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पिछले दिनों बहु प्रतिक्षित और बहु चर्चित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। देश की शिक्षा को लेकर नीति क्या हो, आखिरी बार यह 1986 में तय किया गया था। हालांकि 1992 में इसमें छिटपुट संशोधन किया गया था। वर्ष 2014 की चुनावी रैलियों में तब के बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और वर्तमान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा नीति में बदलाव की ज़रूरतों को मुद्दा बनाया था। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा लागू किये गए शिक्षा का अधिकार कानून के प्रावधानों की प्रधानमंत्री ने चुनावी रैलियों के दौरान मुखर

दो दिनों पहले भारत ने अनलॉकडाउन 3.0 में प्रवेश किया। केंद्र सरकार द्वारा नाइट कर्फ्यू को समाप्त कर दिया गया है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी देर तक खुलने की अनुमति दे दी गई है। जिम, योगा सेंटर्स को भी कुछ निर्देशों के साथ खोलने की तैयारी कर ली गई है। तैयारी सिनेमाघरों और मॉल्स को खोलने की भी चल रही है। रेल और विमान सेवा भी सीमित संख्या में शुरु कर दी गई है। सरकार द्वारा दिशा निर्देश में सामाजिक दूरी बनाए रखना, आरोग्य सेतु ऐप का उपयोग करना, मास्क का उपयोग करना और नियमित रूप से हाथों को साफ करने को पूर्व की भांति जारी रखा गया है। 

यह कहने की आवश्यकता नहीं कि मैं प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हूं। मैं शराब पर प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हूं। मैं सिगरेट पीने पर लगाए गए प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हूं; मैं सैक्रीन व साइक्लामेट पर प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हूं वरन मैं बस इस पक्ष में हूं कि हर किसी को खतरों से अवगत कराया जाए और उन्हें इस बात की छूट मिले कि अपनी पूरी बुद्धिशीलता व अपने निर्णय के अनुसार वे वही करें जो करना चाहते हैं।

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कोरोना महामारी से मंद पड़ी कारोबार की रफ्तार की तेज करने के लिए हरियाणा सरकार जिला स्तर पर तैनात नोडल अफसरों को और अधिक शक्तियां प्रदान करने जा रही हैं। राज्य को उम्मीद है कि कारोबार की सुगमता बढ़ाए जाने से जहां राज्य में निवेश के द्वार खुलेंगे वहीं कोरोना काल में गिरे राजस्व संग्रह में भी सुधार की संभावना बढ़ेगी। अभी तक नए निवेश के लिए सीएलयू, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी व बिजली कनेक्शन से लेकर 20 से अधिक विभागों की 80 तरह की मंजूरियां  चंडीगढ़ स्थित हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र से दी जाती हैं। अब ये मंजूरियां जिला स्तर पर ही जिला उद्योग केंद्रों में तैनात नोडल

कोरोना वायरस के बाद की दुनिया की तैयारी के लिए भारत को ज्यादा इनोवेटिव स्कूलों की जरूरत होगी। यह तभी होगा जब हम निजी स्कूलों को ज्यादा आजादी देंगे।

Author: 
गुरचरण दास
"पॉलिसी टॉक' के इस एपिसोड में सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के सीईओ यतीश राजावत मुखातिब हैं राजस्थान सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा से। जानें क्या है, कोरोना काल में सभी बच्चों तक स्कूली शिक्षा पहुंचाने, इंटरनेट और स्मार्टफोन तक पहुंच से वंचित छात्रों को शिक्षा से जोड़े रखने, स्कूलों की फीस माफी, आरटीई के तहत मुफ्त शिक्षा और निजी स्कूलों की प्रतिपूर्ति जैसे मुद्दे पर मंत्री डोटासरा की राय? - आजादी.मी
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फ्रेडरिक बास्तियात का जन्म 30 जून 1801 में बेयोन में हुआ था। उनका परिवार एक छोटे से कस्बे मुग्रोन से ताल्लुक रखता था, जहां उन्होंने अपनी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा गुजारा और जहां पर उनकी एक प्रतिमा भी स्थापित है। मुग्रोन, बेयोन के उत्तर-पूर्व में एक फ्रांसीसी हिस्से 'लेस लेंडेस' (Les Landes) में स्थित है। उन्होंने अपनी जिंदगी का बाद का हिस्सा पेरिस में 'लेस जर्नल डेस इकानॉमिस्तेस' (Le Journal des Economistes) के संपादक और 1848 में संसद सदस्य के तौर पर गुजारा।

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कोरोना वायरस संक्रमण के विस्फोट जैसी स्थिति को रोकने के उद्देश्य से 12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाऊन 4.0 की घोषणा की। इसके पूर्व पूरा देश लगभग दो महीने तक संपूर्ण लॉकडाऊन की स्थिति में रहा और इस दौरान सभी प्रकार की आर्थिक गतिविधियां ठप्प रहीं। सिर्फ ऐसे सेक्टर ही थोड़े बहुत सक्रिय रहें जिनमें वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की संभावनाएं थी। जैसी कि उम्मीद थी, देश में हुई अभूतपूर्व बंदी का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा जिससे उबारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी पड़ी। इसे नाम दिया गया

कोरोना संकट से लड़ने में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है और इससे हमें क्या सबक लेने चाहिए? 

चीनी जब ‘क्राइसिस’ (संकट) शब्द लिखते हैं तो दो ब्रशस्ट्रोक्स इस्तेमाल करते हैं। एक का मतलब है डर, दूसरे क अवसर। कुछ देश डर से भर जाते हैं, कुछ खुद को बेहतर बनाने के रास्ते तलाशते हैं। कोरोना ने हमारे देश की क्षमता की परीक्षा ली है। इसमें भारत का प्रदर्शन कैसा रहा और हमने अबतक क्या सीखा है?

Author: 
गुरचरण दास

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