कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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नब्बे के दशक की बात है जब मैं पूर्व भारत में काफी भ्रमण किया करता था। अपनी इन यात्राओं से मैं इस नतीजे पर पहुंच गया था कि भारत जल्द ही आर्थिक तौर पर तरक्की कर लेगा और इतिहास में पहली बार भारतीय हर बात की कमी से जूझने से उपर उठकर एक ऐसे युग में पहुंच जाएंगे जब अधिकांश की जिंदगी आराम की होगी।

Published on 28 Oct 2009 - 18:20
आतंकवाद के खिलाफ बातें कम काम ज्यादा - Read complete article...
Published on 29 Sep 2009 - 14:54
पुस्तकालयों को भी थामेगा बाजार - Read complete article...
Published on 29 Sep 2009 - 14:51

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