'विकल्प' टूलकिट से आसान होगी स्किल डेवलपमेंट की राह

- सेंटर फॉर सिविल सोसायटी ने महाराष्ट्र में तीन वर्षों तक चलाया 'स्किल वाउचर' पायलट प्रोजेक्ट
- कैरियर मेले का आयोजन कर 2000 युवाओं के कौशल विकास में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
- 3-4 माह के प्रशिक्षण के बाद युवाओं को अमेजन व एचडीएफसी बैंक सहित तमाम राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय कंपनियों में मिली नौकरी

युवाओं से नौकरी की तलाश करने की बजाए नौकरी पैदा करने का आह्वान करने वाली केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी 'कौशल विकास' योजना को समाज के सभी वर्गों का समर्थन हासिल हो रहा है। सरकार व सरकारी एजेंसियों की मदद करने व फंडिंग के लीकेज को न्यूनतम कर इस योजना को सफल बनाने के लिए थिंकटैंक 'सेंटर फॉर सिविल सोसायटी' (सीसीएस) भी आगे आया है। सीसीएस ने इस संदर्भ में एक विशेष 'टूलकिट' लॉ़ंच किया है। टूलकिट का निर्माण महाराष्ट्र में तीन वर्षों तक चलाए गए एक पायलट प्रोजेक्ट 'विकल्प' द्वारा प्राप्त परिणामों के आधार पर किया गया है। सीसीएस की योजना केंद्र सरकार सहित कौशल विकास के क्षेत्र में कार्य कर रहे राज्यों के संबंधित मंत्रालयों और विभागों को इस टूलकिट से अवगत कराने और इसे लागू कराने की है। 

सेंटर फॉर सिविल सोसायटी एक शोध आधारित थिंकटैंक है। इस थिंकटैंक ने महाराष्ट्र सरकार, एनएसडीसी, एमएसडीएफ व बारटी के संयुक्त तत्वावधान में मुंबई और पूणे के 18-35 आयुवर्ग के 2000 युवाओं को उनके पसंदीदा संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में दाखिले के लिए प्रशिक्षुओं को आवश्यक धनराशि वाउचर के माध्यम से प्रदान की गई। महाराष्ट्र में प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे सीसीएस के एसोसिएट डाइरेक्टर गौरव अरोड़ा ने बताया कि 'विकल्प' प्रोजेक्ट के तहत मुंबई व पुणें के 1800 एससी/एसटी व 200 सामान्य वर्ग के जरुरतमंद युवाओं का चयन किया गया। चयन के लिए 55 रोजगार मेलों का आयोजन किया गया और इच्छुक युवाओं की शैक्षणिक योग्यता और रूचि के आधार पर काउंसलिंग की गई और उन्हें मनपसंद प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिला दिलाया गया। प्रशिक्षण शुल्क की धनराशि सीधे लाभार्थियों को वाउचर के माध्यम से प्रदान की गई जिसे सिर्फ प्रशिक्षण संस्थान ही कैश करा सकते थे।

गौरव के मुताबिक वाउचर के इस्तेमाल के कारण पैसे के दुरुपयोग को रोकने में सफलता मिला। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के लिए चुने गए 2000 छात्रों में से पाठ्यक्रम को बीच में छोड़ने वाले युवाओं की तादात सिर्फ 9.5% रही। जबकि 60% युवाओं ने प्रशिक्षण हासिल करने के बाद आईटी, बैंकिंग, ट्रैवेल एंड टूरिज्म, ऑटो मोबाइल, रिटेल व निर्माण के क्षेत्र में नौकरी हासिल करने में सफलता प्राप्त की। अब हमारी योजना इस पायलट प्रोजेक्ट के क्रियान्यवन, अभ्यर्थियों के चयन, काउंसलिंग व परिणामों के आधार पर विकसित अनूठे टूलकिट को केंद्र व राज्य सरकारों तक पहुंचाना और इसके माध्यम से वास्तविक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाना है। विदित हो कि सोमवार को राजधानी के वाईएमसीए ऑडिटोरियम में इस अनूठे टूलकिट को लांच किया गया जिसे डिपार्टमेंट ऑफ वेलफेयर ऑफ एससी/एसटी/ओबीसी एंड मायनॉरिटीज, दिल्ली सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नरेंद्र कुमार व स्किल डेवलपमेंट एंड लीड, कॉरपोरेट प्रोग्राम्स एट स्किल एकेडमी, दिल्ली सरकार के सलाहकार अभिषेक गुप्ता ने लांच किया। इस मौके पर सीसीएस के प्रेसिडेंट डा. पार्थ जे.शाह, ग्रामीण विकास मंत्रालय के दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना की सीईओ गायत्री बी. कालिया, एमएसडीएफ के पूर्व निदेशक सत्यम डारमोरा, केपीएमजी के निलाचल मिश्रा, इंडिया डेवलपमेंट फाऊंडेशन के संस्थापक निदेशक सुभाषीश गंगोपाध्याय, थिंकथ्रू कंसल्टिंग के प्रबंध सहयोगी पारुल सोनी मौजूद थे।

- आजादी.मी