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सोमवार, अप्रैल 27, 2015
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पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के 16 ब्लॉक डेवलेपमेंट अधिकारियों (बीडीओ) में से 12 आरक्षित वर्ग (एससी और ओबीसी) से आते हैं। गौरतलब है कि इनमें से पांच एक ही जाति से हैं, और केवल चार सामान्य वर्ग से हैं। इसी तरह, यहां के 18 थानेदारों (एसएचओ) में से नौ सामान्य वर्ग और नौ आरक्षित वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। मगर हैरत की बात है कि आरक्षित वर्ग के नौ थानेदारों में से सात, उस समुदाय के हैं, जिस पर राज्य की सपा सरकार की खास कृपा रहती है। वोट बैंक की राजनीति का ऐसा ही उदाहरण उत्तर प्रदेश में बसपा की पिछली सरकार के कार्यकाल में भी दिखा था, जब कैबिनेट रैंक के पद गठित किए गए, जिनमें खास समुदाय को तरजीह मिली। ऐसे तमाम उदाहरण हैं, जो बताते हैं कि किस तरह सकारात्मक व्यवस्‍था (आरक्षण) के नाम पर कुछ खास समुदाय राजनीतिक मुनाफा कमाते हैं, और भारत में आरक्षण नीति को नाकामयाब साबित करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन खास समुदाय...
गुरूवार, अप्रैल 23, 2015
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एक बार की बात है। एक चमकदार और रंगीन फूलों से भरे घास के मैदान और उद्यानों के बीचोबीच स्थित एक पुराने पेड़ पर मधुमक्खियों का एक बड़ा छत्ता स्थित था। छत्ते में एक रानी मधुमक्खी थी, जिसे कुछ वरिष्ठ मधुमक्खियों के साथ छत्ते के संचालन के लिए चुना गया था। सामूहिक रूप से चयनित इस व्यवस्था को सरकार कहा जाता था। श्रमिक मधुमक्खियों को विश्वास था कि सरकार उनके द्वारा एकत्रित शहद का समुचित भंडारण करेगी और उनकी देखभाल करेगी। सरकार के उपर भी एक जिम्मेदारी थी कि वह नए नए उद्यानों की खोज करेगी ताकि मधुमक्खियों के बच्चों की आने वाली पीढ़ी के लिए फूलों और रस का नया स्त्रोत पैदा किया जा सके।
 
स्थिरता सुनिश्चित करने और अव्यवस्था से बचने के लिए सरकारी मधुमक्खियों ने नियम बनाएं और कानून पार...
बुधवार, अप्रैल 22, 2015
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- राजधानी में जुटे देशभर के निजी 'बजट' स्कूल संचालक, गिनाई आरटीई की विसंगतियां
 
नई दिल्ली। देशभर के निजी स्कूल असोसिएशनों का मानना है कि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत स्कूल फीस भरने में असमर्थ आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को दाखिला देने के ऐवज में स्कूलों को फंड दिए जाने की बजाए यदि इसे सीधे छात्रों को दिया जाए तो योजना अधिक प्रभावी साबित होगी। असोशिएशन के प्रतिनिधियों के मुताबिक फंड सीधे छात्रों को दिए जाने से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि छात्रों को पसंद के स्कूल में दाखिला लेने का विकल्प मिलेगा। ये असोसिएशन देशभर के निजी स्कूल संचालकों के वार्षिक सम्मेलन व कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप में सम्मिलित होने दिल्ली आए थे। कार्यक्रम का आयोजन नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल अलाएंस (निसा) व थिंकटैंक से...
मंगलवार, अप्रैल 21, 2015
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जब काले धन को वापस लाने की बातें राजनेता करते हैं, तब मु‌झे समझ में नहीं आता कि मैं हंसूं या रोऊं। ऐसा इसलिए, क्योंकि सबसे ज्यादा काला धन किसी के पास है, तो वे राजनेता ही हैं। लेकिन प्रायः राजनेताओं के घरों में आयकर विभाग के छापे नहीं पड़ते। इन पर शिकंजा तब कसता है, जब ये लोग कोई ऐसी हरकत करते हैं, जिससे प्रधानमंत्री या वित्त मंत्री को गुस्सा आ जाए। तब जाकर मिलता है इनके घरों में, काले धन का भंडार।
 
कुछ वर्ष पहले लंदन में मैं तब थी, जिस समय दुनिया की सबसे महंगी इमारत वहां बन रही थी। यह इमारत रिहायशी है, और इसका नाम है, वन हाइड पार्क। इसकी एक फ्लैट उस वक्त 1,400 करोड़ रुपये की बिकी थी। यानी उस दाम पर, जिस दाम में भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने मुंबई में एंटीला नाम की अपनी रिहायशी इमारत बनाई...
गुरूवार, अप्रैल 16, 2015
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इस लेख को पढ़ने वाले अधिकतर लोगों ने इससे पहले अपने भोजन में देश के खेतों में पैदा हुआ खाद्यान्न खाया होगा। हमारे भोजन में शामिल चावल या गेहूं की बनी चपाती, ये सब इन्हीं खेतों में पैदा होते हैं और हमारी रोजाना की जिंदगी में इनका असर होता है। लेकिन अनाज खाते समय शायद ही हम कभी सोचते हों कि इसके लिए किसी की जान भी गई होगी। जबकि सच्चाई यह है कि इस वर्ष ही हजारों किसान अपनी जान देने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
 
बेमौसम बारिश से खेतों में लगी फसल खराब हो रही है और किसानों के लिए खेती से कमाई करना मुश्किल है। उनकी हालत इतनी खराब है कि उधार लिए 50 हजार रु. की छोटी रकम लौटाने में असमर्थ होने के चलते वे अपनी ही जान ले रहे हैं। यह ऐसे देश में हो रहा है जहां किसानो...
बुधवार, अप्रैल 15, 2015
हममें से अधिकांश लोग डा. भीमराव अंबेडकर को एक अधिवक्ता, दलित नेता और भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार के तौर पर पहचानते हैं। लेकिन कम ही लोगों को पता है कि डा. अंबेडकर एक निपुण अर्थशास्त्री भी थे। उनके पास न केवल लॉ की डिग्री थी बल्कि उन्होंने अमेरिका के कोलंबिया यूनिवर्सिटी से 1915 व 1927 में क्रमशः अर्थशास्त्र में एमए व पीएचडी भी की थी।  
 
कल डा. अंबेडकर की 125 जयंती थी। सभी राजनैतिक दल देश के इस अग्रणी पंक्ति के नेता की विरासत को भुनाने और एक दूसरे को पछाड़ने के प्रयास में जुटे हैं। वे सभी आज के समय में अंबेडकर और सार्वजनिक नीतियों के बाबत उनके विचारों की प्रासंगिकता को याद करेंगे। भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस दोनों ने उनके सम्मान में वर्ष...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

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गुरूवार, फरवरी 26, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा कर रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्र...

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मंगलवार, फरवरी 17, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें स...

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गुरूवार, फरवरी 12, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें स...

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सोमवार, फरवरी 02, 2015
गरीबी उन्मूलन का मुद्दा दुनियाभर की सभी साम्यवादी व समाजवादी सरकारों की प्राथमिकता में होती है। दूरदर्शिता व अच्छी नीति अपनाने क...

Mahatma Gandhi quote
शुक्रवार, जनवरी 30, 2015
सरकारी नियंत्रण फर्जीवाड़े़ और काला बाजारी को बढ़ावा देता है। यह सत्य का दमन करता है और वस्तुओं की गहन कृत्रिम कमी पैदा करता है। य...

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बुधवार, जनवरी 28, 2015
- पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी द्वारा टॉप ग्लोबल थिंकटैंक सेंटर्स की सूची जारी, टॉप 50 में अकेला भारतीय   -  चीन, भार...

आपका अभिमत

किसानों की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है?:

आज़ादी वी‌डियो

See video पांच साल तक अपने चुनावी क्षेत्र से गायब रहने वाले राजनेता चुनाव आते ही किस प्रकार अपनी लच्छेदार बातो...

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