इन रेहड़ी पटरी व्यवसायियों का क्या गुनाह!

रेहड़ी-पटरी और थड़ी ठेला लगाकर अपनी व अपने परिवार के लिए परिश्रम से रोजी रोटी कमाने वाले पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स) के अधिकारों की रक्षा के लिए वर्ष 2014 में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट पास किया गया था। लेकिन कानून पास होने के पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद दूर दराज के ही नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी रेहड़ी पटरी व्यवसायियों का उत्पीड़न लगातार जारी है। स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के अनुसार शहर के प्रत्येक वार्ड को एक टाऊन वेंडिंग कमेटी गठित करनी होगी जिसके 40% सदस्य स्वयं पटरी व्यवसायी होंगे। यह कमेटी उस वार्ड में रेहड़ी पटरी लगाने वालों का सर्वे करेगी और व्यवसायियों को पहचान पत्र जारी करेगी। विशेष परिस्थितियों में यदि उन्हें हटाने की जरूरत पड़ी तो पहले उन्हें व्यवसाय करने के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराना होगा। इसके अतिरिक्त पटरी व्यवसायियों को अन्य प्रकार के संवैधानिक संरक्षण प्राप्त हैं। लेकिन तमाम नियमों को ताख पर रखकर न केवल पटरी व्यवसायियों को उजाड़ा जा रहा है बल्कि मनमाने ढंग से उनके सामानों की जब्ती भी की जा रही है। सीसीएस द्वारा तैयार यह वीडियो पटरी व्यवसायियों की व्यथा को प्रदर्शित करता है..

- आजादी.मी

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