अंतर्राष्ट्रीय संपत्ति अधिकार सूचकांक में भारत की रैंक 52

सन 2011 के अंतर्राष्ट्रीय संपत्ति अधिकार सूचकांक की हाल में ही घोषणा हुई जिसमें विश्व के 129 देशों के बौद्धिक और भौतिक संपत्ति अधिकारों को मापा गया है.

भारत स्थित सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी सहित विश्व के 67 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने इस बार वाशिंगटन डी सी स्थित 'प्रोपर्टी राईट्स अलाइंस' के साथ मिल कर इस पांचवे वार्षिक सूचकांक को पेश किया है.

संपत्ति अधिकार के क्षेत्र में भारत अभी भी पीछे है और काफी सुधार की संभावना है.  इस बार के सूचकांक में भारत का कुल स्कोर 5.6 है और 129 देशों में उसकी रैंक 52 है. अगर क्षेत्रीय आंकड़ों की बात करें तो 19 देशों में भारत की रैंक 9 है.

अगर न्यायिक और राजनैतिक वातावरण की बात करें तो भारत का स्कोर इस बार 4.7 था, भौतिक संपत्ति अधिकार में उस का स्कोर 6.6 था, बौद्धिक सम्पदा अधिकार में 5.5 और लिंग समानता में 5.1 था. पिछले वर्ष के स्कोर की तुलना में ये एक मामूली सुधार था.

पिछली बार की तरह इस बार भी फिनलैंड आर स्वीडन ने अच्छा प्रदर्शन किया और दोनों ही 8.5 के स्कोर के साथ शीर्ष पर रहे.

सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ पार्थ जे शाह ने कहा भारत के सामने संपत्ति अधिकार के क्षेत्र में बहुत समस्याएं हैं. दिक्कतों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भूमि टायटिल का दस्तावेजीकरण आज भी बहुत कमज़ोर है, पटवारी के पास रहने वाला भूमि संबंधी डाटा अपूर्ण है और भूमि अर्जन अधिनियम का दुरूपयोग भी काफी सामान्य है. डॉ शाह ने कहा कि भारत में संपत्ति अधिकार के क्षेत्र में गरीब आज भी अपनी ज़मीन के सरकार या निजी पार्टियों द्वारा बलपूर्वक अधिग्रहण के खिलाफ जंग लड़ रहा है. एक तरफ तो हम हर साल ऊंची आर्थिक विकास दर हासिल कर रहे हैं, पर इस मामले में हम लगातार पीछे हैं.

अंतर्राष्ट्रीय संपत्ति अधिकार सूचकांक कुल स्कोर तक पहुँचने के लिए तीन मुख्य क्षेत्रो पर केन्द्रित रहता है: कानूनी और राजनैतिक वातावरण, भौतिक संपत्ति अधिकार और बौद्धिक सम्पदा अधिकार. सबसे ज़रूरी बात ये है कि इस सूचकांक के ज़रिये देशो के बीच में आर्थिक अंतरों के लिए ज़िम्मेदार संपत्ति अधिकार की विवेचना की जाती है. इस सूचकांक के ज़रिये विश्व भर से सामान्य जनता, शोधकर्ताओं और नीतिनिर्माताओं को वैश्विक संपत्ति अधिकार पर तुलनात्मक अध्ययन और शोध करने का एक उपकरण प्रदान करता है. कड़े संपत्ति नियमों की मदद से औसत से कम प्रदर्शन करने वाले देश भविष्य में सुद्रण अर्थव्यवस्था खड़ी  कर सकते हैं. जिन विकासशील देशों में कड़े संपत्ति अधिकार हैं वहाँ अधिक GDP विकास दर और कम गरीबी होती है. अधिक जानकारी के लिए लोगिन करें www.propertyrightsalliance.org

-स्निग्धा द्विवेदी