कानून तथा न्यायपालिका

नजरियाः प्राइवेट नौकरियों में स्थानीयों के लिए 75% आरक्षण के कानून का असर बाकी राज्यों पर भी पड़ेगा

Author: 
गुरचरण दास

आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 को कृषि क्षेत्र में नयी जान डाल देनी चाहिए ताकि उसकी पूरी क्षमता का दोहन किया जा सके। हालांकि जहां बहुत सारे लोगों की दलील है कि यह संशोधन सही दिशा में उठाया गया कदम है, यह अधिनियम आपने मौजूदा रूप में आदर्श नहीं है। कुछ नियमों के स्पष्ट न होने के कारण यह अनुत्पादक हो सकता है जिसकी वजह से उस स्थिरता पर खतरा पैदा हो सकता है जिसे यह बढ़ावा देना चाहता है।

संकट काल से गुजर रही भारतीय कृषि से जुड़ी आम राय के संदर्भ में कृषि कानूनों पर स्पष्ट मत विभाजन का विश्लेषण और बयानबाजी से आगे बढ़ने के संभावित तरीके।

कृषि की दशा और किसानों की आर्थिक अवस्था में सुधार के उद्देश्य से देश में तीन नए कानून बनाए गए हैं। ये कानून हैं कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020। सरकार के मुताबिक पहले विधेयक का उद्देश्य एक ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण करना है जहां किसानों और व्यापारियों को मंडी से बाहर फसल बेचने और खरीदने की आज़ादी होगी। दूसरे विधेयक का उद्देश्य कृषि करारों के संबंध में एक राष्ट्रीय तंत्र की स्थापना करना है जहां कृषि उत्पादो

एक पुरानी कहावत है - अमेरिकी लोगों की बुद्धिमता को कम आंक कर किसी का आर्थिक नुकसान नहीं हुआ अर्थात अमेरिकियों को आसानी से फुसलाकर पैसे कमाए जा सकते हैं। यदि आप इस पर आगे विचार करें तो उन्हें अधिक बुद्धिमान आंकना संभवतः ज्यादा कारगर होगा। यदि आप इस विषय पर और अधिक विचार करें तो पाएंगे कि ऐसी स्थिति सभी लोकतंत्रों के साथ है। और यदि आप में थोड़ा अधिक धैर्य है और आप और अधिक विचार करते हैं तो आप पाएंगे कि कहावत में ‘अमेरिकी लोगों’ के स्थान पर ‘भारतीय लोग’ ज्यादा सटीक बैठता है। विशेषकर वर्तमान में जारी उन बहसों के परिपेक्ष्य में जो बहु प्रतीक्षित,

- संसद में विस्तृत चर्चा की बजाए लाए गए अध्यादेश ने डाला डर का बीज
- पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा किसानों को दिखाए गए सब्ज़बाग की विफलता से डिगा है भरोसा
- भूमि सुधार और निजी सुरक्षा प्रदान करने के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करने का है स्कोप

अर्थशास्त्री और लेखक गुरचरण दास कृषि क्षेत्र में सुधार के एक बड़े पैरोकार हैं और मोदी सरकार द्वारा लागू किये गए तीन नए कृषि क़ानूनों को काफ़ी हद तक सही मानते हैं. लेकिन 'इंडिया अनबाउंड' नाम की प्रसिद्ध किताब के लेखक के अनुसार प्रधानमंत्री किसानों तक सही पैग़ाम देने में नाकाम रहे हैं. वो कहते हैं कि नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे बड़े कम्युनिकेटर होने के बावजूद किसानों तक अपनी बात पहुंचाने में सफल नहीं रहे.

Author: 
गुरचरण दास

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