सार्वजनिक नीति - अन्य लेख

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सकल घरेलू उत्पाद में तेजी से वृद्धि गरीबी का सबसे कारगर इलाज है। यही मुखर  संदेश है वर्ष  2009-10 के गरीबी के बारे में आंकड़ों का।2004-05 और 2009 -2010 के बीच 8.5 प्रतिशत  प्रतिवर्ष की रेकार्ड विकास दर ने 1.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की  रेकार्ड दर से गरीबी घटाई है। यह आंकड़ा  इससे पहले के 11वर्षों में गरीबी घटने की 0.7 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर के आंकड़े से दोगुना है।

वामपंथियों द्वारा अक्सर भ्रामक धारणा फैलाई जाती है कि तेजी से बढ़नेवाली विकास दर का लाभ केवल अमीरों को ही मिलता है गरीबों को उसका कोई लाभ नहीं मिल पाता। उपरोक्त

गरीबों द्वारा चुने विकल्पों

का सम्मान करने

की जरूरत

वाउचर और सशर्त नगदी देने के नए साधन सामाजिक सेवा प्रदाताओं में प्रतियोगिता पैदा कर सकते हैं और उपभोक्ताओं को विकल्प दे सकते हैं। सरकार स्कूलों को पैसा देने के बजाय अभिभावकों को स्कूल वाउचर देगी। जिन्हें वे शिक्षा की सेवा हासिल करते समय सरकारी या प्रायवेट स्कूलों में इस्तेमाल कर सकते हैं। अब सरकारी पैसा केवल सरकारी स्कूलों का एकाधिकार नहीं होगा। वह ऐसे किसी भी स्कूल को उपलब्ध होगा जिसे

प्रतियोगिता है महामंत्र

गुररचरण दास ने सही निदान किया है – भारत समृद्ध हो जाएगा लेकिन आनंदित नहीं होगा यदि हमने शासन पद्धति को ठीक नहीं किया।। अच्छी शासन पद्धति आर्थिक समृद्धि और आनंदपूर्ण और परिपूर्ण जीवन के के बीच की कड़ी है। सचेतन या अवचेतन रूप से लोगों और राजनीतिज्ञों में शासन पद्धति की महत्व को समझना शुरू कर दिया है। लेकिन महसूस करना एक बात है और यह जानना अलग बात है कि उसे हासिल कैसे किया जाए।

जय देसाई की एकाउंटेबिलिटी डिफीशिट (जवाबदेही की कमी )पुस्तक बहुत सही समय पर आई है जिसमें शासन विधि

मार्च 2012 के संसद के बजट की शुरूआत परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई। अभिभाषण में राष्ट्रपति ने सबसे ज्यादा बल उनकी सरकार के अन्न सुरक्षा बिल को लागू करने  के उद्देश्य पर दिया । राष्ट्रपति का भाषण सारी सरकार के लिए मार्गदर्शक होता है। इसलिए बजट भाषण में प्रणवदा भी इस मुद्दे पर बल देते यह स्वाभाविक ही था। प्रणवदा ने कहा कि इसे  सरकार पारित करवाने के लिए  कृतसंकल्प है। उन्होंने जोर देकर कहा इससे अन्न उपलब्ध कराना  कानूनी बाध्यता  (–लीगल इंटायटलमेंट) बन जाएगा। लेकिन उनके भाषण से ऐसा नहीं लगा कि अन्न सुरक्षा  संवैधानिक या

धर्मार्थ कार्य के क्षेत्र में सक्रिय ग्लोबल बिजनेस कंसल्टेंसी फर्म बेन एंड कंपनी द्वारा विगत दिनों विश्व के अनेक देशों में एक अध्ययन कराया गया। यह अध्ययन अलग-अलग राष्ट्रों के नागरिकों द्वारा किए जाने वाले धर्मार्थ कार्यों व उनकी रूचियों से संबंधित था। वैसे तो संस्था द्वारा यह अध्ययन समय-समय पर कराया जाता है और इसकी रिपोर्ट भी जारी की जाती है लेकिन संस्था द्वारा इस वर्ष जारी अध्ययन रिपोर्ट भारत के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। संस्था की रिपोर्ट में भारतीयों विशेषकर यहां के युवाओं में धर्मार्थ कार्यों के लिए दान देने की प्रवृत्ति में सकारात्मक परिवर्तन आने की बात कही गई है

मैंने सुना है ख्रुश्चैव के बारे में एक मजाक। ख्रुश्चैव एक पार्टी मीटिंग में बोल रहा था।बोलते वक्त वह स्टालिन की निंदा कर रहा था। तो एक आदमी ने पीछे से खड़े होकर कहा कि महाशय ,स्टैलिन के जिन कामों की आप निंदा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि लाखों लोगों की हत्या की ,साइबेरिया भेजा ,जेल में डाला सारे मुल्क को खून में डुबो दिया।जो ये बातें आप कह हे हैं,जब स्टालिन यह सब कर रहा था तब भी आप स्टालिन के साथ थे। तब आप कहां चले गए थे।ख्रुश्चैव एक मिनिट के लिए चुप हो गया। फिर उसने कहा ,जिन महाशय ने ये बात कही है ,कृपा करके अपना नाम और पता बता दें।लेकिन वह फिर नहीं उठा।फिर ख्रुश्चैव ने

बुद्ध के जमाने में हिन्दुस्तान की आबादी दो करोड़ थी। यह आबादी दो करोड़ ही रहती ज्यादा नहीं हो सकती थी क्योंकि दस बच्चे पैदा होते थे और नौ को मरना ही पड़ता था। क्योंकि न तो भोजन था न दवा थी। न जगह थी न मकान था, न इंतजाम था। उनके शरीर को बचाने का कोई उपाय न था। पिछले डेढ सौ वर्षों में दुनिया में एक्सप्लोजन हुआ है मनुष्यजाति का। आज साढ़े तीन अरब लोग हैं। ये साढ़े तीन अरब लोग पूंजीवाद की व्यवस्था के कारण जीवित हैं अन्यथा वे जीवित नहीं रह सकते थे – पूंजीवादी व्यवस्था के बिना कल्पना से बाहर है कि साढ़े तीन अरब पृथ्वी पर जी जाएं।

पूंजीवाद ने क्या

कहा जाता है कि सुप्रसिद्ध अभिनेत्री  सराह बर्नहार्ट डिक्शनरी भी पढ़ती थी तो लोगों को इतना भावुक कर देती थी कि वे रो पड़ते थे। प्रणव मुखर्जी ने सर्विस टैक्स न लगनेवाले क्षेत्रों की सूची को तमाम ब्यौरों के साथ  पढ़ते हुए वैसा ही कमाल कर दिखाया। वित्तमंत्री ने ऐसी सूची क्यों इतने विस्तार से पढ़नी चाहिए यह एक रहस्य है।

यह अपना अस्तित्व बचाने के लिए जो भी थोड़ा बहुत किया जा सकता है वह करनेवाला बजट है। पिछले वर्ष के लिए विकास दर 8.5 प्रतिशत होने का जो अनुमान लगाया गया था वह हकीकत में 6.9 रह गई है। लगभग सालभर मुद्रास्फीति दहाई के अंकों में

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