एडम स्मिथ

आर्थिक मंदी की आहट मिलते ही तमाम बुद्धिजीवों और उद्योगपतियों के द्वारा सरकार से राहत पैकेज की मांग जोर पकड़ने लगी है.. ऐसा देश में नौकरियों को बचाने उद्योग धंधों को बंद होने से बचाने के नाम पर किया जा रहा है। लेकिन नीति निर्धारकों को ऐसा कोई भी कदम उठाने के से पहले आधुनिक अर्थशास्त्र के जनक एडम स्मिथ के उस कथन को एक बार पुनः अवश्य पढ़ना चाहिए.. एडम स्मिथ ने कहा था कि 'उस कार्य के लिए जिसका परिणाम, किसी वर्ग विशेष के हित तक सीमित हो, सभी वर्गों के हिस्से के हितों की आहूति अन्याय होगा'..

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[आधुनिक उत्पादन-व्यवस्था का मंत्र ‘लेजे फेयर’ एडम स्मिथ का मौलिक विचार नहीं था, उसने तो सिर्फ इसका समर्थन किया था. यह जानने के बावजूद आर्थिक उदारीकरण और बाजारवाद के आलोचक उसको वर्तमान पूंजीवादी अराजकता के लिए जिम्मेदार मानते हैं. कतिपय यह सही भी है. लेकिन वे भूल जाते हैं कि स्मिथ ने लोगों को यह कहकर सावधान भी किया था कि पूंजीपति उत्पादन प्रक्रिया में किसी कल्याण-भावना से नहीं, विशुद्ध स्वार्थपरता के कारण हिस्सा लेता है. इसलिए उसपर नजर रखने की जरूरत है. मगर अधिकांश देशों की सरकारें पूंजीपतियों पर नजर रखना तो दूर, उल्टे उनके हाथों की कठपुतली की तरह काम करती हैं.