बजट में कारोबारी सहूलियत के लिए कोई बड़ा व्यवस्थागत बदलाव नहीं

इकोनॉमिक थिंक टैंक सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के प्रेसिडेंट पार्थ जे शाह ने कहा कि सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण में जिस तरह से बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के नाम और उनके विचारों का हवाला दिया, उससे उम्मीद जगी थी कि बजट में कुछ बड़े और व्यवस्थागत बदलाव पेश किए जाएंगे। लेकिन शनिवार को पेश बजट में इन विचारकों और उनके आर्थिक दर्शनों को व्यावहारिक तौर पर उम्मीद के मुताबिक लागू नहीं किया गया। दोनों दस्तावेजों को देखने से एकबारगी यह विश्वास नहीं होता है कि दोनों दस्तावेज एक ही सरकार ने पेश किए हैं।

सर्वेक्षण और बजट में कुछ बुनियादी सिद्धांतों और सोच में भारी अंतर

अमेरिका के मिशिगन यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे पार्थ जे शाह ने कहा कहा कि बजट और इसके पहले पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण को देखकर यह विश्वास करना कठिन है कि दोनों दस्तावेज एक ही सरकार ने पेश किए हैं। दोनों दस्तावेजों में कुछ बुनियादी सिद्धांतों और सोच में भारी असमानता दिखती है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुख्य थीम हैं बाजार के अदृश्य हाथों से संपत्ति का सृजन, भरोसा, लाइसेंस राज से मुक्ति, नियमनों से मुक्ति और निजीकरण (wealth creation through the invisible hands of the market and of trust, delicensing, deregulation and privatization)। मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने एडम स्मिथ, डेविड ह्यूम, एफए हायेक और मिल्टन फ्रीडमन के आर्थिक विचारों के आधार पर आर्थिक सर्वेक्षण तैयार किया है। उन्होंने इन्हीं सोच को आगे बढ़ाने वाले भारतीय विचारकों तिरुवल्लुवर और चाणक्य की सोच को भी आर्थिक सर्वेक्षण में प्रस्तुत किया है। शाह ने कहा कि मैं खुद हायेक का प्रशंसक रहा हूं, इसलिए उनकी पुस्तक रोड टू सर्फडम और 'यूज ऑफ नॉलेज इन सोसाइटी' शीर्षक वाले आलेख को आर्थिक सर्वेक्षण में प्रस्तुत किए जाने की मुझे काफी खुशी है।

हजारों छोटे-मोटे बदलाव, पर कोई बड़ा सुधार नहीं

उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आजाद भारत के इतिहास में अब तक की सबसे लंबी अवधि वाला बजट पेश किया। उन्होंने बजट में देश के हर संभव समूहों के लिए कुछ न कुछ दिया है। बजट में हजारों छोटे-मोटे बदलाव किए गए हैं, लेकिन कोई बड़ा सुधार नहीं पेश किया गया है। कारोबारी सहूलियत, रेगुलेशन से मुक्ति या निजीकरण की तरफ बढ़ने के लिए कोई व्यवस्थागत या बड़ा बदलाव नहीं पेश किया गया। जो किया गया है सिर्फ प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार एक फरवरी को कारोबारी साल 2020-21 का बजट पेश किया।

साभारः दैनिक भास्कर