व्यापार

लोग कई बार मुझसे ये पूछते हैं कि वाकई जुगाड़ है क्या? ग्लोबल मैनेजमेंट विशेषज्ञ भारत के तेजी से हो रहे आर्थिक विकास का श्रेय जुगाड़ को देते हैं। लेगाटम इंस्टीच्यूट के एक ताजा सर्वे में भारतीय कारोबारियों में 81 फीसदी ने ये कहा कि उनकी कामयाबी में जुगाड़ ने मुख्य भूमिका निभाई।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

देश में कमर तोड़ महंगाई ने सब का जीना मुश्किल कर दिया है. खाने की चीजों के दाम में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने मिल कर आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है. भारत में मुद्रास्फीति यानी महंगाई की दर दिसंबर के अंत में 18.32 फीसदी दर्ज की गई है जो कि  वर्ष 2010 में सबसे अधिक थी.

वोक्स यू (VoxEU) में जीसस फेलिप, उत्सव कुमार और आर्नेलिन एबडन का एक आकर्षक लेख प्रकाशित हुआ है, ‘चीन और भारतः सबसे अलग दो धुरंधर’ (china and India: Those two big outliers)। इस लेख में वे इस रोचक तथ्य का जिक्र करते हैं कि जब बात निर्यात को व्यावहारिक बनाकर परिष्कृत करने, उसमें विविधता लाने की आती है तो भारत और चीन उनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लिहाज से काफी समझदार दिखते हैं। निर्यात में विविधता का जो सबूत वे पेश करते हैं, वह काफी चौंकाने वाला है-

पिछले 10-15 सालों में भारत में आउटसोर्सिंग उद्योग ने बहुत प्रगति की है. आउटसोर्सिंग से ना सिर्फ लाखो लोगो को रोज़गार मिला, देश की GDP (सकल घरेलू उत्पाद) को भी इसकी वजह से एक बड़ा उछाल मिला. विश्व के बड़े और विकसित देश आज भारत सरीखे कई अन्य विकाशील देशों से अपने काम सस्ती दरों पर कराते हैं. सस्ती जगहों में अपना काम आउटसोर्स करने के कई फायदे हैं. अव्वल तो इन देशों को कम दरों पर काम करने वाले पर काबिल कर्मचारी मिल जाते हैं. खासतौर पर भारत में काम करने लायक युवा जनता ना सिर्फ अच्छी अंगेजी बोलना जानती है, वो कंप्यूटर का भी ज्ञान रखती है.

 

व्यापार से शांति होती है. जो देश आपस में व्यापार करते हैं, उन में युद्ध की जगह शांति और मित्रता का सम्बन्ध रहता है. देशों के बीच में जितना अधिक व्यापार होगा, उन में संघर्ष की सम्भावना उतनी कम रहेगी. ये समझना गलत है की आपसी व्यापार से सिर्फ एक पक्ष का ही फायदा होता है. मुक्त व्यापार से आपसी लाभ होते हैं और समाज में शांति और सम्पन्नता को बढ़ावा मिलता है.

 

एप्पल कोर होटल्स के सी ई ओ विजय दंडपानी का कहना है की मुक्त व्यापार ना होने से देशों के बीच में सिर्फ द्वेष की भावना बढती है. भारत पाकिस्तान आपसी व्यापार के ज़रिये एक दूसरे का काफी आर्थिक फायदा कर सकते थे और यदि ऐसा होता तो दोनों पड़ोसी मुल्कों में इतनी शत्रुता भी नहीं होती. उन्होने अमरीका और कनाडा का भी उदाहरण दिया जो मुक्त व्यापर के ज़रिये आज एक बहुत अछे सम्बन्ध में बंधे हुए हैं.

महाभारत के अनुसार मनुष्य बुनियादी रूप से दोषयुक्त है और उसकी गलतियां संसार को विषम बनाती हैं। दुर्योधन उस विषमता का सबसे बड़ा प्रतीक है, लेकिन अन्य लोग भी उसमें अपना खासा योगदान करते हैं। युधिष्ठिर जुए का प्रतिकार नहीं कर सकते, कर्ण समाज में अपनी प्रतिष्ठा की चिंता से ग्रस्त है, अश्वत्थामा की प्रकृति में प्रतिशोध की भावना है, धृतराष्ट्र के मन में अपने बड़े बेटे के लिए अतिरिक्त स्नेह है। ये मानवीय कमजोरियां उस महाकाव्य को विध्वंस की दिशा में लेकर जाती हैं। महाभारत के चरित्रों की ही तरह वॉल स्ट्रीट के निवेश बैंकर भी उन्हीं कमजोरियों के शिकार हैं और इन्हीं दुर्बलता

Author: 
गुरचरण दास

एक सदी से ज्यादा वक्त हो गया अर्थशास्त्री आदर्श मुद्रा को बनाने या उसे ईजाद करने में जुटे हुए हैं। ऐसी मुद्रा के विस्तृत स्वभाव को लेकर किन्हीं दो अर्थशास्त्रियों तक में सहमति दिखाई नहीं देती। लेकिन फिलहाल वे इसके एक नकारात्मक बिंदु पर तो सहमत दिखाई देते हैं। मुझे शक ही है कि शायद ही कोई अर्थशास्त्री होगा जो अंतरराष्ट्रीय या अमेरिकी मुद्रा प्रणाली का आज की स्थिति में बचाव करना चाहेगा।

    राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में छाया रहा होंडा मोटरसाइकिल्स एंड स्कूटर्स इंडिया लि.

    'उद्यमी' शब्द सुनते ही अचानक टाटा, बिरला, अंबानी, नारायण मूर्ति आदि का स्मरण हो आता है। लेकिन एक सामान्य आदमी भी किसी-न-किसी रूप में कोई-न-कोई उद्यम करता है। महावत, लोहार, रेहड़ी-पटरी वाले, मदारी, सपेरे, मछुआरे, चिड़ीमार, मजदूर, कूड़ा चुनने वाले इत्यादि कड़ी मेहनत कर अपनी जीविका चलाते हैं। तो क्या वे भी उद्यमी नहीं हुए? यह अलग बात है कि कानून, रेगुलेशन और रीति-रिवाज बहुधा उनके सामने कई बाधाएँ खड़ी करती रहती हैं।

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