कलाम की सुनें

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम कोई नेता नहीं हैं कि वे किसी पार्टी या सरकार के पक्ष में बोलेंगे। उन्होंने कूडनकुलम के परमाणु-संयंत्र के पक्ष में अपनी राय देकर सारे विवाद का पटाक्षेप कर दिया है। उस संयंत्र के विरूद्ध जो लोग प्रदर्शन कर रहे थे, उनमें से यद्यपि कई संदेहास्पद चरित्र के लोग भी थे लेकिन उस क्षेत्र के लोगों की चिंता स्वाभाविक ही थी। चेर्नोबिल और फुकुशिमा की दिल दहला देनेवाली दुर्घटनाओं ने सारे संसार को परमाणु-ऊर्जा के बारे में पुनर्विचार के लिए बाध्य कर दिया था। ऐसी स्थिति में हमारी सरकार भी हतप्रभ हो रही थी। उसकी जुबान हकला रही थी। इसी कारण 13 हजार करोड़ रू. की लागत से बना यह संयंत्र ठप्प होने जा रहा था।

लेकिन डॉ. कलाम ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि कूडनकुलम संयंत्र से स्थानीय लोगों को दूर-दूर तक कोई खतरा नहीं है। एक तो वह भूकंपीय क्षेत्र से 1300 कि.मी. दूर है। दूसरा, समुद्र की सतह से वह 13.5 मीटर ऊँचा है। तीसरा, वह जापान के फुकुशिमा संयंत्रों की तरह पुराना नहीं है। वह तीसरी पीढ़ी के ताज़ातरीन मॉडल पर बना हुआ है। डॉ. कलाम ने यह राय उस संयंत्र में तीन घंटे बिताने के बाद दी है। ऐसा उन्होंने भारत सरकार या परमाणु-ऊर्जा विभाग के इशारे पर नहीं किया। वे अपनी इच्छा से कूडनकुलम गए थे। उन्होंने एक प्रमुख यंत्रों को स्वयं जांचा-परखा और अपने अनुभव के आधार पर उक्त निष्कर्ष निकाला। ऐसी स्थिति में अब कूडनकुलम पर सारे विवाद को तुरंत बंद किया जाना चाहिए। हम यह भी न भूलें कि कूडनकुलम संयंत्र रूस की मदद से बना है। अनेक तत्व अब भी शीतयुद्ध की मानसिकता से ग्रस्त हैं। वे हर रूसी चीज़ को फेल करवाने पर कमर कसे रहते हैं।

डॉ. कलाम के बयान से जितनी राहत इस पस्तहिम्मत सरकार को मिलेगी, उससे कहीं ज्यादा स्थानीय लोगों को मिल सकती है। उन्होंने जो दस-सूत्री कार्यक्रम प्रस्तावित किया है, उससे हजारों लोगों को कूडनकुलम में रोजगार मिलेगा, वहां अस्पताल, सड़कें और स्कूल बनेंगे और गांव के लोगों को वे सब सुविधाएं मिलेंगी, जो शहरों में होती हैं। क्या सरकार, जिसका बर्ताव डॉ. कलाम के प्रति संतोषजनक नहीं रहा है, उनके प्रस्तावों पर संतोषजनक कार्रवाई करेगी?

- डॉ वेद प्रताप वैदिक