बजट स्कूलों में खिलखिलाता बचपन

आरटीई एक्ट लागू होने के बाद से लगातार सरकारी स्कूलों में नामांकन की संख्या घटी है जबकि नामांकन कराने वाले छात्रों की कुल संख्या में तेजी से ईजाफा हुआ है। पर यदि ऐसा है तो बच्चे जा कहां रहे हैं.. ! जी हां, बच्चे जा रहे हैं निजी स्कूलों, विशेषकर ऐसे स्कूलों में जहां फीस तो न्यूनतम है ही गुणवत्ता भी सरकारी स्कूलों की तुलना में बेहतर है। ऐसे में सरकार की फजीहत होना लाजमी है।

इस फजीहत से बचने के लिए सरकार पड़ोस के निजी स्कूलों को समाप्त ही कर देना चाहती है ताकि बच्चे वापस सरकारी स्कूलों का रुख कर सकें। इसके लिए तमाम हथकंडे अपनाए जा रहे हैं जैसे कि बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों पर 10 हजार प्रतिदिन का आर्थिक दंड लगाना, स्कूल संचालन के कार्य का गैर लाभकारी होने के बावजूद बिजली और पानी का टैक्स वाणिज्यिक दर पर वसूलना, स्कूलों के पास खेल का मैदान होना आदि आदि।

अब नया शिगूफा फी रेग्युलेशन एक्ट के बहाने फीस की अधिकतम सीमा तय करना व फीस वृद्धि पर प्रतिबंध लगाने और छात्रों की सेफ्टी के नाम पर स्कूल बिल्डिंग के लिए नए मानदंड तय किये जा रहा है। स्कूलों का मानना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि उन्हें बंद किया जा सके..। इसी मुद्दे को लेकर आजादी की टीम ने दिल्ली के अनधिकृत इलाके संगम विहार स्थित साईनाथ पब्लिक स्कूल का दौरा किया और वहां के अभिभावकों और बच्चों से बात की। जानिए अभिभावकों और बच्चों ने क्या कहा..

- आजादी.मी

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