दिल्ली बहुत गंदी है सर, मैं यहां फिर कभी नहीं आउंगी

- घरेलू नौकर उपलब्ध कराने वाली दिल्ली की प्लेसमेंट एजेंसियों की हकीकत पर आधारित ‘संस एंड डॉटर’ डॉक्यूमेंट्री ने किया सोचने पर मजबूर

-  जीविका फिल्म फेस्टिवल के तीसरे दिन विभिन्न देशों की दस डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का हुआ प्रदर्शन

गांव के एक युवक ने मेरे भोले भाले माता पिता को बहका कर और मुझे अच्छी नौकरी दिलाने और साथ ही साथ पढ़ाई कराने के नाम पर अपने साथ दिल्ली लेकर आया। लेकिन यहां लाकर मुझे एक ऐसे घर में नौकरानी के काम में लगा दिया गया जहां मेरे साथ जानवरों सा सलूक होता था। मेरी पगार प्लेसमेंट एजेंसी वाले रख लेते थे और मुझे और मेरे घरवालों को कुछ भी नहीं देते थे। मुझे अपने घर वालों से फोन पर बात भी नहीं करने दिया जाता था। आज किसी प्रकार पुलिस और कुछ अन्य लोगों की सहायता से मुझे मुक्ति मिली है, मैं वापस गांव जा रही हूं और कभी लौटकर दिल्ली नहीं आऊंगी। दिल्ली बहुत गंदी है।

ज्योत्सना खत्री द्वारा निर्मित फिल्म ‘संस एंड डाटर’ के जरिए ये कहना है झारखंड के एक छोटे से गांव से बहला फुसलाकर दिल्ली लाई गई एक किशोरी रत्ना (नाम परिवर्तित) का जिसे दिल्ली की एक प्लेसमेंट एजेंसी द्वारा एक घर में नौकरानी बनाकर रख दिया गया। यह कहानी अकेले रत्ना की नहीं है। ऐसी तमाम रत्ना हैं जिन्हें अच्छी शिक्षा, अच्छा भविष्य और अच्छे पैसे का झांसा देकर दिल्ली सहित देश के तमाम महानगरों में लाकर बाल मजदूरी करायी जाती है। ‘10वें जीविका डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल’ के तीसरे दिन शनिवार प्रदर्शित ज्योत्सना खत्री द्वारा निर्मित फिल्म ‘संस एंड डाटर’ ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

इस दिन संस एंड डाटर के अतिरिक्त अलग अलग विषयों पर बने नौ अन्य ऐसी ही फिल्मों ‘बियांड द वेल’, ‘कैन वी सी द बेबी बम्प प्लीज’, ‘टीच टू लर्न’, ‘शेफर्ड्स ऑफ पैराडाइज’, ‘ताशीस टरबाइन’, ‘बॉटल मसाला इन मोइली’, ‘रैग्स टू पैड्स’, ‘द डंकी फेयर’, व ‘लास्ट ट्रेन होम’ आदि की स्क्रीनिंग की गई जिसने वहां उपस्थित लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान कौशल विकास के मुद्दे पर केंद्रीत ‘डू वी हैव द राइट पॉलिसी फ्रेमवर्क फॉर स्किल डेवलपमेंट इन इंडिया’ विषय परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें अंबरिश दत्ता, अनुज तलवार, एनएसडीसी की गौरी गुप्ता, फैब, यूके की इसाबेल सक्लिफ व बारटी के रोहन जोशी ने उद्योग जगत की जरूरत के मुताबिक देश में कौशल के विकास की आवश्यकताओं व पद्धतियों पर विचार प्रकट किए। 

- अविनाश चंद्र