समाजवादी

आजादी के बाद के भारत की पहचान उसकी समाजवादी विचारधारा रही है लेकिन धीरे-धीरे वह बदला लेकिन 1991 के उदारवादी सुधारों को लागू करने के बाद भी वह मुक्त व्यापार और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिकूल है। कम्युनिस्ट पार्टी की दमनकारी नीति के कारण पश्चिमी उदारवाद चीन में जड़े नहीं जमा सका। इस तरह दोनों ही देशों की कोई खास विचारधारा नहीं है। लेकिन चीन भारत की तरह बेखबर नहीं है।चीन का एक स्पष्ट लक्ष्य है – आर्थिक वृद्धि और विकास और उसे हासिल करने के लिए एक  सुनिश्चित राह है ।यह बात अलग है कि उसने मुक्त बाजार के सिद्धांतों को समाजवादी विचारधारा की ओट में छुपा रखा है।