सरकारी विभाग

 

 

मिल्टन फ्रीडमैन ने अमेरिका, यूरोप, चीन और सोवियत रूस में निजीकरण की प्रवृत्ति की छानबीन की और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आर्थिक स्वतंत्रता का कोई एक तय मार्ग नहीं होता है और इस दौरान सांस्कृतिक भिन्नताओं का भी ध्यान रखना आवश्यक है।  

भारत में न्याय कछुआ चाल से होता है। मुकदमों के निपटारे की बेहद धीमी रफ्तार का ही नतीजा है कि  देश के न्यायालयों में 2 करोड़ 60 लाख से ज़्यादा मुक़दमे लंबित हैं। इनमें से कई तो आधी सदी से भी ज़्यादा पुराने हैं। आज की तारीख में सुप्रीम कोर्ट र्में कुल 56,304 मुकदमे लंबित हैं। इस न्यायालय में एक साल तक पुराने मुकदमों की कुल संख्या 19,968 हैं। यही हाल हाईकोर्टों का भी है। यहां पांच लाख 30 हजार याचिकाएं तो वह हैं जो 10 से ज्यादा वर्षों से लंबित हैं। निचली अदालतों में तो अराजकता फैली हुई है। वहां तो लंबित मामलों की संख्या करोड़ों में है।

Category: