Africa

पिछले तीन-चार वर्षों में अमेरिका और यूरोप को भारत से होने वाले निर्यात की रफ्तार धीमी हुई है. ऐसे में भारत द्वारा नए निर्यात बाजार खोजे जा रहे हैं. इसी परिप्रेक्ष्य में मई 2011 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अफ्रीकी देशों की यात्रा की. उन्होंने अदीस अबाबा में आयोजित अफ्रीका-भारत फोरम के शिखर सम्मेलन में 15 अफ्रीकी देशों के लिए पांच अरब डॉलर के कर्ज की घोषणा की और अफ्रीकी देशों से कारोबारी संबंध बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए.

भारत आर्थिक सुधार करने में भले ही अफ्रीका से पीछे रहा, लेकिन विकास में काफी आगे निकल चुका है। भारत में ज्यादातर सुधार जीडीपी विकास दर के 6 फीसदी से बढ़कर 9 फीसदी तक पहुंचने से काफी पहले ही हो चुके थे। ब्रिटिश विद्वान जेम्स मेनर कहते हैं कि घाना और दक्षिण अफ्रीका के विचारशील लोग उनसे पूछते हैं, "भारतीय ऐसा कैसे कर पाते हैं? उनके यहां उदारीकरण हमसे कम हुआ, लेकिन उनकी विकास दर हमसे ज्यादा है और समाज में स्थिरता भी अधिक है।"

इसका जवाब मैं देना चाहुंगा। आर्थिक सफलता महज आर्थिक सुधारों पर नहीं बल्कि सांस्थानिक मजबूती और ऐतिहासिक कौशल पर भी निर्भर करती है- जिसे अर्थशास्त्री ‘आरंभिक स्थितियां’ (इनिशियल कंडीशन) कहते हैं। भारत और चीन ऐतिहासिक महाशक्तियां हैं। यहां औद्योगिक क्रांति से पहले दुनिया के संपूर्ण औद्योगिक उत्पादन का 70 फीसदी उत्पादन होता था।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर