कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

पुरा लेख पढ़ने के लिये उसके शीर्षक पर क्लिक करें।

अधिक जानकारी के लिये देखें: http://gurcharandas.org

संदर्भः मोदी से मोहभंग और राहुल गांधी पर भरोसा न होने से उनके सामने वोट देने का विकल्प नहीं

जब 2014 में मैंने मोदी को वोट दिया था तो मैंने अपने वामपंथी मित्र खो दिए थे। मैंने अपने दक्षिणपंथी मित्र तब गंवा दिए जब मैंने नोटबंदी, बहुसंख्यकों के प्रभुत्व की राजनीति करने और हमारे संस्थानों को कमजोर करने के लिए मोदी की आलोचना की। जब मेरे दोस्त ही नहीं बचे तो मैं समझ गया कि मैं सही जगह पहुंच गया हूं। आम चुनाव निकट आने

Published on 15 Apr 2019 - 19:44

जब भी चुनाव आते हैं तो मैं यह सोचकर हताश हो जाता हूं कि हम सच्चे, स्वतंत्र और सुधार चाहने वाले उदार नागरिकों की बजाय फिर अपराधियों, लुभावने नारों वाले भ्रष्टों और राजनीति क वंश के सदस्यों को चुन लेंगे। इस बार तमिलनाडु में शशिकला और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की धक्कादायक जीत साफ-सुथरे उदारवादियों की नाकामी को रेखांकित करती है।

इस समस्या के समाधान के लिए मैंने एक बार आदर्श उदारवादी राजनीतिक दल की हिमायत की थी। 21वीं सदी में युवा और

Published on 29 Mar 2019 - 17:57

मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद से जाते जाते अरविंद सुब्रमणियन शब्दकोश को एक नयी शब्दावली “कलंकित पूंजीवाद” देते गए। इसके जरिए वह यह कहना चाहते थे कि स्वतंत्र बाजार को आज भी भारत में समुचित स्थान नहीं मिल सका है। समस्या गहरी होती जा रही है। अधिकतर भारतीय वैश्विक आर्थिक संकट के बाद से बगैर सोचे ही आर्थिक विकास पर सवाल उठाने के पाश्चात्य सनक को अंगीकार कर रहे हैं।

ऐसा लगता है कि अर्थशास्त्र की शिक्षा के दौरान पहले वर्ष में पढ़ाई जाने

Published on 30 Jul 2018 - 14:42

Pages