Andhra Pradesh

तेलंगाना के गठन के फैसले के साथ हमने जो शुरू किया है, वह इतना  खतरनाक है कि यदि इसे अभी नहीं रोका गया तो हम आने वाले वक्त में बहुत पछताएंगे। धमकाकर नया राज्य बनाने के लिए मजबूर करने की कोशिश के नतीजे अच्छे नहीं होंगे।
 

भारत में आर्थिक  स्वतंत्रता के मामले में आंध्र प्रदेश ने सब से अधिक तरक्की करी है. तेलंगाना जैसी विषम समस्या के चलते भी, आंध्र प्रदेश आर्थिक स्वतंत्रता के लिए एक  अनुकूल वातावरण प्रदान करने में सफल रहा है.

फ्रेडरिक नौमान फ़ौंडेशन (दक्षिणी एशिया) द्वारा हाल ही में जारी की गयी 'इकोनोमिक फ्रीडम ऑफ़ द स्टेट्स ऑफ़ इंडिया 2011' (भारत के राज्यों में आर्थिक स्वतंत्रता 2011) रिपोर्ट  के अनुसार आर्थिक स्वतंत्रता के क्षेत्र में तामिल नाडू  सर्वोच्च रहा जबकि गुजरात दूसरे स्थान पर आया. अपना पिछला प्रदर्शन सुधारते हुए, आन्ध्र प्रदेश ने इस बार 4 जगह की छलांग लगाई और तीसरे स्थान पर आया. पिछली बार की लिस्ट में आन्ध्र प्रदेश सातवें स्थान पर था.

श्री कृष्णा आयोग रिपोर्ट आने के बाद पृथक तेलंगाना राज्य की मांग एक बार फिर गरमा गयी है. जस्टिस श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में फरवरी, 2010 में गठित पांच सदस्यीय समिति ने तेलंगाना समस्या के समाधान के लिए सरकार के सामने कई रास्ते खोले हैं, जिस मे प्रमुख सलाह है आंतरिक सुरक्षा और विकास की दृष्टि से आंध्र प्रदेश को ज्यों का त्यों एक संगठित राज्य के रूप मे बनाए रखा जाए.