कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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कोरोना वायरस के बाद की दुनिया की तैयारी के लिए भारत को ज्यादा इनोवेटिव स्कूलों की जरूरत होगी। यह तभी होगा जब हम निजी स्कूलों को ज्यादा आजादी देंगे।

विदुर महाभारत में कहते हैं, ‘उनसे सावधान रहो, जो कहते कुछ हैं, करते कुछ।’ वे धृतराष्ट्र को ढोंगियों से बचने की सलाह दे रहे थे लेकिन वे भारतीय शिक्षा संस्थानों के बारे में भी यह कह सकते थे, जिनका ढोंग झूठे मिथकों में निहित है। इस ढोंग को कोरोना के बाद की दुनिया में चुनौती मिलेगी, जहां केवल सक्षम और कुछ नया करने वाले ही बचेंगे।

Published on 10 Jul 2020 - 16:43

कोरोना संकट से लड़ने में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है और इससे हमें क्या सबक लेने चाहिए? 

चीनी जब ‘क्राइसिस’ (संकट) शब्द लिखते हैं तो दो ब्रशस्ट्रोक्स इस्तेमाल करते हैं। एक का मतलब है डर, दूसरे क अवसर। कुछ देश डर से भर जाते हैं, कुछ खुद को बेहतर बनाने के रास्ते तलाशते हैं। कोरोना ने हमारे देश की क्षमता की परीक्षा ली है। इसमें भारत का प्रदर्शन कैसा रहा और हमने अबतक क्या सीखा है?

पहला सबक है कि सरकार की शक्ति का हथौड़ा लोगों के जीवन पर

Published on 16 Jun 2020 - 01:31

धर्मसंकटः तालाबंदी हटने से संक्रमण बढ़ने का और जारी रहने से बेरोजगारी तथा भूख से लोगों के मरने का जोखिम

लॉकडाउन के बीच टेलीविजन पर एक गरीब प्रवासी श्रमिक को यह कहते सुना, ‘अगर कोरोना मुझे नहीं मारता है तो बेरोजगारी और भूख मार डालेगी’। असल में उसने सरकार के सामने उपलब्ध कठिन विकल्पों को अभिव्यक्त किया था कि ‘किसे जीना चाहिए और किसे मर जाना चाहिए?’ इस दुविधा का हल ही 4 मई को लॉक़डाउन खत्म होना तय करेगा। क्या हमें आज

Published on 4 May 2020 - 18:13

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