आलोक पुराणिक

एक्सपर्ट कॉर्नर - आलोक पुराणिक

आलोक पुराणिक

इस पेज पर डा.आलोक पुराणिक के लेख दिये गये हैं। लेखक दिल्ली विश्विद्यालय में अध्यापनरत हैं और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ के साथ साथ जाने माने व्यंग्यकार हैं..
मेरा बेटा समलैंगिक है और अब मुझे इसे स्वीकार करने में कोई डर नहीं है। वह बीते 20 वर्षों से अपने पार्टनर के साथ आपसी विश्वास और प्रसन्नता भरी ज़िंदगी बिता रहा है। मेरे परिवार व नज़दीकी मित्रों ने इसे गरिमापूर्वक स्वीकार किया है। लेकिन, मैं इसके बारे में सार्वजनिक तौर पर बोलने से डरता था कि कहीं उसे कोई नुकसान न हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया। मेरी पत्नी और मुझे अचानक लगा कि जैसे बहुत बड़ा बोझ सिर से उतर गया है। मुख्य न्यायाधीश के बुद्धिमत्ता भरे शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे, 'मैं जो हूं, वैसा हूं, इसलिए...
Published on 7 Mar 2019 - 19:36
वित्तीय साक्षरता के मामले में पश्चिमी भारत और उत्तर भारत में बहुत फर्क है। उत्तर भारत यानी बिहार, उत्तर प्रदेश में आम मध्यवर्गीय परिवारों के अधिकांश लोगों से  शेयर बाजार के बारे में बात करें, तो उन्हे लगता है कि सट्टे की बात की जा रही है। सट्टा यानी एक अवांछनीय गतिविधि, सट्टा यानी किसी अनिश्चित घटना के घटने या ना घटने को लेकर लगायी जानीवाली शर्त, सौदे। इनमें एक पक्ष हारता और दूसरा पक्ष जीतता है। सट्टे को पक्के तौर पर निवेश और बचत  से जुड़ा मसला ना माना जा सकता। एक आम समझ शेयर बाजार को लेकर उत्तर भारत के अधिकांश परिवारों में यही है...
Published on 26 Feb 2015 - 16:15
खुदरा व्यापार में 51 फीसदी विदेशी निवेश के मुद्दे पर ‘संसद से सड़क तक’ घमासान छिड़ने और काफी जद्दोजहद के बाद नियम 184 के तहत संसद में बहस और वोटिंग के बाद विदेशी खिलाड़ियों के लिए देश में रिटेल स्टोर खोलने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि विदेशी निवेश के नफा-नुकसान को लेकर लोगों के मन में अब भी संशय बना हुआ है। उधर, वॉलमार्ट द्वारा भारत में विदेशी निवेश के पक्ष में समर्थन हासिल करने के लिए की गई लॉबिंग और इस मद में खर्चे गए सवा सौ करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि ने एक नए बहस को हवा दे दी है। एफडीआई के इन्हीं मसलों पर भारत के पहले उदारवादी वेब...
Published on 27 Dec 2012 - 19:42

Pages