सार्वजनिक नीति - अन्य लेख

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दिल्ली एक बार फिर से मिशन मोड में है। यह मिशन है ‘मिशन नर्सरी एडमिशन’। नवंबर के अंतिम सप्ताह में नर्सरी दाखिलों के लिए गाइडलाइंस जारी होने के साथ ही अभिभावकों की दौड़ शुरू हो गई है। दौड़ अपने बच्चों को एक अदद ‘बढ़िया’ स्कूल में दाखिला दिलाने की है। यह सिर्फ घर से ‘पसंद’ के स्कूल तक की ही दौड़ नहीं है, यह दौड़ है उन सभी संभावित विकल्पों को आजमाने की जो उन्हें मनपसंद स्कूल में दाखिला सुनिश्चित करा सके। इस दौरान अभिभावकों को जिस आर्थिक, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है ये सिर्फ वही जानते हैं। हालांकि गाइडलाइंस जारी करते समय

विधेयक लोकसभा से जुलाई 2019 में पास होने के बाद राज्यसभा में भेजा गया जहां सांसदों की तीखी बहस के बाद इसे सिलेक्ट कमिटी को स्थानांतरित किया गया है। किराए की कोख यानी सेरोगेसी पर कानून बन जाने के बाद  भारत में वाणिज्यिक सेरोगेसी को अवैधानिक कर दिया जाएगा। भारत में अब सिर्फ परोपकारी सरोगेसी ही मान्य होगी अर्थात आर्थिक लाभ के उद्देश्य से ऐसा किया जाना गैरकानूनी होगा।

सेरोगेसी बिल के अनुसार सेरोगेसी का अर्थ ‘ऐसा कोई व्यवहार जिसके द्वारा कोई स्त्री किसी दंपत्ति के शिशु को इस आशय के साथ अपने गर्भ में रखती है कि जन्म के पश्चात उस शिशु को दंपत्ति

भारतीय उदारवादी राजनेता 'मीनू मसानी' के जन्मदिवस पर विशेष-

साम्यवाद और समाजवाद

8 जून 1959 के अखबारों में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि एक दिन पहले ही मद्रास में हुई जनसभा में सी. राजगोपालाचारी ने नए राजनैतिक दल स्वतंत्रता पार्टी की स्थापना की घोषणा की थी। इस बैठक को संबोधित करने वाले अन्य विशिष्ट जनों में प्रो. एन.जी. रंगा, वी.पी. मेनन और एम.आर.

जन्मदिन मुबारक पीलू मोदी

स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक पीलू मोदी एक उदारवादी चिंतक और राजनेता थे। वह शरीर से भारी भरकम और थुलथुले थे लेकिन बहुत ही खुशमिजाज और हाजिर जवाब थे। उन्होंने मोटे और थुलथुले सांसदों का एक भीम क्लब बना रखा था और स्वयं को उसका अध्यक्ष कहते थे। धीरे धीरे जब मोटे सांसदों की संख्या सदन में कम होने लगी तो एक बार प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पीलू मोदी से भीम क्लब की प्रगति के बारे में पूछा। इस पर पीलू मोदी ने तपाक से कहा कि आपकी

काफी इंतजार के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2019 का मसौदा आखिरकार जारी हो ही गया। यह मसौदा 484 पृष्ठों का व्यापक दस्तावेज है जिसे तैयार होने में चार वर्षों का समय लगा। इस मसौदे में स्कूली शिक्षा के संबंध में व्यक्तिगत तौर पर सुझायी गई कुछ अति उत्कृष्ट सिफारिशें भी शामिल हैं। इन सिफारिशों में शिक्षकों के प्रशिक्षण और स्कूली शिक्षा प्रणाली में सुधार, राष्ट्रीय शिक्षा आयोग की स्थापना, सरकार द्वारा नीति निर्धारक, संचालक, मूल्यांकनकर्ता और स्कूलों के नियामक सभी की भूमिका निभाने की बजाए इनके शासन की भूमिकाओं का पृथक्कीकरण आदि शामिल हैं। सरकार

भारत में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाने वाले दीपावली के त्यौहार को मनाने के मुख्यतः दो कारण हैं। पहला कारण, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंकापति रावण का संहार कर अयोध्या के राजा राम, भाई लक्ष्मण व पत्नी सीता के साथ अपने राज्य वापस लौटे थे। पुष्पक विमान से रात के अंधेरे में अयोध्या पहुंचे राम के स्वागत के लिए अयोध्यावासियों ने घर के बाहर दिए जलाए और रौशनी कर विमान को यथास्थान उतरने की राह दिखाई। कालांतर में यह उस घटना को याद करने और खुशी मनाने की परंपरा के तौर पर प्रचलित हुआ। दूसरा कारण, धन, सुख और समृद्धि की देवी लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की पूजा

नीति आयोग द्वारा तैयार किया गया स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स इन दिनों राष्ट्रव्यापी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि इस इंडेक्स में अप्रत्याशित जैसा कुछ भी नहीं है। यह इंडेक्स पूर्व में सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर हुए शोधों और उनके आंकड़ों की एक प्रकार से पुष्टि भर ही करता है। वैसे यह इंडेक्स शिक्षा का अधिकार कानून के उन प्रावधानों की भी कलई खोलता है जो स्कूलों को लर्निंग आऊटकम की बजाए बिल्डिंग और प्ले ग्राउंड के आधार पर मान्यता प्रदान करता है। जबकि दुनियाभर के शोध लर्निंग आऊटकम और क्लासरूम के साइज़ के बीच किसी भी प्रकार के संबंध से इंकार

इंटरनेशनल फूड पालिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैश्विक भूख सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) के मुताबिक भारत 109 देशों की सूची में 103वें स्थान पर है और 20 करोड़ अन्न के अभाव का शिकार हैं। यह बात पक्के तौर पर कही जा सकती है कि सरकार के नीतिगत हस्तक्षेप इस भूख और भुखमरी का प्रमुख कारण है। मेरा मानना है कि सरकार के नीतिगत हस्तक्षेप से जो विकृतियां या असंतुलन पैदा होते हैं वे व्यापक समूह को प्रभावित करते हैं। इस विकृति या दुष्प्रभाव से निबटने के लिए सरकार नए हस्तक्षेप लागू करती है। इससे अंतहीन सरकारी हस्तक्षेपों का सिलसिला शुरू होता है जो आर्थिक विकास

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