खाद्य सुरक्षा गारंटी बिल की बीपीएल परिवारों पर मार

खाद्य सुरक्षा गारंटी अध्यादेश से सस्ते अनाज की आस लगाए बैठे लोगों पर अब दोहरी मार पड़ रही है। पूर्व की तुलना में समान मात्रा में अनाज पाने के लिए अब उन्हें दो से तीन गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। यह सब हो रहा है सरकार द्वारा मुफ्त अथवा लगभग मुफ्त प्रदान करने के नाम पर। इस सरकारी गुणा-गणित से अंजान मुफ्त में सबकुछ पाने की आस लगाए बैठे लोगों को अब शायद कुछ सदबुद्धि प्राप्त हो। विस्तार से जानने के लिए पढ़ें...

35 किलो गेहूं के लिए देने पड़ेंगे 520 रुपये

खाद्य सुरक्षा गारंटी बिल की बीपीएल परिवारों पर मार

खाद्य सुरक्षा गारंटी बिल को लेकर सरकार भले ही ढिंढोरा पीटे लेकिन हकीकत यही है कि बीपीएल परिवार अपने भोजन को ज्यादा असुरक्षित मान रहे हैं। वजह इस बिल के बाद उन्हें मिलने वाले गेहूं की मात्र तो कम हुई है ऐसे में उन्हें बाजार से जो गेहूं खरीदना पड़ रहा है उसके लिए उनकी जेब पर दो से तीन गुना अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। हालांकि सरकारी अमला तर्क दे रहा है कि जिन बीपीएल परिवारों में सदस्यों की संख्या ज्यादा है उन्हें इसका फायदा मिलेगा।

मगर हकीकत यही है कि अकेले गुड़गांव में पांच से कम सदस्यों वाले बीपीएल परिवारों की तादाद सत्तर प्रतिशत के आसपास है। उदाहरण के तौर पर गुड़गांव के जैकबपुरा में रहने वाले रामलाल के परिवार को लें तो चार सदस्यों वाले इस बीपीएल परिवार को पहले 35 किलो गेहूं मिलता था और भुगतान करना होता था 175 रुपये अब नया बिल लागू होने के बाद चार सदस्यों को गेहूं मिल रहे हैं सिर्फ बीस किलो और भुगतान भी करना पड़ रहा है चालीस रुपये। भले ही गेहूं की कीमत पांच रुपये से घटकर दो रुपये प्रति किलो हो गई है लेकिन फिर भी रामलाल को यह सौदा तो घाटे का ही नजर आ रहा है।

वजह साफ है सीधे-सीधे पन्द्रह किलो गेहूं कम हो गए पेट भरने के लिए भोजन में तो कटौती हो नहीं सकती पेट भरना है तो यह गेहूं बाजार से खरीदने पड़ेंगे जो कम से कम बीस रुपये किलो के हिसाब से तीन सौ रुपये के आएंगे यानि अब रामलाल को तो 35 किलो गेहूं के लिए 175 रुपये के स्थान पर 340 रुपये देने पड़ेंगे यानि उसकी जेब पर सीधे-सीधे 165 रुपये का अतिरिक्त बोझ इस बिल के लागू होने से पड़ रहा है।

वैसे यह चिंता अकेले रामलाल की नहीं अपितु उसके जैसे श्याम लाल की भी है, जिनके परिवार में वह खुद और उनकी पत्नी है। बीपीएल परिवार की श्रेणी में हैं। पहले 35 किलो गेहूं मिल जाते थे। माह में घर पर दो-चार रिश्तेदारों का आना-जाना भी लगा रहता है। दस किलो जाहिर है अब 25 किलो गेहूं बीस रुपये किलो के भाव से बाजार से खरीदने भी पड़ेंगे तो जिसके लिए पांच सौ रुपये का भुगतान बाजार में करना होगा और दस किलो गेहूं के लिए बीस रुपये सरकारी कीमत तो देनी पड़ेगी। यानि पहले 35 किलो गेहूं जो श्याम लाल को 175 रुपये में मिल जा रहे थे अब वह उन्हें मिलेंगे 520 रुपये में यानि इसके लिए उन्हें 345 रुपये अतिरिक्त देने पड़ेंगे।

- नवीन गौतम
साभारः दैनिक जागरण