कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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इक्कीसवीं सदी के पहले दशक को दो रुझान परिभाषित करते हैं। एक, अच्छा रुझान और दूसरा, खराब रुझान। अच्छा रुझान यह है कि उच्च आर्थिक विकास दर के फलस्वरूप समृद्धि का फैलाव होने लगा है। दूसरा रुझान भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी का है। कुछ लोग तुरंत दोनों रुझानों का संबंध जोड़ देंगे, लेकिन दरअसल दोनों अलग-अलग हैं। उच्च विकास दर आर्थिक सुधारों की

Published on 3 Jan 2010 - 11:30
बातें ही नही, सख्त कदम भी उठाऎं - Read complete article...
Published on 1 Dec 2009 - 14:53
कोई सीमा तो हो बेलगाम वेतन की - Read complete article...
Published on 1 Dec 2009 - 14:47

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