संरक्षणवाद

राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मंदी की चर्चा एक बार फिर जोर पकड़ रही है। आर्थिक विकास के दर का अध्ययन करने वाली तमाम संस्थाएं दुनियाभर में मंदी को आसन्न मान रहीं हैं। प्रतिक्रिया स्वरूप सबसे पहले अमेरिका जैसे देश ने अपनी अर्थव्यवस्था को मंदी से अप्रभावित रखने और व्यवसायियों को फौरी राहत देने के तौर पर संरक्षणवाद का लबादा ओढ़ना शुरू कर दिया है। पहले से ही कर्ज के संकट में घिरे यूरोप और उसके बाद जापान, चीन और भारत में आर्थिक विकास की धीमी पड़ती रफ्तार, मंदी के अंदेशे को हवा देने के लिए काफी है।