सार्वजनिक नीति - कानून और न्यायपालिका - लेख

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स्वतंत्र् भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है| सरकार ने अपने ही एक पूर्व मंत्री ए. राजा को गिरफ्तार कर लिया| मंत्री और मुख्यमंत्री पहले भी गिरफ्तार हुए हैं लेकिन दूसरी सरकारों द्वारा! इस एतिहासिक गिरफ्तारी से आम जनता में खुशी की लहर दौड़ गई है, यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन देश ने संतोष की सांस जरूर ली है, यह तो स्पष्ट ही है| लोग मानकर चलते हैं कि मौसेरे भाइयों का बाल भी बांका नहीं हो सकता| किसी भी बड़े घोटाले में कोई छोटा-मोटा अफसर या बाबू फंसे तो फंस जाए, बड़े-बड़े मगरमच्छ हमेशा बचकर निकल जाते हैं| ये मगरमच्छ हैं, हमारे नेतागण ! ये किसी भी पार्टी के हों, किसी भी

ऐसा महसूस हो रहा है कि देश को इस समय कोई जनता के द्वारा चुनी गई सरकार नहीं बल्कि न्यायपालिका चला रही है। सरकार नाम की कोई ताकत सत्ता में है और देश का कामकाज भी निपटा रही है ऐसा लगना काफी पहले से बंद हो चुका है। ऐसा महसूस होने देने के पीछे भी सरकार का ही हाथ है। जनता देख रही है कि देश की सेहत से जुड़े अहम मामलों पर फैसले करने अथवा सलाह देने का काम न्यायपालिका के हवाले हो गया है और सरकार अदालती कठघरों में खड़ी सफाई देती हुई ही नजर आती है। संसद ठप-सी पड़ी है और सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता बढ़ गई है। बहस का विषय हो सकता है कि क्या यह स्थिति किसी प्रजातांत्रिक व्यवस्था के लिए

जब विकृत या गलत या उल्टी प्रोत्साहन व्यवस्था भ्रष्टाचार को दंडित करने की बजाए ईनाम देती है, तब भ्रष्टाचार बढ़ने लगता है। हमें इस विकृत प्रोत्साहन का अंत करने के लिए संस्थागत परिवर्तनों की जरूरत है।

मुझे आशा है कि साल 2010 को एक ऐसे साल के रूप में याद किया जाएगा, जब नाराज मतदाता नेताओं को बाध्य कर देंगे कि वे राजनीति को एक फायदेमंद और कर मुक्त पेशे के रूप में देखना बंद करें। मीडिया में इन दिनों कई घोटाले जैसे अवैध खनन, आदर्श सहकारी समिति, राष्ट्रमंडल खेल और 2जी लाइसेंस जैसे मामले छाए हुए हैं।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर लोगों के मन में जो गुस्सा है, अगर वह बेकार चला जाए तो यह बहुत शर्मनाक होगा। ऐसा न हो, यह सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका यही है कि दोषियों को फौरन से पेशतर कैदखाने की सलाखों के पीछे भेज दिया जाए। यदि हम ऐसा कर पाने में कामयाब साबित होते हैं तो हम अपने प्रशासनिक तंत्र में भी विश्वास कायम रख पाएंगे।

स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद हम जो नैतिकता का नाटक देख रहे हैं, उससे कुछ जरूरी सबक सीखे जा सकते हैं। मुझे मैलकम ग्लैडवेल के निबंध संकलन वॉट द डॉग सॉ का एक दृश्य याद आ रहा है। मैं उसे यहां जस का तस दे रहा

मनरेगा (MGNREGA) के अंतर्गत 100 श्रमिक दिवसों को बढ़ा कर 200 दिवस करने की कई दिनों से बात चल रही है. भारत के अति निर्धनों की आय का स्त्रोत बनी इस विवादित स्कीम के अंतर्गत दिन बढाने का प्रस्ताव सुनने में तो लोक कल्याणकारी लगता है पर इस का बहुत गंभीर आंकलन करने की आवश्यकता है. हमें ध्यान देना होगा की अति निर्धन को आय की गारंटी पहुचाने वाली ये स्कीम कहीं स्थायी रोज़गार गारंटी स्कीम के रूप में ना तब्दील हो जाए. यदि ऐसा होता है तो आर्थिक सुधार के पथ पर चल रहे हमारे देश के लिए ये एक पीछे जाने वाला कदम होगा.

सरकार की यह योजना इस

क्या भारत में आम नागरिक की प्राइवेसी (निजता) खतरे में है? उद्योगपति रतन टाटा ऐसा ही सोचते हैं और इसलिए उन्होंने अपनी “प्राइवेसी” की हिफाजत के लिए सुप्रीम कोर्ट की पनाह ली है। नीरा राडिया के टेपों में जिन लोगों की बातचीत दर्ज है, उनमें से ज्यादातर टाटा से सहमत हैं। इन टेपों में हालांकि उद्योग जगत के कई मशहूर लोगों और लॉबिस्ट्स की बातचीत दर्ज है, लेकिन इसकी ज्यादा चर्चा टाटा और मुकेश अंबानी ग्रुप की लॉबिस्ट नीरा राडिया की कुछ मशहूर पत्रकारों से बातचीत के सामने आने की वजह से हुई है। उन पत्रकारों और उनके बचाव में उतरे उनके सहयोगियों का भी यही सवाल है कि आखिर इन

‘किलर लाइन’ के नाम से कुख्यात ब्लू लाइन बसों का दिल्ली की सड़कों से हटाया जाना एक संवेदनशील मुद्दा है जिस पर अलग अलग किस्म की राय व्यक्त की जा रही हैं. जहां कई यह मानते हैं कि सैंकड़ों जानें ले चुकी इन बसों का दिल्ली की सड़कों से चले जाना ही अच्छा है, एक ऐसा वर्ग ये भी समझता है कि तेज़ रफ़्तार और समय से चलने वाली ब्लू लाइन बसें दिल्ली की लाइफ लाइन थीं और उन का चला जाना एक नुकसान है.

पर यहाँ हमें सार्वजनिक नीति के दोषों के बारे में भी सोचना चाहिए जिन की वजह से शहर में पब्लिक यातायात इतना त्रुटिपूर्ण है.

सूचना का अधिकारसूचना का अधिकार (आरटीआइ) क्या है?
सूचना का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। अनुच्छेद 19 (1) कहता है कि प्रत्येक व्यक्ति को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। यह कानून के तहत भारत के नागरिकों को केंद्र और राज्य सरकार के रिकॉर्ड से संबंधित सूचना हासिल करने का अधिकार प्रदान करता है।

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