त्वरित टिप्पणीः कांट्रैक्ट फार्मिंग किसानों के लिए विन विन सिचुएशन

मोदी सरकार ने कृषि सुधार के लिए जिन दो बिलों को लोकसभा और राज्यसभा से पास करवाया है उसमें एक का संबंध कांट्रैक्ट फार्मिंग यानी अनुबंध खेती से है। सरकार का जहां इसे किसानों विशेषकर छोटे व सीमांत किसानों के लिए फायदेमंद बता रही है वहीं कुछ किसान समूह व राजनैतिक दल इसे एक छलावा बता रहे हैं। उनका कहना है कि नए प्रावधानों के कारण किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बन जाएगा और सारा फायदा कंपनी उठा ले जाएगी। इस विषय पर “आजादी.मी” ने किसानों के देश के सबसे बड़े संगठन शेतकरी संगठन से जुड़े गुनवंत पाटिल से बातचीत कर इसे समझने की कोशिश की। प्रस्तुत है गुनवंत पाटिल के विचार उन्हीं के शब्दों मेः

“कांट्रैक्ट फार्मिंग यानी की अनुबंध खेती को किसानों के लिये घाटे का सौदा बताने वाले लोग गलत हैं। कांट्रैक्ट फार्मिंग का तरीका बहुत पहले से ही किसानों और जमीन के मालिकों के बीच प्रचलन में है। हां, पहले जहां यह कार्य आपसी समझौते के तहत होता था अब उसे कानूनी तौर पर किया जा सकेगा। पहले जमीन के मालिकों को यह डर होता था कि यदि जमीन किसी और को जोतने और फसल उगाने के लिए दे दिया जाएगा तो वह उस पर कब्जा कर लेगा और जमीन का स्वामित्व उसे जोतने वाले को मिल जाएगा। तमाम लोग अपनी जमीन को खाली पड़ा रहने देते थे लेकिन उसे किसी को फसल उगाने के लिये नहीं देते थे। उधर, जमीन पर जुताई करने वाला भी फसल खराब होने की दशा में क्षतिपूर्ति क्लेम नहीं कर पाता था क्योंकि उसके पास कोई प्रूफ नहीं होता था। अब इसे कानूनी शक्ल मिल जाने पर जमीन का मालिक और भूमि हीन दोनों को संरक्षण मिलेगा।”

“किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बन जाएगा यह डर भी बिल्कुल निराधार है। इसे टैक्सी एग्रिगेटर कंपनी ओला-उबर के उदाहरण से समझ सकते हैं। ओला उबर आने के बाद कार मालिकों को कई तरीके से फायदा मिला। वो चाहे तो अपनी कार किसी और ड्राइवर को देकर कमाई एक हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं। चाहे तो खुद चलाकर पूरी कमाई अपने पास रख सकते हैं। ओला उबर किसी की कार को जब्त कर लेती है क्या? ठीक इसी प्रकार कांट्रैक्ट फार्मिंग से जमीन मालिक चाहे तो कंपनी से जुड़कर अपनी जमीन का किराया वसूल सकता है या खुद मजदूरी कर किराया और मजदूरी दोनों हासिल कर सकता है। इसमें कंपनी, जमीन का मालिक और भूमि हीन मजदूर तीनों को लाभ मिलेगा।”  

इस बातचीत को यहां देखा जा सकता है https://www.facebook.com/watch/?v=990388491446896
आजादी.मी