केवल प्रतिबन्ध से नहीं होगा सीरिया का भला

अमेरिका की मदद से यूरोपियन संघ ने गत 2 सितम्बर को सिरिया द्वारा तेल के निर्यात पर व्यापारिक प्रतिबन्ध लगा दिया है|  सिरिया द्वारा निर्मित पूर्ण भाग से  लगभग 95% तेल यूरोपियन संघ खरीदता है| सिरिया के कुल राष्ट्रीय आय का लगभग एक तिहाई भाग इसी से आता है| बशर असद शासन की जेब पर हमला कर, यूरोपियन संघ सिरियन सरकार को हिलाना चाहता है ताकि वो नागरिकों पर अपनी दमनकारी नीतियाँ चलाना बंद करे.

पर यूरोपियन संघ की ये नीति केवल दूर की कौड़ी मात्र होगी| असद शासन को हिलाने और और उनकी अर्थव्यवस्था को डगमगाने के लिए और भी कई दृष्टिकोणों को मद्देनज़र रखना होगा.

सबसे पहले तो ये प्रतिबंध लघुकाल मे उतना प्रभावशाली नहीं होगा क्योंकि सीरिया अभी तक सार्वभौमिक अर्थव्यवस्था में एकीकृत नहीं हो पाया है| ये विश्व व्यापार संगठन का सदस्य नहीं है एवं कृषि सहित कई क्षेत्रों में आत्मनिर्भर भी है| घरेलू उपभोग के लिए इस देश के पास पर्याप्त तेल और गैस है| इसके अलावा इरान सदैव इसकी मदद के लिए तैयार रहेगा|

ये उम्मीद की इस प्रतिबन्ध से सीरिया का बिजनेस समुदाय असद शासन का समर्थन करना बंद कर देगा भी त्रुटिपूर्ण है। सीरिया का बिजनेस समुदाय दो वर्गों में विभाजित है- एक नया असद समर्थित मध्य वर्ग और दूसरा कई वर्षों से स्थापित पुराना वर्ग जिसमें डमसकस और अलेप्पो के सुन्नी और इसाई व्यापारी परिवार शामिल हैं. दोनों ही वर्ग असद शासन का समर्थन करते आये हैं। पहले वर्ग को इस शासन में अनेको लाभ प्रदान किये जा रहे हैं और दूसरा वर्ग अस्थिरता, धार्मिक संघर्ष आदि के डर से किसी भी तरह के विरोध से बचता है. इसलिए बहुत मुश्किल है कि इस देश का व्यापारी समुदाय इस प्रतिबन्ध की वजह से असद के खिलाफ चला जाए।

यूरोपियन संघ की यह उम्मीद कि आर्थिक समस्या के कारण सीरियन शासन की दमनकारी नीति कमजोर पड़ जाएगी वास्तविकतावादी नही प्रतीत होती। ये शायद तब ज्यादा प्रभावशाली होता जब इस शासन का मुख्य उद्देश्य यहाँ की जनता का आर्थिक विकास होता | आर्थिक बदलाव के मद्देनजर लोग राजनैतिक बदलाव के लिए पुरजोर कोशिश भी करते हैं | सिरिया एक लोकतंत्र नहीं है. वो अपने लोगों के धन संग्रह को बढाने के ख़ास चिंतित नहीं है। प्रतिबन्ध लगने के बाद भी, असद शासन की ताकत में कमी आती नहीं दिखती।

इसके बाद भी,सीरियन अधिकारियों ने इस प्रतिबन्ध की पूर्ण तैय्यारी कर ली थी | उन्होंने अपनी संपूर्ण संचयी धनराशी को किसी  अमेरिकी या यूरोपीय देश में नहीं रखा है |  वो इसे या तो किसी सुरक्षित कराश्रय वाली जगह या देश के भीतर ही रखते हैं राज्य की संपत्ति पर रोक लगाना भी इतना आसान नहीं है | सेंट्रल बैंक के पास पहले से ही 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर सुरक्षित रखे हैं | लेबनान, टर्की और लैटिनअमेरिका से धन की तस्करी करके सीरियन शासन इस व्यापारिक प्रतिबन्ध के बावजूद भी निर्बाध रूप से आगे बढ़ता रहेगा | इसके अलावा इरान भी उसे आर्थिक सहयोग दे सकता है |

यदि ये प्रतिबन्ध एक लम्बे समय तक रखा गया तो सीरिया शासन को तो कुछ नहीं होगा पर वहाँ के गरीब लोगो को ज़रूर भारी नुकसान उठाना पड़ेगा | समृद्ध एवं अच्छी पहुच वाले लोगों को कभी फर्क नही पड़ेगा , वो किसी न किसी रस्ते से बच निकालेंगे पर सीरिया  के आम नागरिको को ही भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है| कमजोर अर्थव्यवस्था वहाँ पर गरीबी एवं बेरोज़गारी बढ़ा देगी | इस प्रतिबन्ध से तेल के राजस्व में भारी कमी आयेगी जिसकी वजह से राज्य शासन को अपने ओर से  कर्मचारियों को वेतन एवं नागरिक सेवाये देनी होंगी।

इस व्यापारिक प्रतिबन्ध में न केवल कई दोष हैं बल्कि इसको लागू करने में भी कई सारी समस्याएं आ रही  हैं | ये प्रतिबन्ध एकतरफा है | चीन एवं रूस ने इसे मानने से न केवल इनकार कर दिया है बल्कि इस व्यापारिक प्रतिबन्ध के एक बड़े हिस्से का विरोध भी किया है |  सर्वसम्मति के बिना ये प्रतिबन्ध बिलकुल भी प्रभावशाली नहीं होगा | भू-मंडलीकरण  के इस दौर एवं अंतर्देशीय सीमाओं के आसान उपयोग के दम पे यहाँ का शासन धन कमाने का कोई दूसरा रास्ता भी निकाल लेगा, चाहे उसका सबसे बड़ा स्त्रोत क्यो न बंद हो गया हो |

तेल पे लगा ये प्रतिबन्ध अभी 10 दिनों तक पूर्णतयः लागू नहीं होगा क्योंकि इटली की तेल कम्पनियां अभी इस प्रतिबन्ध की शर्तों को समझने की कोशिश कर रही है | इस से प्रतिबन्ध के बाद पड़ने वाले असर पर भी कमी पड़ेगी | ये देरी शासन को इतना समय देगी कि वो इस से पड़ने वाले प्रभाव के लिए भी तैयार हो जायेंगे |

याद रहे की अमेरिका ने सीरिया के ऊपर पिछले 8 वर्षों से प्रतिबन्ध लगा  रखा है पर उस से असद की सरकार को कभी कोई समस्या नहीं हुई | ऐसे प्रतिबन्ध से फिर क्या फायदा। प्रतिबन्ध ऐसा होना चाहिए जिस से सीरियाई सरकार अन्दर से कमजोर हो जाए | प्रतिबन्ध को एक वृहद् स्तर पर सोचा जाना चाहिए जिसमे राजनैतिक , आर्थिक एवं कूटनैतिक प्रलोभन भी हों , जो असद शासन को जड़ से हटाने में सीरिया के विपक्ष की  भी मदद करे|

- हिशाम अल मौसाई
साभार: वाल स्ट्रीट जर्नल