ताज़ा पोस्ट

गुरूवार, सितंबर 25, 2014
jim corbett parth.jpg
- चार दिवसीय मीडिया वर्कशॉप "आइ-पॉलिसी" का सोमवार को हुआ समापन 
- सेंटर फॉर सिविल सोसायटी, आजादी.मी और एटलस नेटवर्क द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था आयोजन
 
सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस), आजादी.मी व एटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट में चार दिवसीय मीडिया वर्कशॉप "आइ-पॉलिसी" का आयोजन किया गया। 18 से 21 सितंबर तक चले इस वर्कशॉप के दौरान विभिन्न मीडिया संस्थानों से 26 वरिष्ठ मीडियाकर्मियों ने हिस्सा लिया। वर्कशॉप के दौरान विभिन्न समस्याओं और उसके समाधान के लिए दुनिया भर में अपनाई गई नीतियों पर चर्चा की गई। इस दौरान नीतियों के सफल और असफल रहने के कारणों की भी पड़ताल की...
बुधवार, सितंबर 24, 2014
Gurcharan Das.jpg
हमारे सामने मजेदार दृश्य है। एक तरफ ‘मॉडर्न’ प्रधानमंत्री हैं, जो केवल विकास की बात करते हैं जबकि दूसरी ओर उनके सहयोगी वोट हासिल करने के लिए मतदाताओं में ‘अन-मॉडर्न’ धार्मिक आशंकाओं को हवा देते हैं। आधुनिकता के गुणों में धर्म और  राज्य का पृथक अस्तित्व भी एक गुण है, जहां धर्म आधुनिक व्यक्ति के निजी जीवन तक सीमित होता है। नरेंद्र मोदी के आधुनिक विकासवादी एजेंडे को पटरी से कोई चीज उतार सकती है तो वह है आरएसएस जैसे हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों की ‘अन-मॉडर्न’ मानसिकता, जो अब भी सार्वजनिक जीवन में हिंदुत्व एजेंडा भरने में लगा है। उत्तरप्रदेश विधानसभा के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को इससे होने वाले नुकसान का पहला संकेत मिला है, जिसमें पार्टी 11 सीटों में से 3 सीटें ही जीत सकी।
 
कई लोग मानते हैं कि भाजप...
गुरूवार, सितंबर 11, 2014
kumar-mangalam-birla.jpg
महात्मा गांधी की हत्या मेरे परदादा के घर में हुई थी। अपने जीवन के अंतिम दिनों में गांधी जी जब कभी दिल्ली आते, वह बिड़ला हाउस में ही ठहरते थे। जनवरी 1948 में जब गांधी जी यहां हरी घास भरे प्रांगण में अपनी दैनिक प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे, एक हत्यारे ने उन्हें बिल्कुल पास जाकर गोलियों से भून दिया। यह घर और उसका बगीचा अब गांधी संग्रहालय के रूप में जाना जाता है, जहां उनके हजारों प्रशंसक हर साल दर्शन के लिए आते हैं।
 
बहरहाल, बड़ा होते हुए मुझे अपने मारवाड़ी परिवार के जीवन मूल्यों को याद रखने के लिए इस संग्रहालय में जाने की जरूरत नहीं पड़ी। हमारा छोटा-सा मारवाड़ी समुदाय जो मूल रूप से राजस्थान से जुड़ा है, कारोबार में आश्चर्यजनक सफलता के लिए जाना जाता है। इस सफलता का एक कारण यह है कि एक तो हम लोग अपने कुटुं...
बुधवार, सितंबर 10, 2014
p shah.jpg
व्यापार में कुछ खास नैतिक खतरे नहीं हैं। कोई भी काम जिसमें सही या गलत में चुनाव करना पड़े उसमें नैतिक खतरा होता ही है। व्यापारी भले ही अपने काम में ज्यादा नैतिक दुविधा का सामना करता है लेकिन यह किसी राजनेता या नौकरशाह की दुविधा से ज्यादा नहीं होता होगा।
 
अलग-अलग व्यवसायों के लिए अलग-अलग एथिक्स नहीं चाहिए बल्कि एक ऐसा नीति-शास्त्र विकसित करना चाहिए जो सबका मार्गदर्शन करे। व्यापार नैतिकता और कुछ नही बल्कि व्यक्तिगत नैतिकता है।
 
व्यापार की सामाजिक जिम्मेदारी नैतिकता को ध्यान में रखते हुए मुनाफे में इजाफा करना है। लेकिन क्या व्यापार में लोग नैतिक कस्टम के परे जा सकते हैं? क्या, जब समाज का नैतिक कस्टम क...
मंगलवार, सितंबर 09, 2014
prosperity.jpg
भारत ने पहले लोकतंत्र को अपनाया और बाद में पूंजीवाद को और यह हमारे बारे में बहुत कुछ समझाता है। भारत 1950 में सर्व मताधिकार और व्यापक मानवाधिकारों के साथ लोकतंत्र बना लेकिन 1991 में जा कर इसने बाजार की ताकतों को ज्यादा छूट दी।
 
हम लोगों ने कई सालों तक आर्थिक सुधार की धीमी वृद्धि देखी है जिस दौरान हमने कुछ नुकसानदेह समाजवादी संस्थाओं को विखण्डित किया है। फिर भी एक विशाल कार्य-सूची है जिसे पूरा किये बिना हम खुद को एक सख्त पूंजीवादी लोकतंत्र नही कह सकते। और तो और, यह भी देखा जा सकता है कि चुनाव के दौरान नेता आज भी एक उदार आर्थिक सुधार के मंच पर प्रचार करने से कतराते हैं। उन्हें लगता है कि पूंजीवादी संस्थाओं का समर्थन राजनीतिक विफलता का रास्ता है।
 
...
सोमवार, सितंबर 08, 2014
chetan bhagat.jpg
हम भारतीय दुख-परेशानी, अन्याय और संघर्षों से खुद को अलिप्त रखने में  बहुत माहिर हैं। हम ऐसे जिंदगी जीते हैं जैसे देश की बड़ी समस्याओं का वजूद ही नहीं है। मैं कोई फैसला नहीं दे रहा हूं। इतनी तकलीफों और असमानता वाले देश में इनसे निपटने का एकमात्र यही तरीका है। 
 
दूसरी बात, जिसमें हम सिद्धहस्त हैं वह है ऐसी किसी चीज पर विचार-विमर्श न करना जो समाज में वर्जित हो या इसमें सेक्स संबंधी कोई दृष्टिकोण हो। भारतीयों के लिए सेक्स का तो कोई अस्तित्व ही नहीं है और इसीलिए इससे जुड़ा कोई मुद्‌दा भी नहीं है। यही वजह है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर अब तक हमारे यहां तर्कपूर्ण, जानकारी परक और विवेकपूर्ण बहस नहीं हुई है और हममें से कई लोग तो सेक्स एजुकेशन को भयंकर चीज मानते हैं। हालांकि, हम सेक्स के बारे में...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

अनिल पांडेय, जगदीश पंवार व अतुल चौरसिया को पहला आजादी पत्रकारिता पुरस्कार

First Azadi Award Winners

- 8 जनवरी को दिल्ली के पांच सितारा होटल में आयोजित समारोह के दौरान किए गए सम्मानित

- एटलस ग्लोबल इनिसिएटिव के वाइज प्रेसिडेंट टॉम जी. पॉमर ने ट्रॉफी प्रदान कर किया सम्मानित

पूरी जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.

आज़ादी ब्लॉग

10557199_370603963093619_3235391665263491743_n.jpg
सोमवार, सितंबर 01, 2014
"यदि आप ऐसे राजनेताओं को वोट देते आ रहे हैं जो आपको मुफ्त (दूसरों के खर्च पर) चीजें देने का वादा करते हैं, तब जब वे आपके पैसे से स...

PORTUGAL and drugs.png
बुधवार, अगस्त 27, 2014
विगत कुछ समय से पंजाब में ड्रग्स के सेवन करने वालों की संख्या में हुई वृद्धि ने शासन प्रशासन सहित स्थानीय जनता के माथे पर चिंता की...

no subsidy.jpg
मंगलवार, अगस्त 26, 2014
जिन लोगों को ये लगता हो कि किसानों की समस्या का एकमात्र समाधान सब्सिडी है, तो उन्हें न्यूजीलैंड देश से कुछ सबक सीखना चाहिए..। न्यू...

RTE.jpg
सोमवार, अगस्त 11, 2014
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फेल नहीं किया जा सकता है. ऐसे में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हालत इत...

Frederic Bastiat on freedom
बुधवार, अगस्त 06, 2014
यदि मनुष्य की नैसर्गिक प्रवृत्ति (स्वभाव) इतनी बुरी है कि उसे आजाद छोड़ना सुरक्षित नहीं तो ऐसी सोच रखने वाले या ऐसी व्यवस्था करने...

आपका अभिमत

क्या सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोल ब्लॉक आवंटनों को रद्द करने का फैसला सही है?:

सबस्क्राइब करें

अपना ई-मेल पता भरें:

फीडबर्नर द्वारा वितरित

आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक

आज़ादी वी‌डियो

See video पांच साल तक अपने चुनावी क्षेत्र से गायब रहने वाले राजनेता चुनाव आते ही किस प्रकार अपनी लच्छेदार बातो...