चीन के समाजवादी शिक्षा वाउचर!

आजादी के बाद के भारत की पहचान उसकी समाजवादी विचारधारा रही है लेकिन धीरे-धीरे वह बदला लेकिन 1991 के उदारवादी सुधारों को लागू करने के बाद भी वह मुक्त व्यापार और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिकूल है। कम्युनिस्ट पार्टी की दमनकारी नीति के कारण पश्चिमी उदारवाद चीन में जड़े नहीं जमा सका। इस तरह दोनों ही देशों की कोई खास विचारधारा नहीं है। लेकिन चीन भारत की तरह बेखबर नहीं है।चीन का एक स्पष्ट लक्ष्य है – आर्थिक वृद्धि और विकास और उसे हासिल करने के लिए एक  सुनिश्चित राह है ।यह बात अलग है कि उसने मुक्त बाजार के सिद्धांतों को समाजवादी विचारधारा की ओट में छुपा रखा है।

वर्ष 1995 में मिल्टन फ्रीडमैन ने अपने लेख –रोल आफ गवर्मेंट इन एजुकेशन –में अभिभावकों के सामने स्कूल चयन के लिए वाउचर का विचार पेश किया था। उसके मुताबिक सरकारें प्रायवेट स्कूलों को सरकारी फंड उपलब्ध कराकर शिक्षा को वित्तीय सहायता मुहैया करा सकती है ताकि हरेक शिक्षा हासिल कर सके।

दस मई 2001 को चांगझिंग काउंटी के एजुकेशन ब्यूरो ने चीन में पहली शिक्षा वाउचर व्यवस्था लागू करने की शुरूआत करने की घोषणा की और इस तरह मिल्टन फ्रीडमैन द्वारा विकसित व्यवस्था को अपनाया। चार अलग –अलग तरह के शिक्षा वाउचर जारी किए गए। सिविलियन रन स्कूल वाउचर (500 युआन या 65 डालर), वोकेशनल एजुकेशन वाउचर (300 युआन या 39 डालर), पुअऱ स्टुडेंटस (200-300 युआन या 25-39 डालर) और ग्रामीण कौशल प्रशिक्षण शिक्षा वाउचर। जांग झिंग ने 72 सिविलियन रन स्कूल वाउचर, 8743 पुअऱ स्टुडेंटस वाउचर, 15818 वोकेशनल एजुकेशन वाउचर, 787 सिविलियन रन हाई स्कूल के लिए शिक्षा वाउचर, 624 साधारण हाईस्कूलों के लिए शिक्षा वाउचर और 11150 ग्रामीण कौशल प्रशिक्षण शिक्षा वाउचर जारी किए।

कोई सोच भी नहीं सकता कि चीन जैसा अधिनायकवादी समाजवादी देश इस नीतिगत साधन को अपना सकता है। यह एक लोकतांत्रिक औजार होने के नाते यह सोचा जा सकता है कि भारत जैसा आर्थिक दृष्टि से स्वतंत्र देश इसे लागू करे। यह बात अलग है कि उम्मीदें हमेशा पूरी नहीं होती।

चीन ने मुक्त बाजार के इस औजार को निम्नलिखित तरीकों से ढक दिया था।

  • चीन विश्वास करता है कि वाउचर में निष्पक्षता और कुशलता का एक मिश्रण है।जिसमें कुशलता को भले ही प्राथमिकता दी गई हो लेकिन निष्पक्षता पर भी बल दिया गया है- यह च्वाइस के प्रचार का मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है।
  • वाउचर के बारे में माना जाता है कि वह सरकार के लिए  प्रभावी वित्तीय संसाधन योजना है क्योंकि वह शिक्षा फंड को प्रोसेस करने की ट्रेड कास्ट घटाती है।
  • सबसे रोचक बात यह है कि वाउचर के बारे में यह माना जाता है कि संपत्ति अधिकार विनिमय की राह प्रशस्त करता है क्योंकि हर कोई करदाता है इसलिए सार्वजनिक शिक्षा फंड़ों पर उनका समान अधिकार है। इस कारण सरकार के लिए यह जरूरी हो जाता है लोगों की चयन की मांग को पूरा करने के लिए प्रायवेट स्कूल को सब्सिडी दी जाए।यह वैसा ही है जैसे लोग अपना पैसा खुद खर्च कर रहे हों।
  • एक और आयाम यह है जो समाजवादी सोच की तरफ ले जानेवाला है लेकिन जिसे आदर्श नहीं माना जा सकता वह यह कि वाउचर प्रायवेट स्कूलों को नए तरह की पब्लिक संस्था में बदल देते हैं क्योंकि सरकार की भूमिका खेने के बजाय पतवार से चलाने की है।इसलिए पब्लिक संस्थाओं को मिला हुआ पवित्रता का दर्जा प्रायवेट संस्थाओं को भी मिल जाता है।

यह सब जानकर मिल्टन फ्रीडमैन की आत्मा भ्रमित लेकिन प्रसन्न हुई होगी।

चीन ने वही अपनाया जो उसके विकास के लिए आवश्यक था और दौड़ में बहुत आगे चला गया जबकि भारत अब भी बहुत पीछे है मगर सोचता है कि वह प्रतियोगिता में है।जबकि हकीकत यह है कि भारत जानता भी नहीं कि होड़ कैसे की जाती है।

- अक्षिका