सेक्स वर्कर्स के हित में है वेश्यावृति को मान्यता मिलना

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा द्वारा वेश्यावृति को कानूनी मान्यता दिलाने संबंधी बयान भले ही देश में बहस का मुद्दा बन गया हो लेकिन देश में वेश्यावृति के माध्यम से जीवन यापन करने वाली लाखों सेक्स वर्कर्स को सुरक्षा, गरिमा और स्वास्थ प्रदान करने का एक मात्र यही तरीका है। 
 
दुनिया के कई देशों नें वेश्यावृति कानून में बदलाव कर और इसे कानूनी वैधता प्रदान कर उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए हैं। उदाहरण के लिए नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, मैक्सिको आदि देशों में कुछ रेगुलेशन्स के साथ इसे मान्यता प्रदान करने के बाद से वहां बलात्कार और शोषण जैसी घटनाओं में काफी कमी देखने को मिली है। साथ ही उन्होंने एड्स व सेक्स संक्रमण जनित रोगों पर भी काबू पाया है।
 
अमेरिका की एक काउंटी नेवादा में वेश्यावृत्ति को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है। वहां सभी रजिस्टर्ड सेक्स वर्कर्स (महिला/पुरुष) को अपने साथ सरकार द्वारा जारी हेल्थ कार्ड रखना जरूरी होता है। इस कार्ड की मान्यता एक माह की होती है। इस पेशे में रत लोगों को प्रतिमाह स्वास्थ जांच कराना होता है। यह सुविधा भी सरकार द्वारा प्रदत्त होती है। इसके अलावा सेक्स वर्कर्स से सरकार को टैक्स भी प्राप्त होता है जो उन्हीं की सुरक्षा, स्वास्थ और उनके बच्चों की शिक्षा के मद में खर्च किया जाता है। कानूनी मान्यता होने के कारण सेक्स वर्कर्स किसी प्रकार के शोषण की दशा में पुलिस सहायता प्राप्त करने के अधिकारी होते हैं। 
 
जबकि भारत जैसे देश में बगैर मान्यता के कुल 1170 रेडलाइट एरिया सक्रिय है और 2003-04 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक कुल सेक्स वर्कर्स की संख्या 30 लाख से ज्यादा है। अनुमान के मुताबिक इस पेशे में रोजाना 2000 लाख रूपए का गैरकानूनी लेनदेन होता है। लेकिन कानून द्वारा मान्यता प्राप्त न होने के कारण इनमें से अधिकांश शोषण, हिंसा और बीमारी की शिकार बनने को मजबूर हैं। युवतियों व कम उम्र की लड़कियों को जबरदस्ती अथवा बहला फुसलाकर इस पेशे में शामिल कर लिया जाता है। जहां ग्राहकों, बिचौलियों और कोठे की मालकिनों द्वारा उनका शोषण और उनके साथ पाश्विक व्यवहार किया जाता है। यदि देश में वेश्यावृत्ति को कानूनी मान्यता प्राप्त हो जाए तो न केवल इस पेशे में किसी को धोखे से लाना मुश्किल हो जाएगा बल्कि उसका शोषण करना भी संभव नहीं रह जाएगा।
 
उदाहरण के लिए यदि कोई महिला आर्थिक अथवा अन्य कारणों के कारण वेश्यावृति के धंधे में उतरने का मन बनाती है, तो ऐसी दशा में उसे सबसे पहले पुलिस के पास स्वयं को रजिस्टर कराना होगा। इस स्थिति में पुलिस व संबंधित विभाग के पास उस महिला की काऊंसलिंग करने और उसे इस पेशे में जाने से रोकने का मौका होगा। इसके अलावा यदि किसी महिला अथवा युवती को बहला फुसलाकर धोखे से इस पेशे में डालने की कोशिश की जाएगी तो भी रजिस्ट्रेशन कराने व हेल्थ चेकअप के लिए पुलिस व अस्पताल तक जाना पड़ेगा। इस प्रकार, उसके पास पुलिस से शिकायत करने और अपने बचाव का भी मौका होगा। जबकि वर्तमान में ऐसी कोई व्यवस्था ना होने से इस पेशे में आने वाले सेक्स वर्कर्स को रोकने का कोई तरीका मौजूद नहीं है।
 
महिला आयोग के इस सार्थक पहल की आलोचना करने की बजाए दुनिया के अन्य देशों से सीख लेते हुए देश में वेश्यावृति को कानूनी मान्यता दिलाने में सहयोग करने की जरूरत है। 
 
- अविनाश चंद्र