शहरीकरण से आएगी देश में समृद्धि

मोदी सरकार के कार्यकाल के पहले बजट को प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 100 स्मार्ट सिटी बसाने की योजना की घोषणा की है। स्मार्ट सिटी के लिए 7000 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है और इसमें एफडीआई अर्थात प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की शर्तों में ढील दी गई है। योजना के तहत स्मार्ट सिटी का विकास महानगरों और बड़े शहरों के उपनगर के तौर पर किया जाना है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को शहरों की विश्वस्तरीय सुविधा, रोजगार आदि उपलब्ध कराना और दिल्ली जैसे शहरों में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करना है।
 
चूंकि किसी देश की अर्थव्यवस्था में शहरों का योगदान काफी महत्वपूर्ण होता है इसलिए जरूरी है कि शहरीकरण को बढ़ावा दिए जाने के प्रयास की प्रशंसा की जाए। हालांकि व्यक्तिगत रूप से मैं शहरों के विकास में सरकार की भूमिका का समर्थक नहीं हूं और मेरा मानना है कि सरकार को ऐसी चीजों से दूर रहना चाहिए। प्राचीन काल से हमें तमाम ऐसे उदाहरण देखने को मिल जाएंगे जहां शहरों का विकास स्वाभाविक तौर पर हुआ और ऐसे उदाहरण भी मिलेंगे जहां सरकार द्वारा बड़ी धनराशि खर्च कर स्थापित किए गए शहर अपने उद्देश्यों की पूर्ति में असफल रहें। 
 
खैर, यहां मुख्य मुद्दा देश में शहरीकरण का है इसलिए लेख को मुद्दे के आसपास रखते हैं। इतिहास इस बात का गवाह है कि जिन देशों में शहरों की जितनी अधिक प्रगति होती है, वहां आर्थिक अवसरों की उपलब्धता उतनी ही अधिक होती है। यह माना जाता है कि शहर किसी भी राष्ट्र के विकास के आधार स्तंभ होते हैं। जैसे-जैसे शहरों का विकास होता है, वैसे-वैसे उसके साथ नया बाजार भी तैयार होता है।
 
संसार का लगभग 50 प्रतिशत शहरीकरण हो चुका है – अर्थात विश्व की 50 प्रतिशत जनसंख्या शहरों एवं कस्बों में निवास करती है। भारत विश्व के इस औसत प्रतिशत से काफी नीचे, मात्र 30 प्रतिशत पर है। परंतु भारत के समृद्धतम राज्य गुजरात एवं महाराष्ट्र में शहरीकरण का औसत विश्व के औसत 50 प्रतिशत के आस-पास है जबकि भारत के सबसे गरीब राज्य जैसे – असम एवं बिहार में शहरीकरण का औसत 10 प्रतिशत से भी कम है।
 
बीते दिनों संयुक्त राष्ट्र द्वारा दुनिया की जनसंख्या और शहरीकरण के रुझान पर जारी रिपोर्ट 2014 में कहा गया है कि दुनिया में सबसे अधिक आबादी भारत में बढ़ रही है और दुनिया का सबसे अधिक शहरीकरण भी भारत में ही हो रहा है।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व की शहरी आबादी अब 3.9 अरब है और उम्मीद है कि 2050 तक यह बढ़कर 6.3 अरब हो जाएगी। भारत की मौजूदा शहरी आबादी 41 करोड़ है और 2050 में यह बढ़कर 81.4 करोड़ हो जाएगी, जो कि दुनिया की सर्वाधिक शहरी आबादी होगी।
 
धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलने में सक्षमता और सस्ती श्रमशक्ति ने वैश्वीकरण के दौर में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देश में व्यवसाय करने के प्रति आकर्षित किया है। पिछले दो दशकों में भारत दुनिया का सबसे बड़े प्लेसमेंट सेंटरों में से एक बन गया है। 
 
वैश्वीकरण का लाभ उठाने के मद्देनजर जरूरी है कि शहर सुनियोजित रूप से विकसित हों। शहर आधुनिक बुनियादी सुविधाओं, यातायात और संचार साधनों से सुसज्जित हों। शहरों में विकास की मूलभूत संरचना, मानव संसाधन के बेहतर उपयोग, जीवन की मूलभूत सुविधाओं तथा सुरक्षा कसौटियों के लिए सुनियोजित प्रयास करना आवश्यक होगा।
 
इस लिहाज से देश के ज्यादातर शहरों में नवीनीकरण और वर्तमान व्यवस्थाओं में आमूल-चूल बदलाव लाने की जरूरत है। वैश्विक जरूरतों की पूर्ति करने वाले शहरों के विकास की दृष्टि से भारत के लिए यह एक अच्छा संयोग है कि अभी देश में ज्यादातर शहरी ढांचे का निर्माण बाकी है और शहरीकरण की चुनौतियों के मद्देनजर देश के पास शहरी मॉडल को परिवर्तित करने और बेहतर सोच के साथ शहरों के विकास का पर्याप्त समय अभी मौजूद है।
 
 
- अविनाश चंद्र