शासन

मुफ्त बिजली, अत्यधिक सब्सिडाइज्ड यूरिया और खुली खरीद के खतरनाक मिश्रण से पंजाब की प्राकृतिक संपदा समाप्त हो रही है।

वर्ष 1991 में भारत में हुए सुधारों के दौरान कृषि को इससे दरकिनार कर दिया गया। कृषि और खाद्य आधारित नीतियां ‘गरीबों के संरक्षण’ के नाम पर उपभोक्ता केंद्रीत ही बनीं रही। 

भारत सरकार द्वारा हाल ही में घोषणा की गई है कि भारत अब अपना एक बैड बैंक स्थापित करेगा। इस फैसले का एक तरफ जहां बड़े उत्साह के साथ स्वागत किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ कई लोगों ने बैड बैंक स्थापित करने के विचार पर भले ही असंतोष नहीं जताया हो लेकिन इसे लेकर अपनी चिंताएं अवश्य जाहीर की हैं।

सुधार की राह कभी भी आसान नहीं रही है। कड़े और संरचनात्मक सुधार के कारण चुनाव के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है किंतु आपदा सदैव अपने साथ परिवर्तन के अवसर लेकर आती है और महामारी ने भी केंद्र सरकार को सुधार का ऐसा ही अवसर प्रदान किया है।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 को कृषि क्षेत्र में नयी जान डाल देनी चाहिए ताकि उसकी पूरी क्षमता का दोहन किया जा सके। हालांकि जहां बहुत सारे लोगों की दलील है कि यह संशोधन सही दिशा में उठाया गया कदम है, यह अधिनियम आपने मौजूदा रूप में आदर्श नहीं है। कुछ नियमों के स्पष्ट न होने के कारण यह अनुत्पादक हो सकता है जिसकी वजह से उस स्थिरता पर खतरा पैदा हो सकता है जिसे यह बढ़ावा देना चाहता है।

ऐसा कहा जा रहा है कि सरकार वाहनों को नष्ट करने के बाबत एक नीति लाने को लेकर काफी उत्सुक है, जिसके तहत पुराने वाहनों को नष्ट करना अनिवार्य किया जाएगा या फिर उन्हें स्वयं नष्ट करने वालों को कुछ सब्सिडी प्रदान की जाएगी। ऐसा करने का एक उद्देश्य नई कारों की मांग में वृद्धि कर ऑटो इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है। वर्ष 2008 में आई मंदी के बाद यूएस और यूरोप में वाहनों को नष्ट करने के प्रति प्रोत्साहित करने के पीछे वास्तव में यही उद्देश्य था। दूसरा उद्देश्य प्रदूषण को कम करना है, चूंकि पुराने वाहन आमतौर पर नए वाहनों की तुलना में अधिक प्रदूषण युक्त वायु और

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले 100 दिनों से जारी किसान आंदोलन के बीच राजनैतिक दलों और राज्य सरकारों के बीच भी सियासी प्रतिस्पर्धा जारी है। यह प्रतिस्पर्धा स्वयं को किसानों का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने की है। किसानों (वोट) को अपने साथ लाने के लिए पहले पंजाब सरकार और उसके बाद राजस्थान सरकार द्वारा संशोधित कृषि कानून लाए गए। इन कानूनों का उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के कारण किसानों के होने वाले ‘नुकसान’ को कम करना है। आज बात करते हैं राजस्थान सरकार द्वारा पारित तीन कृषि संशोधन विधेयकों की।

संकट काल से गुजर रही भारतीय कृषि से जुड़ी आम राय के संदर्भ में कृषि कानूनों पर स्पष्ट मत विभाजन का विश्लेषण और बयानबाजी से आगे बढ़ने के संभावित तरीके।

क्या हम कृषि के क्षेत्र में विकास करना चाहते हैं जो कि आर्थिक रूप से टिकाऊ भी हो, या फिर एमएसपी और एसएपी के वर्चस्व के कारण पैदा हुआ चावल, गेंहू और चीनी वाला झमेला?

कुछ राज्यों द्वारा 10वीं और 12वीं की कक्षाओं को कुछ सीमाओं के साथ अनलॉक करने का फैसला लिया गया है लेकिन प्राथमिक कक्षाओं वाले स्कूलों को खोलने पर अबतक फैसला नहीं लिया जा सका है। स्कूलों के बंद रहने से छात्रों, शिक्षकों, स्कूल कर्मचारियों और स्वयं स्कूलों पर क्या दुष्प्रभाव पड़ा है जानते हैं बजट स्कूलों के अखिल भारतीय संगठन नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) के वाइस प्रेसिडेंट और तेलंगना रिकगनाइज्ड स्कूल्स मैनेजमेंट एसोसियेशन के स्टेट जनरल सेक्रेटरी एस. मधुसूदन से..

कोविड 19 संक्रमण के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से वर्ष 2020 के शुरुआती महीनों में देश राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया। लॉकडाउन के दौरान अपरिहार्य कार्यों और सेवाओं को छोड़ सभी प्रकार की गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया। लगभग दो महीने तक जारी रहे टोटल लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से धीरे समाप्त किया जाने लगा और छह माह के भीतर कुछ सावधानियों और सुरक्षा उपायों के साथ देश चरणबद्ध तरीके से अनलॉक हो गया। हालांकि कोविड 19 संक्रमण के प्रसार के कारण लागू किया गया लॉकडाउन स्कूलों पर जारी रहा। हाल ही में कुछ राज्यों द्वारा 10वीं और 12वीं

Pages