्छेदार बातो...