आज़ादी.मी टीम's blog

अगर देश का अमीर तबका कुछ अधिक सादगीपसंद होता तो क्या देश के कुछ और अधिक लोगों की जिंदगियां मौजूदा के मुकाबले बेहतर होतीं? अतिशय खर्च के खिलाफ मौजूदा लड़ाई हमें बताती है कि मध्य वर्ग की बढ़ती आय और तेजी से ऊपर उठती जीवनशैली, और साल दर साल करोड़पतियों की बढ़ती संख्या के बीच अर्थशास्त्री बढ़ती असमानता को लेकर लगातार अपनी असहमति जताते रहे हैं।

महज चार वर्ष पहले की बात है,प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक सम्मेलन में कारोबारियों को यह सुझाव देकर घबराहट पैदा कर दी थी कि वे 'अत्यधिक पारिश्रमिक का प्रतिरोध' करें और ज्यादा खपत को हतोत्साहित करें। दो वर्ष बाद कंपनी मामलों के तत्कालीन मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहीं अधिक सपाट तरीके से कहा था कि कंपनियां अपने शीर्ष अधिकारियों को अत्यधिक वेतन देने से बचें। वर्ष 2010 में जब अर्थव्यवस्था बढ़ती महंगाई से जूझ रही थी तक कंपनी विधेयक पर संसद की स्थायी समिति ने मुख्य कार्याधिकारियों के वेतन की सीमा तय करने की अनुशंसा की।

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गरीब और अमीर के बीच बढ़ती खाई ने दुनिया में एक नई विसंगति पैदा की है। हमारी एक पृथ्वी पर दो दुनिया बसी हुई हैं- एक में गरीब लोग भुखमरी से बचने के लिए पसीना बहा रहे हैं, जबकि दूसरी में अमीरों को नहीं सूझ रहा है कि वे अपनी धन-दौलत कैसे खर्च करें। एक पृथ्वी पर दो दुनिया की स्थिति बहुत लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती।

जल और स्वच्छता (सेनिटेशन) का संकट विश्व में अरबों लोगों को प्रभावित कर रहा है। इससे नियमित रूप से बच्चों की मौत हो रही है। वर्तमान में, 1,10 अरब लोगों (विश्व की 17 फीसदी आबादी) को स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अस्वच्छ पानी और अस्वच्छता के कारण प्रतिवर्ष लाख लोगों की मौत होती है। विश्व में लगभग 2 अरब लोगों की शौचालयों एवं स्वच्छता संबंधी अन्य सुविधाओं तक पहुंच नहीं है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का दूसरा प्रमुख कारण डायरिया है।

अपने नागरिकों के लिए खाद्य और शिक्षा जैसी सामग्री और सेवाओं में सुधार के उपाय भारत ने कानून बनाकर किए हैं। भारत में शिक्षा का अधिकार कानून पहले ही है, और भूख तथा कुपोषण के समाधान के लिए अब खाद्य अधिकार कानून बनाने की तैयारी चल रही है। हालांकि शिक्षा का अधिकार कानून के नतीजे क्या निकलेंगे, यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी।

इस बीच बिहार ने सेवा अधिकार कानून बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह कानून इस राज्य के निवासियों के लिए यह सुनिश्चित करेगा कि वे एक तय समय के भीतर सार्वजनिक निकायों या दफ्तरों की सेवा प्राप्त कर सकेंगे, जैसे कि बिजली की मरम्मत और पोस्टमार्टम रिपोर्ट।

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मुंबई की अदालत में मिंट चबा रहा हसन अली दरअसल भारत के कानून को चबा रहा था. हसन अली को जमानत देते हुए अदालत पूरी दुनिया को बता रही थी कि भारत की जांच एजेंसियों का डायनासोरी तंत्र अपने सबसे पुराने और मशहूर कर चोर व काले धन के सरगना के खिलाफ एक कायदे का मुकदमा भी नहीं बना सकता. दो माह पहले वित्त मंत्री बड़े भोलेपन के साथ विश्व को बता चुके हैं कि हसन अली के स्विस बैंक खाते तो खाली हैं. होने भी चाहिए, काले धन पर इतनी चिल्ल-पों के बाद कोई अहमक ही खातों में पैसा रखेगा.

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भारत में कन्यओं को देवी माताओं का दर्जा दिया जाता है। उनकी शक्ति के रूप में पूजा की जाती है। साल में दो बार उत्तर भारत के लोग नवरात्र मनाते हैं। पूरे नौ दिन शक्ति की उपासना होती है। लेकिन इस बार की जनगणना के नतीजे देखकर क्या वे सोचेंगे कि इस कदर घट रही कन्या जन्म दर को देखते हुए मां दुर्गा के अलग - अलग रूपों की पूजने का क्या अर्थ है? सुनने में अजीब लगता है कि इन्हीं में से अधिकांश लोग पढ़े - लिखे और संपन्न होने के बावजूद घर में कन्या के जन्म लेने पर शोक मनाते हैं।

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प्राथमिक शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मुंबई और उपनगरीय इलाकों में बच्चे बीएमसी स्कूलों से मुंह मोड़कर निजी स्कूलों की तरफ जा रहे हैं. बीएमसी स्कूल में जहां मुफ्त में शिक्षा दी जाती है वहीं निजी स्कूलों में औसतन साल भर में एक बच्चे पर तकरीबन 25-30 हजार रुपये खर्च आता हैं. लाख कोशिशों के बावजूद निजी स्कूलों में डोनेशन प्रथा खत्म होने के बजाए और मजबूत होती जा रही है.

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के जल में घातक बैक्टीरिया सुपरबग की मौजूदगी न केवल शर्मनाक, बल्कि जल स्वच्छता के प्रति आपराधिक  लापरवाही का नतीजा है। कल्पना कीजिए, जब केन्द्र सरकार व देश की सर्वोच्च संस्थाओं की नाक तले पानी में खतरनाक सुपरबग पल सकता है, तो देश के दूसरे इलाकों में लोग कितना जहरीला पानी पी रहे होंगे। न्यू दिल्ली मेटालो-बीटा लेक्टामेस (एनडीएम) नाम का बैक्टीरिया कुछ दिनों पहले चर्चा में आया था, तब यह माना गया था कि यह दिल्ली को बदनाम करने के लिए ब्रिटेन की साजिश है। केन्द्र सरकार ने तो ब्रिटिश वैज्ञानिक मार्क टोलमैन की रिपोर्ट को ही खारिज कर दिया है।

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अगर सिर्फ कानून बनाकार अपराध रोका जा सकता तो कभी कत्ल होते ही नही। कानून का कड़ाई  से पालन होना चाहिए वो भी निष्पक्ष तरीके से। इसीलिए अन्ना हज़ारे मांग कर रहे हैं कि सीबीआई, सीवीसी, आदि लोकपाल के अधीन हो और सरकारी दबाव से परे। जन लोकपाल बिल न सिर्फ सरकार, सांसद, नौकरशाह बल्कि न्यायपालिका पर भी निगरानी की बात कर रहा है। इसीलिए इंडिया अगेन्स्ट करपशन इसे स्वतंत्रता का दूसरा संग्राम कह रहा है।

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आदिवासी इलाकों में स्थित राशन दुकानों में खराब खाद्यान्न दिए जाने का आरोप लगाते हुए वामपंथी दल सीपीएम ने इसकी जांच विशेष निगरानी एजेंसी से कराए जाने और गोदामों में पड़ा खाद्यान्न गरीबों में वितरित किए जाने की मांग की है। बता दें कि करीब सात महीने पहले अगस्त 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने खाद्यान्न के कुप्रबंधन पर केंद्र सरकार को लताड़ पिलाई थी और कहा था कि बरबाद हो रहा अनाज मुफ्त में गरीबों को बांट दिया जाना चाहिए।

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भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट विश्व कप का सेमी फाइनल देखने आने के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी के फैसले से इस चर्चा को बल मिला है कि दोनों पड़ोसियों के ख़राब द्विपक्षीय संबंधों में सुधार आ सकता है।

हालांकि क्रिकेट कूटनीति का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। पाकिस्तान के भूतपूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ 2005 में बड़े धूमधाम के साथ एक-दिवसीय मैच देखने नई दिल्ली आये थे। आज की ही तरह तब भी श्री सिंह ने खेल के ज़रिए दोनों देशों को क़रीब लाने की कोशिश की थी।

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