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देश के वर्तमान आर्थिक हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यदि बैकिंग ढांचा पटरी पर आ गया तो अर्थव्यवस्था की गाड़ी को रफ्तार पकड़ने में ज्यादा देर नहीं लगेगी

हमारा सामना इस असुविधाजनक सत्य से है कि हिंदुत्व व कश्मीरियत सहित हर राष्ट्रवाद काल्पनिक है

Author: 
गुरचरण दास

- राजाजी के नाम से लोकप्रिय सी.राजगोपालाचारी की यह जीवनी प्रोफाइल्स इन करेज नाम की पुस्तक से ली गई है। राजाजी के इस जीवन परिचय में लेखक जी.नारायणस्वामी ने उनके संघर्ष, बेबाक व्यक्तित्व और फैसले लेने के निर्भीक अंदाज का बखूबी वर्णन किया है।

व्यक्तित्व एवं कृतित्व

[जन्म 10 दिसंबर, 1878  – निधन 25 दिसंबर, 1972]

राजाजी पर प्रायः अंसगत और बार-बार अपना पक्ष बदलते रहने का आरोप लगता रहा है। हम कुछ ऐसी महत्वपूर्ण परिस्थितियों का अवलोकन कर सकते हैं, जब उनका विरोधाभास स्पष्ट रूप से दिखाई दियाः

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दिल्ली एक बार फिर से मिशन मोड में है। यह मिशन है ‘मिशन नर्सरी एडमिशन’। नवंबर के अंतिम सप्ताह में नर्सरी दाखिलों के लिए गाइडलाइंस जारी होने के साथ ही अभिभावकों की दौड़ शुरू हो गई है। दौड़ अपने बच्चों को एक अदद ‘बढ़िया’ स्कूल में दाखिला दिलाने की है। यह सिर्फ घर से ‘पसंद’ के स्कूल तक की ही दौड़ नहीं है, यह दौड़ है उन सभी संभावित विकल्पों को आजमाने की जो उन्हें मनपसंद स्कूल में दाखिला सुनिश्चित करा सके। इस दौरान अभिभावकों को जिस आर्थिक, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है ये सिर्फ वही जानते हैं। हालांकि गाइडलाइंस जारी करते समय प्रत्ये

सितम्बर, 2019 में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति वैंकेया नायडू ने अदालतों में बड़ी तादात में लंबित मामलों के निपटारे के लिए न्यायिक व्यवस्था में बड़े सुधार की बात कहीं। अपने उद्धबोधन में उन्होंने उच्चतम न्यायालय को चार न्यायपीठों (Cassation Court) में विभाजित करने का सुझाव दिया। उपराष्ट्रपति के इस सुझाव से निश्चित ही न्यायप्रणाली में सुधार आयेगा।

विधेयक लोकसभा से जुलाई 2019 में पास होने के बाद राज्यसभा में भेजा गया जहां सांसदों की तीखी बहस के बाद इसे सिलेक्ट कमिटी को स्थानांतरित किया गया है। किराए की कोख यानी सेरोगेसी पर कानून बन जाने के बाद  भारत में वाणिज्यिक सेरोगेसी को अवैधानिक कर दिया जाएगा। भारत में अब सिर्फ परोपकारी सरोगेसी ही मान्य होगी अर्थात आर्थिक लाभ के उद्देश्य से ऐसा किया जाना गैरकानूनी होगा।

ज्योतिराव गोविंदराव फुले का जन्म वर्ष 1827 में 11 अप्रैल को सतारा, महाराष्ट्र में हुआ था। वे जाति से माली थे और उनके परिवार का मुख्य व्यवसाय फूलों का था। जब उनकी उम्र मात्र 9 माह थी तभी उनकी मां चल बसी। बालक ज्योतिराव ने भी काफी समय तक अपने पिता के साथ फूलों के गजरे बनाने और बेचने का काम किया। जीविकोपार्जन के लिए उन्होंने खेती भी की। उनके पिता उन्हें स्कूल नहीं भेजते थे। उन्हें लगता था कि पढ़ लिख जाने के बाद ज्योतिराव को काम करने में शर्म आएगी। लेकिन ज्योतिराव की पढ़ाई में रूचि और तेज दिमाग को देखते हुए बाद में उनका दाखिला स्कॉटिश मिशन्स हाई

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संविधान दिवस विशेष

आज 26 नवंबर है। देश के लिए यह दिन अत्यंत ही खास है। वर्ष 1949 में आज ही के दिन संविधान सभा ने स्वयं के संविधान को स्वीकृत किया था। दो महीने बाद 26 जनवरी 1950 से यह पूरे देश में लागू हो गया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पहल पर वर्ष 1979 से संविधान सभा द्वारा नए संविधान को मंजूरी देने के इस अत्यंत खास दिन को देश में राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में मनाए जाने लगा। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गजट नोटिफिकेशन के द्वारा इस दिन को संविधान दिवस के रूपए में मनाए जाने की पहल की।

भारतीय उदारवादी राजनेता 'मीनू मसानी' के जन्मदिवस पर विशेष-

साम्यवाद और समाजवाद

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