गाथा

गुजरात ने इस दलील को गलत साबित कर दिया है कि लोगों को कम दाम में बिजली चाहिए होती है और वह ज्यादा दामों का भुगतान नहीं करना चाहते।गुजरात का अनुभव बताता है कि  लोग भुगतान करने को तैयार होते हैं  बशर्ते बिजली सप्लाई बेहतर हो।यह ज्योतिग्राम योजना के साथ भी हुआ है ।एक बार जब बिजली पूर्व निर्धारित समय पर उपलब्ध हो जाती है तो कृषि के लिए मिलनेवाली सब्सिडाइज्ड रेटवाली बिजली को घरेलू खपत के लिए इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति कम हो गई  है। ज्योतिग्राम योजना ने बिजली के ट्रांसमिशन और वितरण के दौरान होनेवाले नुक्सानों को कम किया है। उसने ट्रांसफारमर खराबी घटनाओं को कम करन

गुजरात में कृषि की विकास दर 10 प्रतिशत से ज्यादा रही है। इसमें पानी बिजली और सड़कों के अलावा भी कई कारकों की भूमिका रही है।2005 में कृषि महोत्सव कार्यक्रम शुरू किया गया ।यह किसानों के साथ जनसंपर्क का कार्यक्रम है जो  महीनेभर चलता है। इसमें कृषिऱथों का भी समावेश है। जमीन के हर टुकड़े के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य संबधी कार्ड जारी किए गए हैं।2007 में गुजरात कोपरेटीव एंड वाटर यूजर्स पार्टीसिपेटरी इरीगेशन मैनेजमेंट एक्ट पारित किया गया और सहभागिता पर आधारित सिंचाई प्रबंधन की अवधारण को प्रस्तुत किया गया।

दसवीं पंचवर्षीय (2002-07) में गुजरात की विकास यात्रा में साफ –साफ प्रगति दिखाई देती है।इम लाइन को खींचने के लिए पंच वर्षीय योजनाएं स्वाभाविक कालखंड हैं।हमें यह दलील देने की इच्छा हो सकती है कि गुजरात में ऐसा कुछ खास नहीं हुआ है वह आठवी पंचवर्षीय योजना (1992-97)के समय से ही तेजी से विकास कर रहा है।हालांकि यह सही है लेकिन हमें यह मान लेना चाहिए कि जैसे-जैसे विकास होता है वैसे –वैसे उच्च विकास दर को बरकरार रखना मुश्किल होता जाता है।