कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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रिश्वत देकर अयोग्य लोग शिक्षक बन गए, जब तक राज्य सरकारें इस समस्या का हल नहीं करतीं, तब तक कोई नीति बच्चों का भविष्य नहीं संवार सकती

1947 में इंग्लैंड ने भारत छोड़ दिया, लेकिन वे अपने पीछे अंग्रेजी भाषा और भारतीयों के लिए सिरदर्द भी छोड़ गए। तब से हम अंग्रेजी के अपनी जिंदगी में स्थान को लेकर लड़ रहे हैं। विशेषकर, इस बात पर कि अपने बच्चों को किस भाषा में पढ़ाएं। 

Published on 27 Sep 2020 - 11:28

कोरोना वायरस के बाद की दुनिया की तैयारी के लिए भारत को ज्यादा इनोवेटिव स्कूलों की जरूरत होगी। यह तभी होगा जब हम निजी स्कूलों को ज्यादा आजादी देंगे।

विदुर महाभारत में कहते हैं, ‘उनसे सावधान रहो, जो कहते कुछ हैं, करते कुछ।’ वे धृतराष्ट्र को ढोंगियों से बचने की सलाह दे रहे थे लेकिन वे भारतीय शिक्षा संस्थानों के बारे में भी यह कह सकते थे, जिनका ढोंग झूठे मिथकों में निहित है। इस ढोंग को कोरोना के बाद की दुनिया में चुनौती मिलेगी, जहां केवल सक्षम और कुछ नया करने वाले ही बचेंगे।

Published on 10 Jul 2020 - 16:43

कोरोना संकट से लड़ने में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है और इससे हमें क्या सबक लेने चाहिए? 

चीनी जब ‘क्राइसिस’ (संकट) शब्द लिखते हैं तो दो ब्रशस्ट्रोक्स इस्तेमाल करते हैं। एक का मतलब है डर, दूसरे क अवसर। कुछ देश डर से भर जाते हैं, कुछ खुद को बेहतर बनाने के रास्ते तलाशते हैं। कोरोना ने हमारे देश की क्षमता की परीक्षा ली है। इसमें भारत का प्रदर्शन कैसा रहा और हमने अबतक क्या सीखा है?

पहला सबक है कि सरकार की शक्ति का हथौड़ा लोगों के जीवन पर

Published on 16 Jun 2020 - 01:31

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