आज़ादी.मी टीम's blog

किसानों व मछुआरों के आंदोलन के चलते सरकार पूर्व मेदिनीपुर जिले के हरिपुर इलाके में प्रस्तावित परमाणु बिजली संयंत्र निर्माण के फैसले से पीछे हट गई। इससे स्थानीय लोग खुश हैं। पूर्व वामो सरकार इस परियोजना को अपनी उपलब्धि बताती थी, और कहती थी कि इससे बंगाल को विद्युत में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। जिस समय यह घोषणा हुई थी, उस समय तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी नंदीग्राम कांड को लेकर आंदोलन कर रही थीं।

एक प्रमुख वैश्विक कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने एक बार कहा था कि जब भी उन्होंने भारतीय लोगों पर दाव लगाया तो उनका दावा कारगर सिद्घ हुआ लेकिन जब भी भारतीय बाजारों के बारे में उन्होंने वही रुख अपनाया, तो उन्हें वैसा नतीजा हासिल नहीं हो पाया। कुछ वर्ष पश्चात उन्होंने कहा कि यहां तक कि भारतीय बाजारों को लेकर भी उनके दाव दुरुस्त होते जा रहे हैं लेकिन अभी भी सरकार पर दाव लगाना सही विचार नहीं है। आर्थिक सुधारों का सूत्रपात हुए बीस वर्ष बीत चुके हैं लेकिन यह बात अभी भी कमोबेश वैसी ही है।

Category: 

इतिहास गवाह है जब-जब शासकों ने मनुष्यों को जानवरों की तरह हांकने की कोशिश की तब-तब क्रांतियां हुई। यह गलतियां तानाशाह दोहराते रहे और उनका पतन होता रहा। निकट भविष्य की क्रांतियों की देखें तो पाएंगे कि सोवियत संघ का टूटना, कम्युनिस्ट शासन का अंत, ईरान में शाह सल्तनत का पतन और हाल में मिश्र में हुई जनक्रांति इसका उदाहरण है। इन सभी क्रांतियों की जड़ में आर्थिक भ्रष्टाचार एक बड़ा कारण था। सोवियत संघ में कम्युनिष्ट शासन काल में एक नागरिक को आजादी के मौलिक अधिकारों से ही सरकार ने वंचित कर रखा था तो ईरान में शाह सल्तनत के शासक सत्तर के दशक तक मध्यकालीन प्रणाली से राज्य कर रहे थे और मिश्र का हाल भी कुछ ऐसा ही था। मिश्र का अधिकांश धन भ्रष्टाचार की बलि चढ़ रहा था तथा यही हाल लीबिया व सीरिया में था जिस कारण वहां भी शासकों के खिलाफ जनक्रांति शुरू हो गई। जब शासक वर्ग जनमानस में फैली बुराइयों के प्रति अपनी आंखें मूंद ले, शासक जनता की कठिनाइयों के बारे में केवल बयान ही दे और जनता का शोषण करे तो जनता में निराशा व हताशा घर कर लेती है। ऐसे हालात में अन्ना हजारे जैसे जननेता जनता की भावनाओं को व्यक्त करने का जरिया बन जाते है।

Category: 

पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर स्थित नवीन पब्लिक स्कूल में 100 से ज्यादा ऐसे बच्चे हैं, जिनके अभिभावक 5,600 रुपये सालाना शुल्क भुगतान करते हैं। यह राशि दिल्ली में एक औसत निजी स्कूल के तिमाही शुल्क के बराबर है। 28 अन्य छात्र ऐसे भी हैं, जो दो वर्ष पहले तक सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे। इसके बाद उन्होंने इस स्कूल में दाखिला लेने का फैसला किया। नवीन पब्लिक स्कूल के मालिक एवं प्राचार्य भगवती प्रसाद को इन छात्रों के अभिभावक वाउचरों के जरिए भुगतान करते हैं। दरअसल ये अभिभावक स्कूल च्वाइस नामक एक विशेष कार्यक्रम का फायदा उठा रहे हैं जिसका संचालन गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) और वैश्विक प्रीपेड सेवा प्रदाता ईडनरेड करती है।

वर्ष 1991 में जब देश अत्यंत बदहाली के दौर से गुजर रहा था, विदेशी कर्ज चुकाने के लिए देश को अपना सोना तक गिरवी रखना पड़ा था, तब आर्थिक सुधार लागू किए गए थे. पिछले बीस वर्षो में गंगा-यमुना में बहुत पानी बह चुका है। इस बीच देश ने बहुत तरक्की की है। देश एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा है लेकिन फिर भी कुछ कमियां हैं।

जैसा कि विक्टर ह्यूगो ने कहा है- दुनिया की कोई भी ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती, जिसका वक्त आ चुका है- तो मैं सदन से कहता हूं कि आर्थिक शक्ति के रूप में भारत का उदय भी ऐसा ही एक विचार है। पूरी दुनिया साफ सुन ले। भारत अब जाग चुका है, हमें बढ़ना होगा, जीतना होगा।’ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बतौर वित्तमंत्री 24 जुलाई, 1991 को अपने बजट भाषण का समापन जब इन शब्दों के साथ किया तो शायद किसी ने सोचा नहीं होगा कि सोना गिरवी रखने को मजबूर और भुगतान संकट के चलते दिवालियेपन की कगार पर पहुंचा मुल्क 21वीं सदी के उगते सूरज के संग आसमान में विश्व की दूसरी तेजी से उभरती आर्थिक ताकत बनकर छा जाएगा। और जब विकसित और धनाढ्य अर्थव्यवस्थाएं वित्तीय सुनामी से ताश के पत्तों की तरह ढेर होंगी तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के चिराग को वह मंदी के थपेड़े से बचाएगा।

Category: 

लंदन पिछले कुछ दिनों से भयंकर दंगों की चपेट में है. उत्तरी लंदन के टोटेनहम इलाके में पुलिस फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत से भड़के दंगे बुरी तरह फ़ैल गए . गत चार अगस्त को कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में 29 साल के मार्क डग्गन की मौत हो गई थी जिसके बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे. लेकिन जल्दी ही प्रदर्शनों ने दंगो का रूप ले लिया और हिंसा, लूट तथा आगजनी की घटनाये तेज़ी से फैल गई.

Category: 

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ने स्कूलों में बच्चों का नामांकन और उपस्थिति बढ़ने के लिए भारत की पीठ थपथपाई है लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि देश में छात्रों को औसत दर्जे की शिक्षा और कौशल प्रदान किया जा रहा है। इसमें पढ़ना और लिखना भी शामिल है, जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों से नीचे है।

संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि बेशक भारत में आने वाले सालों में शिक्षित श्रमजीवी वर्ग की तादाद में इज़ाफा होगा, लेकिन डिग्री और सर्टिफिकेट इकठ्ठा करने की बजाय वास्तविक कौशल प्राप्त करना ज्यादा अहम है। यह किसी व्यक्ति की आमदनी बढ़ने की संभावनाओं को तो बढ़ाती ही है साथ ही उसका देश के विकास में योगदान भी सुनिश्चित करती है।

कलम की ताकत से होने वाले बदलाव महत्वपूर्ण होते हैं. खासकर तब, जब नीतियां धीरे-धीरे घिसट रही हों और जिन बदलावों की हमें जरूरत है, वे कहीं नजर न आ रहे हों. जरूरी यह होता है कि हम एक उस चीज को पकड़ लें, उस नस तक पहुंच जाएं, जिससे चीजें अपने आप गति पकड़ लें. मुझे लगता है कि केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्री जयराम रमेश की सभी मुख्यमंत्रियों को लिखी गई वह चिट्ठी ऐसा ही बदलाव ला सकती है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि बांस घास हैं, लकड़ी नहीं.

स्टैंडर्ड एंडा पुअर्स ने अमेरिका की सरकारी रिण साख रेटिंग को एएए से घटाकर एए प्लस कर दिया है और इसी के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मन्डराने लगे हैं व चारो तरफ अफरातफरी का माहौल है. एसएंडपी ने अमेरिका के बढ़ते बजट घाटे की चिंताओं के बीच उसकी लंबी अवधि की क्रेडिट रेटिंग एएए से घटा दी और कहा है कि उसकी राय में वित्तीय और आर्थिक संकट के समय में अमरीकी नीति निर्धारक और राजनीतिक संस्थाओं का प्रभाव और स्थिरता कमज़ोर हुई है. इसके साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्य्वस्थाि वाले देश में मंदी की आहट का डर और गहरा गया है.

Category: 

संसद के मानसून सत्र की शुरूआत उम्मीद के मुताबिक ही कही जा सकती है। लोकसभाध्यक्ष की ओर से बुलाई सर्वदलीय बैठक में सत्तापक्ष और विपक्ष के रवैए को देखकर कहा जा सकता है कि पिछले सत्र की तरह मानसून सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ने जा रहा है। सदन को चलाने वाले दोनों पक्षों का मकसद ही जब एक-दूसरे को नीचा दिखाना रह जाए तो संसदीय परम्पराओं की परवाह किसे रह जाती है।

Category: 

Pages