क्या है मोदी का विकास का माडल? -----(1)

विकास, विकास और विकास यही है गुजरात में नरेंद्र मोदी की तीसरी बार शानदार जीत का राज – ऐसा बहुत सारे राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है। बात कुछ हद सही भी है क्योंकि इस बार गुजरात विधानसभा के चुनावों में नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया गुजरात का विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा था जिस पर काफी तीखी बहस भी हुई। एक तरफ नरेंद्र मोदी और उनके समर्थक थे जो  गुजरात के असाधारण विकास का पुरजोर दावा कर रहे थे। उनकी नजर में गुजरात ने जो विकास किया है वह सारे देश के लिए एक माडल एक मिसाल बन सकता है। दूसरी तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल तथा कुछ सेकुलर कहलानेवाले संगठन मोदी के विकास पर सवालिया खड़ा किए हुए थे उनकी नजर में मोदी के विकास के दावे तो झूठ का पुलिंदा हैं जो सामाजिक विकास सूचकांकों में कहीं प्रतिबिंबित नहीं होते। इसके बावजूद मोदी के विकास का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला और उसने मोदी को एक बार फिर शानदार तरीके से जीता दिया।

गुजरात के विकास माडल की चर्चा केवल गुजरात ही नहीं वरन सारे देश भर में है। जबसे मोदी के प्रधानमंत्री बनने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा है तबसे यह चर्चा और भी व्यापक रूप लेती जा रही है।इसलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि विकास का मोदी माडल क्या बला है। और क्या वह सारे देश में कारगर हो सकता है ?  टाटा,अंबानी,अडा़नी तथा अन्य बड़े उद्योगपति गुजरात माडल की तारीफ करते नहीं अघाते। उनके द्वारा की गई तारीफ को यह सोचकर नजरंदाज किया जा सकता है कि उनकी तारीफ के पीछे उनके निहित स्वार्थ हो सकते है क्योंकि वायब्रेंट गुजरात की मोदी की परिकल्पना ने गुजरात में उद्योगों को इतनी सुविधाएं उपलब्ध कराईं है कि अब तो गुजरात बड़े  उद्योगों का गंतव्य बनता जा रहा है। लेकिन मोदी के प्रशंसक केवल उद्योगपतियों तक ही सीमित नहीं हैं वरन अब तो राश्ट्रीय और  अंतरार्ष्टीय स्तर के अर्थशास्त्री भी बहुत मुक्त कंठ से मोदी के विकास माडल की तारीफ करने लगे हैं। चुनाव से पहले जानेमाने अर्थशास्त्री बिबेक देवराय की पुस्तक- गुजरात : गवर्नेस फार ग्रोथ एंड डेवलपमेंट) आई थी अब जगदीश भगवती और अरविंद पानगरिया की पुस्तकें आईं हैं। ये दोनों ही पुस्तकें बहुत गंभीरता और निष्पक्षता से गुजरात माडल का विश्लेषण करती हैं  और इस नतीजे पर पहुंचती हैं कि गुजरात का विकास माडल बहुत पुख्ता जमीन पर खड़ा है । हाल ही में अतंर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त  फ्रेजर इंस्टीट्यूट देश ने राज्यों  में आर्थिक स्वतंत्रता,राजकाज और समावेशी विकास के लिहाज से   जो सूचकांक तैयार किया है उसमें गुजरात पहले नंबर पर है। आर्थिक स्वतंत्रता के मामले में अव्वल रहना गुजरात के विकास की विशेषता को व्याख्यायित करता है कि गुजरात का विकास मुख्यरूप से लोगों को उपलब्ध कराई गई  आर्थिक स्वतंत्रता की देन है।

कई मायनों में मोदी का विकास बाकी भाजपा शासित राज्यों से अलग है। इन  भाजपा शासित राज्यों में कांग्रेसी सरकारों की तर्ज पर खैरात बांटनेवाली योजनाओं की भरमार है । मध्यप्रदेश को ही लीजिए वहां ऐसी-ऐसी जनकल्याणकारी योजनाएं हैं जैसे राज्य सरकार लड़की की शादी के लिए पैसा देती है और तीर्थयात्रा के लिए भी। इसतरह से एक माई बाप सरकार की छवि को पुख्ता करती है।। उसका जोर लोगों को उद्यमशीलता के लिए अनुकूल माहौल देकर अपने पांवों पर खड़ा करने पर नहीं है उन्हें खैरात बांटने पर ज्यादा है।नरेंद्र मोदी इस मामले में अलग राह पकड़ते हैं । यह राह ही उनकी खासियत है।यह  विकास को तेज कर समृद्धि लाने की राह है।।राज्यसभा सांसद अनिल माधव दवे की पुस्तक –शिवाजी एंड सुराज – की नरेंद्र मोदी द्वारा लिखी प्रस्तावना में नरेंद्र मोदी ने विकास के बारे में अपनी सोच को स्पष्ट करते हुे कहा भी है-“निजी तौर पर मैं पी2-जी2 यानी -पापुलर प्रोडक्टीव गुड गवर्नेंस – में विश्वास रखता हूं।इस माडल का सार विकास की सुदृढ प्रतिबद्धता ,खासतौर पर मानवीय विकास स्पष्ट दृष्टिकोण और लक्ष्य निर्धारित करना है।इसलिए मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस पर ही हमारा सारा ध्यान केंन्द्रित है।मेरा दृढ विशावास है कि शासन की असली शक्ति जनता के हाथों में होनी चाहिए।लोकतंत्र का यही मूल सार है। पारदर्शी प्रक्रियाओं और जवाबदेही को सुनिश्चित करने का मेरा अथक प्रयास रहा है।सामूहिक विचार,प्रशासन में स्पष्टताऔर जनता की भागीदारी ही सुशासन का मूल है।“

कुछ ऐसी ही बात उन्होंने इकानामिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में भी कही थी कि सरकार का व्यापार में क्या काम। (govt has no business to be in business)। इस तरह वे मानते हैं कि सरकार को स्वयं उद्योग धंधे चलाने के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि सरकार अच्छी व्यापारी नहीं हो पाती। गुजरात माडल यह है कि  राज्य मे व्यक्तिगत पहल और उद्यमशीलता के लिए आजादी दी गई है और राज्य ने इसके लिए अनुकूल माहौल पैदा किया है।यह नियोजन के सशक्तिकरण और लोगों के सशक्तिकरण का उदाहरण है। यह विशिष्ठ योजनाओं के द्वारा लक्ष्य-उन्मुख सार्वजनिक खर्च की व्यवस्था है।इसमें केंद्र के अनुदान से चलनेवाली योजनाओं के साथ राज्य की विशिष्ठ योजनाओँ को पूरक बनाया गया है। कहना न होगा कि मोदी ने अपनी सोच पर बखूबी अमल भी कर दिखाया।(जारी)

- सतीश पेडणेकर