शिक्षा का अधिकार एक्ट के बारे में जानकारी का अभाव एक बड़ी समस्या: विनोद रैना

पेशे से भौतिक शास्त्री रहे विनोद रैना भारत में जन विज्ञान आन्दोलन के प्रणेता रहे हैं. इन्होने ऑल इंडिया पीपल साइंस नेटवर्क और भारत ज्ञान विज्ञान समिति के जन्म में मदद की. वो पिछले दो दशको से एकलव्य नामक वैकल्पिक शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही एक NGO के संस्थापक सदस्य भी रहे हैं. रैना केंद्रीय शिक्षा सलाहकार परिषद के सदस्य हैं जिसने हाल में बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार एक्ट, 2009(शिक्षा का अधिकार एक्ट) की रचना की.

Q 1- शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के फ़ौरन बाद ही इसमें दो संशोधन हो चुके हैं. ऐसा आगे होने की भी आप को उम्मीद है और क्यों?
A - इतने ज़रूरी कानून में संशोधन तो होंगे ही और संशोधनों की मांग भी रहेगी. अप्रैल 2010 के पहले संशोधन में विकलांग बच्चों को सुविधाहीन वर्ग के साथ जोड़ा गया जो की एक आवश्यक मांग थी. दूसरे संशोधन के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों की स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को सलाहकार निकायों का दर्जा दिया गया और ये भी एक अपेक्षित मांग थी चूंकि संविधान का अनुच्छेद 30 वैसे भी इन संस्थानों को स्कूली मामलो में स्वायत्तता प्रदान करता है.

Q 2 - शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत क्या राज्यों को अधिक शक्ति मिल जाएगी?
A
- 1950 के बाद शिक्षा के ऊपर ये पहला सेंट्रल एक्ट है और इसके नियम सभी राज्यों को मानने पड़ेंगे. केंद्र और राज्य के बीच बड़ा मामला पैसो को लेकर है. चूंकि ये एक सेंट्रल एक्ट है, राज्य केंद्र सरकार से मुनासिब वित्तीयन की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है की अभी के 55 : 45 के अनुपात को बदल कर 90 : 10 कर दिया जाये. मेरा मानना है कि केंद्र और राज्य का बैलेंस 75 : 25 पर होना चाहिए. एक्ट के नियम राज्यों में क्रियान्वन को सुविधाजनक बनाने के लिए ही हैं.

Q 3 - क्या आप चाहेंगे कि राज्य मॉडल नियमो में कोई परिवर्तन लाये?
A
- जितना कम से कम हो सके, अन्यथा नियम कमज़ोर पड़ जायेंगे. एक्ट के तहत स्कूलों के लिए न्यूनतम नियम और मानक रखे गए हैं जिन्हे राज्यों को क्रियान्वित करना होगा. अगर राज्य अपने मानकों को और गिरता है, तो एक्ट का लाभ शायद ही मिल पाए.

Q 4 - क्या आप किसी राज्य को जानते हैं जिसने अच्छे या बुरे के लिए अपने मानको को बदला है?
A
- नहीं. मैं कुछ ड्राफ्ट के बारे तो जानता हूँ पर किसी राज्य विधान सभा में पारित नियम के बारे में तो नहीं जानता.

Q 5 - कुछ लोग चाहते थे कि राज्य के नियमो में ज्यादा साफ़ तरीके से निजी स्कूलों में 25 % आरक्षण की बात रखी जाए. आप इस विषय में क्या सोचते हैं?
A
- 25% आरक्षण आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके के बच्चो के लिए है. अगर सीटों से ज्यादा लोग एडमीशन के लिए आवेदन करते हैं तो अभिभावकों के समक्ष लाटरी करवानी पड़ेगी चूंकि हर बच्चे का पढने के लिए सामान अधिकार है. कुछ लोगों ने ये मांग रखी है कि 25% आरक्षण के अंतर्गत बालिकाओं, आदिवासियों और अल्पसंख्यक बच्चो को अलग से आरक्षण प्रदान किया जाए पर ये राज्यों पर है कि वो इस मांग को लेकर अपने नियमो में कोई परिवर्तन करते हैं कि नहीं.

Q 6 - राज्य नियमावली कहती है कि स्कूल बिल्डिंग पढ़ाने के अलावा किसी भी और प्रयोग में नहीं लायी जाएगी. क्या आप इस नियम का समर्थन करते हैं या फिर आप इसमें कुछ लचीलापन चाहते हैं?
A
- मैं ये समझता हूँ कि स्कूल बिल्डिंग को किसी भी वाणिज्यिक प्रयोग के लिए मसलन शादी, कोचिंग इंस्टिट्यूट आदि के लिए इस्तेमाल करना गलत है पर यदि शाम को यहाँ खेल और कला सम्बन्धी क्लास या फिर गरीब बच्चों को मुख्या धारा में लाने के लिए कोर्स वगैरह कराये जाए, तो इस जगह को इस्तेमाल करने देना चाहिए.

Q 7 -सन 2013 तक सभी गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों के बंद हो जाने कि स्थिति में क्या सरकार के पास निकले हुए सभी बच्चों को सरकारी स्कूलों में लेने की क्षमता है?
A
- एक्ट में ये प्रावधान है कि इन गैर मान्यता प्राप्त स्कूल बंद होने कि स्थिति में इन क्षेत्रों के अन्य स्कूलों को पहले से ही चेता दिया जाएगा और अगर ज़रूरी पड़ा, तो नए सामुदायिक स्कूल भी खोले जायेंगे. एक्ट के मानको को नहीं मानने की स्थिति में कई सरकारी स्कूलों के बंद होने की गुंजाईश है. इस समस्या को हल करने के लिए या तो चालू स्कूलों को सुधारा जाए या फिर नए स्कूल खड़े किये जाएँ, जो की समय लेने वाला काम है. हालांकि केरल और उड़ीसा में इस विषय में प्लानिंग शुरू हो गयी है.

Q 8 - क्या आप को लगता है कि एक्ट के अंतर्गत वित्तीय आवंटन पर्याप्त है?
A
- करीब 80 से 90 मिलियन स्कूल से बाहर बच्चो को नियमित स्कूलों में डालने के लिए, 2.3 लाख करोड़ रुपये का शिक्षा का अधिकार बजट बहुत अच्छा तो नहीं लगता. इन बच्चो का आंकड़ा भी अभी बहुत विश्वसनीय नहीं है चूंकि असली जानकारी तो तब उभरेगी जब विभिन्न राज्य इस एक्ट को क्रियान्वित करना शुरू करेंगे. कुछ राज्य जैसे झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, आसाम, उड़ीसा और अन्य बीमारू राज्य में तो अभी आवंटित धन भी खर्च नहीं हो पाया है जिससे ये भी सिद्ध होता है कि महज़ अधिक पैसा समस्या को सुलझाने में काम नहीं आएगा.

Q 9 - आप की नज़र में शिक्षा का अधिकार कानून के क्रियान्वयन आयर नियमावली में आने वाले कौन से सब से बडे रोड़े हैं?
A
- राज्यों, विधायकों, नागरिक मंचों, अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन समितियों और शिक्षक यूनियन आदी में इस एक्ट के बारे में जानकारी और समझ का अभाव एक बड़ी समस्या है. जानकारी का अभाव एक्ट के सफल क्रियान्वयन में भी दिक्कत पैदा करता है. राज्यों के शिक्षा विभागों में अफसरशाही भी इस एक्ट के रास्ते में रोड़े की तरह हैं और न्यायालय के दखल देने पर ही कोई काम बन पाता है.