सार्वजनिक नीति - अन्य लेख

इस पेज पर विभिन्न लेखकों द्वारा विभिन्न विषयों पर लिखे गये लेख दिये गये हैं। पुरा लेख पढ़ने के लिये उसके शीर्षक पर क्लिक करें। आप लेख पर अपनी टिप्पणीयां भी भेज सकते हैं।

राजा राम मोहन राय का जन्म 22 मई, 1772 ई. को बंगाल के एक गांव राधा नगर में एक बंगाली ब्राम्हण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम रमाकान्त राय एवं माता का नाम तारिणी देवी था। राजा राम मोहन राय को दुनिया एक महान भारतीय सामाज सुधारक के तौर पर पहचानती है लेकिन शिक्षा सुधार के क्षेत्र में दिया गया उनका योगदान किसी भी प्रकार से कम नहीं है। शिक्षा सुधार के क्षेत्र में किए गए कार्यों के कारण भारतीय जनमानस के बीच उन्हें “आधुनिक भारत के निर्माता” के तौर पर पहचान मिली। राजा राम मोहन राय ने समाज में परिवर्तन लाने के लिए अनेक प्रयास किए और हिंदू परंपराओं

लोकसभा चुनावों के लिए चौथे चरण का मतदान हो चुका है और पांचवे चरण के लिए कैंपेनिंग अपने चरम पर है। सभी राजनैतिक दल अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए तमाम लोक लुभावन वादे कर रहे हैं और आश्वासनों की झड़ी लगा रहे हैं। राजनैतिक मंच से सबसे अधिक चर्चा यदि किसी विषय पर हो रही है तो वह बेरोजगारी और किसान आत्महत्या का मुद्दा ही है। इसके बात बारी धार्मिक कट्टरता, न्यूनतम आय गारंटी, महागठबंधन, बालाकोट सर्जिकल एयर स्ट्राइक और रफैल डील की आती है।

मजे की बात है कि जैसे जैसे चुनाव अपने अंतिम चरण

संदर्भः मोदी से मोहभंग और राहुल गांधी पर भरोसा न होने से उनके सामने वोट देने का विकल्प नहीं

जब 2014 में मैंने मोदी को वोट दिया था तो मैंने अपने वामपंथी मित्र खो दिए थे। मैंने अपने दक्षिणपंथी मित्र तब गंवा दिए जब मैंने नोटबंदी, बहुसंख्यकों के प्रभुत्व की राजनीति करने और हमारे संस्थानों को कमजोर करने के लिए मोदी की आलोचना की। जब मेरे दोस्त ही नहीं बचे तो मैं समझ गया कि मैं सही जगह पहुंच गया हूं। आम चुनाव निकट आने के साथ मेरा मोह भंग हो गया है। अच्छे दिन तो नहीं आए

मेरा बेटा समलैंगिक है और अब मुझे इसे स्वीकार करने में कोई डर नहीं है। वह बीते 20 वर्षों से अपने पार्टनर के साथ आपसी विश्वास और प्रसन्नता भरी ज़िंदगी बिता रहा है। मेरे परिवार व नज़दीकी मित्रों ने इसे गरिमापूर्वक स्वीकार किया है। लेकिन, मैं इसके बारे में सार्वजनिक तौर पर बोलने से डरता था कि कहीं उसे कोई नुकसान न हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया। मेरी पत्नी और मुझे अचानक लगा कि जैसे बहुत बड़ा बोझ सिर से उतर गया है। मुख्य न्यायाधीश के बुद्धिमत्ता भरे शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे, 'मैं जो हूं, वैसा हूं, इसलिए

कोई भी राष्ट्र तब तक प्रगति और उन्नति नहीं कर सकता जब तक कि सभी बच्चों के लिए अच्छे स्कूल न हों। ऐसे में और स्कूलों का होना लाजमी है। ढेरों नए सरकारी स्कूलों के आने की उम्मीद बहुत कम है, क्योंकि हमारे यहां के सत्ताधारी स्कूलों और अन्य सामाजिक ज़रूरतों पर खर्च करने के बजाए वोट पाने की उम्मीद में लोकलुभावने ‘लॉलीपॉप’ देने के प्रति अधिक आशक्त हैं।

अपनी पसंद के स्कूलों में अपने बच्चों का दाखिला सुनिश्चित न कर पाने से निराश

सवा दो लाख करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि केन्द्र सरकार हर साल किसानों की मदद के लिए खर्च करती है। ये राशि फर्टिलाइजर सब्सिडी, बिजली, फसल बीमा, बीज, किसान कर्ज, सिंचाई जैसी मदों में खर्च की जाती है बावजूद इसके देश का किसान बदहाल है। उसकी हालत इतनी खराब है कि वो अपनी दैनिक जरूरतों का भी पूरा नहीं कर पा रहा है। उसकी और उसके जैसे दूसरे 75 फीसदी आबादी की मदद के लिए सरकार सस्ती दर पर अनाज के साथ परिवार के एक सदस्य को मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार मुहैया कराती है लेकिन किसानो की स्थिति सुधरने का नाम नहीं

महादेव गोविन्द रानाडे का जन्म नाशिक के निफड तालुके में 18 जनवरी, 1842 को हुआ था। उनके बचपन का अधिकांश समय कोल्हापुर में बीता। 14 साल की अवस्था में उन्होंने बॉम्बे के एल्फिन्सटन कॉलेज से पढ़ाई प्रारंभ की। उन्होंने एक एंग्लो-मराठी पत्र ‘इन्दुप्रकाश’ का सम्पादन भी किया।

बाद में महादेव गोविन्द रानाडे का चयन प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट के तौर पर हुआ। सन 1871 में उन्हें ‘बॉम्बे स्माल काजेज कोर्ट’ का चौथा न्यायाधीश, सन 1873 में पूना का प्रथम श्रेणी सह-न्यायाधीश, सन 1884 में पूना ‘स्माल काजेज

- हम अमीर सरकार वाले गरीब देश के निवासी है
- गरीबी उन्मूलन के लिए लाई जाने वाली सरकारी योजनाएं गैरकानूनी और काला धन बनाने का स्त्रोत होती हैं
- यदि समाजवाद के प्रति हमारी सनक बरकार रहती है तो देश का भविष्य अंधकारमय ही रहेगा

16 जनवरी 1920 को मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) के पारसी परिवार में पैदा हुए पद्मविभूषण नानाभाई अर्देशिर पालखीवाला उर्फ नानी पालखीवाला उदारवादी विचारक, अर्थशास्त्री और उत्कृष्ट कानूनविद् थे। नानी पालखीवाला की आर्थिक समझ और विशेषज्ञता का अंदाजा इस बात से

Pages