भारत के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन औसत से नीचे

एजुकेशनल इनिशिएटिव्स द्वारा भारत में शिक्षा के क्षेत्र में एक सर्वेक्षण के अनुसार केरल, महाराष्ट्र, उड़ीसा और कर्नाटक सभी बिन्दुओं में आगे रहे. जबकि सब से खराब प्रदर्शन रहा जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश व राजस्थान का.

‘स्टुडेंट लर्निंग स्टडी’ (SLS) नामक यह सर्वेक्षण मशहूर इन्टरनेट कम्पनी गूगल की वित्तीय सहायता से कराया जाता है. भारत के 18 राज्यों के 48 जिलों और 1 संघ शासित क्षेत्र में यह सर्वेक्षण करवाया गया. देश भर में से 2399 चुनिन्दा सरकारी स्कूलों में कक्षा 4, 6, और 8 में पढने वाले करीब 101643 बच्चों पर यह सर्वेक्षण करवाया गया.

भारत की 13 भाषाओं में कामन टेस्ट पेपर तैयार किये गए जिन से बच्चों की भाषा और गणित सम्बन्धी ज्ञान टेस्ट किया गया.

SLS के मुख्य नतीजों में यह पता चला कि बच्चों में सीखने का स्तर काफी कम था. बच्चे समझ कर नहीं सीख रहे थे और उन के मन में कांसेप्ट भी साफ़ नहीं थे. छात्रों को न सिर्फ पढ़ कर ठीक से समझने में दिक्कत है, वे अपने विचार अपने शब्दों में लिखने में भी असमर्थ महसूस करते हैं.

रोचक तौर पर अलग अलग राज्यों में हमें अलग अलग आंकड़े देखने को मिलते हैं. हालांकि ये ज़रूर देखा गया है कि सब से अच्छे प्रदर्शन वाले राज्य भी उम्मीद से काफी नीचे रहे और उन में सुधार की काफी गुंजाईश दिखी.

वे छात्र जिन्होने हर बिंदु पर शून्य अंक पाये उन का औसत प्रतिशत 0.8% रहा. शून्य अंक पाने वालों की संख्या मध्य प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान और गुजरात में सब से ज्यादा रही. इन में से पहले तीन संपूर्ण प्रदर्शन में भी सब से नीचे के पायदान पर रहे.

कुछ अन्य नतीजों के अनुसार केरल, महाराष्ट्र, उड़ीसा और कर्नाटक करीबन हर क्लास व विषय में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. पर महाराष्ट्र को कक्षा 8 में भाषा पर और कर्नाटक को कक्षा 4 में भाषा पर ध्यान देने की ज़रुरत है.

पंजाब सिर्फ कक्षा ६ के बाद ही भाषा पर ध्यान दे पा रहा है और गणित में उसे काफी ध्यान देने की ज़रुरत है. तमिलनाडू कक्षा 4 में भाषा में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है पर कक्षा 8 में वो राष्ट्रीय औसत से नीचे गिर जाता है. छत्तीसगढ़ कक्षा 4 में भाषा बिंदु पर राष्ट्रीय औसत जैसा ही है पर और सभी कक्षा व विषयों में वो राष्ट्रीय औसत से पिछ्ड़ जाता है. बिहार और झारखण्ड कक्षा 4 में भाषा बिंदु पर राष्ट्रीय औसत से बहुत नीचे है और बाकी सभी कक्षा व विषयों में भी वो राष्ट्रीय औसत से पीछे ही हैं.

संपूर्ण नतीजों में ये निकल के आया कि भारत के सरकारी स्कूलों में कक्षा 4 व 8 के बीच पढने वाले छात्रों का ज्ञान / सीखने का स्तर TIMSS  (Trends in International Maths and Sciences Study) सरीखे कुछ माने हुए अंतर्राष्ट्रीय औसतों से काफी नीचे है.