सार्वजनिक नीति - अन्य लेख

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हाल ही में लोक सभा में एक बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह टिप्पणी की थी कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सूट-बूट वालों की सरकार चलाते हैं, जो अपने अमीर करीबियोँ का समर्थन करती है और गरीब लोगोँ को नजरअंदाज करती है।

लखनऊ में आयोजित इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान मोदी ने इस वक्तव्य का करारा जवाब दिया। उन्होँने स्पष्ट किया कि उन्हें व्यवसायियोँ के साथ मुलाकात करने पर डर नहीं लगता है, लेकिन कांग्रेस के लोग अपनी गंदी सौदेबाजी के लिए छिप-छिपाकर मिलते हैं। मोदी ने कहा कि देश के

अपनी युवावस्था के दिनों में मैंने निचले स्तर तक आर्थिक लाभ के सिद्धांत (थ्योरी ऑफ इकोनॉमिक ट्रिकल डाउन) के बारे में सुना था। इसके मुताबिक अगर अमीर और अधिक अमीर होंगे तो गरीबों को भी इसका लाभ मिलेगा और इस वजह से यह सबके लिए फायदेमंद रहेगा। ऐसा माना जा रहा था कि यह इस बात का भी खुलासा कर देगा, कार्ल मार्क्स के विपरीत, कि यह सच नहीं है कि अमीर और अमीर हो गए, जबकि गरीब और गरीब। इसके विपरीत हुआ यह कि दोनों ही साथ-साथ अमीर हुए। अमेरिका में गरीबी की रेखा 11 हजार डॉलर प्रति वर्ष (पांच लाख रुपए प्रति वर्ष) की चौंकाने वाली ऊंचाई तक पहुंच गई है। इतिहास

मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद से जाते जाते अरविंद सुब्रमणियन शब्दकोश को एक नयी शब्दावली “कलंकित पूंजीवाद” देते गए। इसके जरिए वह यह कहना चाहते थे कि स्वतंत्र बाजार को आज भी भारत में समुचित स्थान नहीं मिल सका है। समस्या गहरी होती जा रही है। अधिकतर भारतीय वैश्विक आर्थिक संकट के बाद से बगैर सोचे ही आर्थिक विकास पर सवाल उठाने के पाश्चात्य सनक को अंगीकार कर रहे हैं।

ऐसा लगता है कि अर्थशास्त्र की शिक्षा के दौरान पहले वर्ष में पढ़ाई जाने वाली बात को हम भूल चुके हैं, जिसमेँ यह बताया जाता है

11 जुलाई, 1987 में विश्व की जनसंख्या ने 5 अरब के आंकड़े को पार किया था। तब संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनिया भर में जागरूकता फैलाने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लिया। तब से इस विशेष दिन को हर साल एक याद और परिवार नियोजन का संकल्प लेने के दिन के रूप में याद किया जाने लगा। विभिन्न मंचों पर विशेषज्ञों, चिंतकों, नीति-निर्धारकों आदि के द्वारा बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी समस्या और इसकी भयावहता से लोगों को अवगत कराते हुए अपनी चिंताओं को प्रदर्शित करने का चलन शुरू हो गया। 'विश्व जनसंख्या दिवस' के आयोजनों के दौरान समाजशास्त्रियों के द्वारा विश्व भर में बढ़ती

विकृत और अक्षम प्रशासनिक तौर तरीकों वाली आरटीई हमारे बच्चों को शैक्षणिक भूखमरी का शिकार बना रही है

कहावत है कि नर्क का मार्ग अच्छी नीयत के साथ तैयार किया जाता है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि अच्छी नीयत के साथ लाया गया शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट) 2009 एक त्रासदीपूर्ण प्रयोग साबित हुआ है। 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित कराने के बहुप्रचारित उद्देश्योँ के विपरीत आरटीई ने लाखों बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित

मलेशिया की नवनिर्मित डा. महातिर बिन मोहम्मद सरकार ने देश में गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स अर्थात जीएसटी को समाप्त कर दिया है। ऐसा करके उन्होंने चुनाव पूर्व देश की जनता के साथ किए वादे को पूरा किया है। भारत के पूर्व मलेशिया ही वह आखिरी देश था जिसने अपने यहां जीएसटी लागू किया था। फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस नई कर प्रणाली को लागू होने के तीन वर्षों के भीतर ही समाप्त करने की जरूरत आन पड़ी? इसकी विवेचना कर रहे हैं वरिष्ठ टीवी पत्रकार नवीन पाल..    

मलेशिया

पिछले लगभग दो महीनों तक देश ताबड़तोड़ क्रिकेट के 20-ट्वेंटी फार्मेट वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के रंग में रंगा है। इस दौरान कई मैच रोमांच की चरम सीमा तक पहुंचे और खेल अंतिम गेंद तक पहुंचा। कई युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने और राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ताओं को प्रभावित करने का मौका भी मिला। मैच दर मैच ऐसे ऐसे इनोवेटिव शॉट्स लगातार देखने को मिलें जो आमतौर पर कम ही देखने को मिलते हैं। गेंदबाजी, क्षेत्ररक्षण सहित सभी क्षेत्रों में खिलाड़ियों के अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिले। ऐसे ऐसे कैच भी पकड़े गए जिनकी कल्पना भी नहीं की

7 अप्रैल को शिक्षा बचाओ ‘सेव एजुकेशन’ अभियान के समर्थन में देश भर के निजी स्कूल दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा हुए। भारत के 70 वर्षोँ के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। ये स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में ‘लाइसेंस परमिट राज’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और शैक्षिक संस्थानोँ के लिए स्वायत्तता और सम्मान की मांग कर रहे थे। यहाँ पहुंचने वाले लगभग 65,000 प्रतिनिधियोँ में से अधिकतर प्रिंसिपल, शिक्षक, कम फीस लेने वाले स्कूलोँ में अपने बच्चोँ को पढ़ाने वाले माता-पिता थे। लेकिन इनके अलावा यहाँ अल्पसंख्यक संस्थान जैसे कि कैथलिक स्कूलोँ के प्रतिनिधि

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