सार्वजनिक नीति - उर्जा एवं पर्यावरण लेख

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ऐसा कहा जा रहा है कि सरकार वाहनों को नष्ट करने के बाबत एक नीति लाने को लेकर काफी उत्सुक है, जिसके तहत पुराने वाहनों को नष्ट करना अनिवार्य किया जाएगा या फिर उन्हें स्वयं नष्ट करने वालों को कुछ सब्सिडी प्रदान की जाएगी। ऐसा करने का एक उद्देश्य नई कारों की मांग में वृद्धि कर ऑटो इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है। वर्ष 2008 में आई मंदी के बाद यूएस और यूरोप में वाहनों को नष्ट करने के प्रति प्रोत्साहित करने के पीछे वास्तव में यही उद्देश्य था। दूसरा उद्देश्य प्रदूषण को कम करना है, चूंकि पुराने वाहन आमतौर पर नए वाहनों की तुलना में अधिक प्रदूषण युक्त वायु

• इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए भारी भरकम सब्सिडी दे रही है केंद्र व राज्य सरकारें
• देश में 3,73,029 मेगावाट बिजली उत्पन्न होती है। लगभग 54% प्रतिशत बिजली कोयले के प्लांटों से पैदा होती है 
• इन प्लांटों से बाइ प्रोडक्ट के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड व नाइट्रोजन जैसी जहरीली गैसों का उत्सर्जन होता है।

वर्ष 2019 में बतौर वित्त मंत्री अपना पहला भाषण पढ़ते हुए निर्मला सीतारमण देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा

भारत में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ से आने वाले “कोटेड पेपर” पर नई एंटी-डंपिंग जाँच शुरू होने के बारे में बातें चल रही हैं। दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया को इस जाँच से छूट दी गई है। दरअस्ल, ये देश ही ज़ीरो कस्टम ड्यूटी स्टेटस के चलते भारत में सस्ते आयात के लिए ज़िम्मेदार हैं, जैसा कि बल्लारपुर इंडस्ट्रीज़ लि. (बीआईएलटी) के अध्यक्ष ने कंपनी की 2016 और 2017 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा है। इस जाँच के चलते कोटेड पेपर के साथ फ़्लेक्सिबल पैकेजिंग, हल्के कोटेड पेपेर और ब्रोशर-पेम्फ़्लेट में इस्तेमाल होने वाले कोटेड पेपेर पर और ज़्यादा शुल्क

थिंकटैंक सेंटर फार सिविल सोसायटी (सीसीएस), उदारवादी वेबपोर्टल आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग कार्यक्रम ipolicy 2017. 16-18 जून 2017 तक एटलस नेटवर्क व एडलगिव के संयुक्त तत्वावधान में पत्रकारों के लिए ipolicy (लोकनीति में सर्टिफिकेट) कार्यक्रम के आयोजन के लिए इस बार उत्तराखंड के रमणीय स्थल नौकुचियाताल का चयन किया गया है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवेदन करने की की अंतिम तिथि 31 मई 2017 थी जिसे बढ़ाकर अब 5 जून कर दिया गया है। इस तीन दिवसीय (दो रात, तीन दिन) आवासीय कार्यक्रम का उद्देश्य

पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों ने प्रकृति और संस्कृति, कला और जीवन, सामरिक ललक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक शांति, जैव एवं सांस्कृतिक विविधता के बीच एक बेमिसाल तालमेल स्थापित किया है और इसे संरक्षित भी किया है। इन लोगों ने इस संतुलन की खूबी को संगीत, कला, स्थापत्य, अपनी सोच और ज्ञान प्रणाली, जीवन के आधारभूत रीति रिवाज से लेकर अपने कार्यों, मौसम और प्रकृति में संजोये रखा है।

पूर्वोत्तर अपनी भौगोलीय और पर्यावरणीय विविधता के कारण अलौकिक सुंदरता वाला क्षेत्र है। चारों तरफ हरे भरे जंगल,

- फ्रेजर इंस्टिट्यूट व सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा जारी वैश्विक रैंकिंग में 102 से फिसलकर 112वें स्थान पर पहुंचा भारत
- आर्थिक स्वतंत्रता के मामले में भूटान (78), नेपाल (108) व श्रीलंका (111) से पिछड़ा पर चीन (113), बांग्लादेश (121) व पाकिस्तान (133) से रहा आगे
- आर्थिक रूप से स्वतंत्र देशों की सूची में हांगकांग शीर्ष पर, सिंगापुर व न्यूजीलैंड क्रमशः दूसरे और तीसरे पायदान पर

नई दिल्ली। फ्रेज़र इंस्टिट्यूट, कनाडा द्वारा जारी वार्षिक आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक सूची (इकोनॉमिक फ्रीडम

जब हम जैसे लोग यह कहते हैं कि - जनसंख्या समष्द्धि का कारण है, केवल मनुष्य ही ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है और नक्शे पर  अंकित प्रत्येक बिन्दु,  जनसंख्या की दृष्टि से सघन है और ज्यादा सम्पन्न है,  तो उनके जैसे (तथाकथित समाजवादी) लोग प्राकृतिक संसाधन की कमी की बात करते हैं। उनका तर्क है कि पृथ्वी पर संसाधन सीमित हैं तथा यदि ज्यादा लोग होंगे, तो ये जल्दी समाप्त हो जायेंगे। प्राकृतिक संसाधनों की कमी की समस्या का जूलियन साइमन ने गहनतापूर्वक अध्ययन किया। उसने दीर्घकालिक मूल्य सम्बन्धी प्रवृत्तियों का अध्ययन किया और इससे बड़े

लातूर मे आज पानी की स्थिति इतनी भयानक है कि ट्रेन मे पानी भरकर उनकी प्यास बुझाई जा रही है। देश के कम से कम 9-10 राज्य अभूतपूर्व जल संकट से झूझ रहे हैं। मुंबई हाईकोर्ट पहले ही आईपीएल मैच जल संकट के कारण कहीं ओर कराने का आदेश दे चुका है। सूप्रीम कोर्ट भी इससे पहले केंद्र को पानी के मामले मे फटकार लगा चुका है। बुंदेलखंड और उसके आसपास के इलाकों से लोगो का पलायन जारी है। भारत की राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है। अभी कुछ दिनों पहले ही जाट आरक्षण के मुद्दे पर गरमाई राजनीति में जब दिल्ली का पानी बंद कर दिया गया तब सारी दिल्ली त्राहिमाम कर उठी।

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