कमेन्टरी - स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

इस पेज पर स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर के लेख दिये गये हैं। ये लेख शीर्ष बिजनेस अखबारों में स्वामीनॉमिक्स कॉलम में प्रकाशित होते हैं।

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आज की भारतीय राजनीति राजनीतिज्ञों से कम और सुप्रीम कोर्ट और महा लेखा नियंत्रक (सीएजी)द्वारा ज्यादा संचालित हो रही है।इसका भारतीय राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?

जवाब यह है कि हम भारत की संवैधानिक संस्थाओं द्वारा भ्रष्ट और बेरहम राज्य के खिलाफ बगावत देख रहे हैं। एक अंतर्निहित राजनीतिक साझिश यह सुनिश्चित करती है कि सभी राजनीतिक दल बड़े पैमाने पर ऱिश्वत और भाईभतीजावाद में बड़े पैमाने पर लिप्त  होते हैं। ऐसे माहौल में नतीजे केवल न्याय से नहीं वरन पैसे, बाहुबल और प्रभाव से तय होते हैं।

Published on 27 Aug 2012 - 15:50

इस वर्ष मानसून बहुत कमजोर रहा जैसा 1965 में रहा था। लेकिन इस बार इसे थोड़ी बड़ी असुविधा से ज्यादा महत्व नहीं दिया जा रहा जबकि 1965 में यह दैत्याकार और भयावह आपदा थी। भारत पर अब सूखे का असर न पड़ना एक यशोगाथा है लेकिन  ऐसी जिसे आमतौर पर गलत समझा गया है।

छठे दशक में भारत अमेरिकी अनाज सहायता  पर बुरी तरह निर्भर था । यहां तक 1964 में जब मानसून बहुत अच्छा रहा तब भी भारत को 70लाख टन अनाज की सहायता लेनी पड़ी थी जो घरेलू उत्पादन के दस प्रतिशत से कहीं ज्यादा थी। उसके बाद भारत में दो साल 1965और

Published on 31 Jul 2012 - 17:32

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब वित्तमंत्री भी बन गए हैं। उनका वित्तमंत्री के रूप में पहला कार्यकाल(1991-96) आर्थिक सुधार का महत्वपूर्ण कालखंड़ था जिसने भारत को अंतर्राष्ट्रीय भिखारी से संभावित महाशक्ति में बदल दिया। क्या मनमोहन सिंह के वित्तमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल में भी वैसे ही साहसिक सुधार देखने को मिलेंगे?

इसके आसार नहीं हैं। मनमोहन सिंह आठ वर्ष तक प्रधानमंत्री के तौरपर बिल्कुल शक्तिहीन रहे हैं। यह सब उनके वित्तमंत्री बनने के बाद बदल नहीं जाएगा क्योंकि वास्तविक सत्ता तो सोनिया गांधी के

Published on 5 Jul 2012 - 17:39

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