आज़ादी.मी टीम's blog

किंगफिशर एयरलाइंस के संकट ने कई सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सरकार को किंगफिशर एयरलाइंस की मदद करनी चाहिए? शुरुआती संकेतों से यह लग रहा था कि सरकार इस प्रस्ताव पर सहानुभूति से विचार कर रही है। लेकिन इसका जैसा विरोध हो रहा है, उसके चलते यह कदम मुश्किल लग रहा है।

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पेट्रोल के मूल्यों में अप्रत्याशित वृद्धि से आम जनता का तिलमिलाना भी स्वाभाविक है और विपक्षी दलों का सरकार पर हमलावर होना भी, क्योंकि इस फैसले के पीछे पर्याप्त उचित आधार नहीं नजर आते। यह किसी आघात से कम नहीं कि पेट्रोल के मूल्यों में संभावित वृद्धि की खबरों के बीच पेट्रोलियम मंत्री यह कहकर देश को दिलासा देते हैं कि मुद्रास्फीति में तेजी के रुख को देखते हुए ऐसा करना मुश्किल होगा, लेकिन इस बयान की स्याही सूखने के साथ ही पेट्रोल महंगा हो जाता है। आम जनता इसलिए भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है, क्योंकि सरकार का यह तर्क पूरी तरह सही नहीं कि तेल कंपनियों के घाटे के कारण पेट्रो

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भारत में विगत छह महीनों में भूकंप के छोटे-छोटे कई झटकों को महसूस किया गया। किसे पता था कि भारत, गुजरात एवं कश्मीर के भूकंपों के बाद फिर एक बड़े भूकंप का सामना करेगा। रेडियो, टेलीविजन, अखबारों एवं सोशल नेटवर्क साइटों पर बहुत लोगों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इन सभी चर्चाओं में कुछ मूलभूत प्रश्न उठाए गए जैसे भूकंप के प्रति हमारा देश कितना संवेदनशील है, लोग बचाव के प्रति कितने सजग व जागरूक हैं और उसमें भी उत्तरी-पूर्वी राज्यों की स्थिति क्या है? भूकंप से हुए नुकसान को कम किया जा सकता है अथवा नहीं? भूकंप आने के प्रमुख कारण क्या हो सकते हैं? क्या हमारी सरकार आपदा प्रबंधन के प्रति उदासीन है? क्या हमारे पास इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं है? क्या हमारी सरकार भवन-निर्माण की नियमावली लागू नहीं करना चाहती? क्या आम लोग इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए एकजुट होकर - सरकार एवं समाज संगठित रूप से - किसी साझे कार्यक्रम का क्रियान्वयन नहीं कर सकते? क्या हमें भूकंप एवं उससे होने वाले प्रभाव को भाग्य एवं भगवान के सहारे ही छोड़ना पड़ेगा?

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकरों के लिए बेहतर वेतन एवं भत्तों की मांग कर अच्छा ही किया है। उनका वेतन निजी क्षेत्र के उनके समकक्षों की तुलना में न केवल हास्यास्पद स्तर तक कम है, बल्कि यह टिकाऊ भी नहीं है। हमारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को देखते हुए हमारी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में प्रतिभाओं की खासी कमी पैदा होने वाली है, जिससे तकरीबन हर सेक्टर में वेतन एवं भत्ते ऊंचे स्तर पर पहुंचेंगे।

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भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कुछ दिन पूर्व एक विशेष रिपोर्ट जारी की है| इस रिपोर्ट में उसने इंडियन एयरलाइंस के 111 नए विमानों के सौदे की फजीहत कर दी है| ये सौदा काफी साल खींचा गया  और अब कैग ने उस पर अपनी नज़रे तिरछी की हैं|

इस रिपोर्ट में एयर इंडिया एवं इंडियन एयरलाइन्स के विलय के मुद्दे सहित कई और मुद्दे जैसे सौदे में खरीदे जाने वाली विमानों की संख्या, इसमें लग रहा लम्बा समय, क़र्ज़ लेकर विमान खरीदने के निर्णयों की आलोचना की गयी है| मुख्यतः इस रिपोर्ट में इस पूरे सौदे में हुई हेराफेरी की खूब खिंचाई की गयी है|

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रायबरेली के एक कागज निर्माता कारखाने ने बिजली बनाने का तरीका इजात किया है जो पर्यवारण के बिलकुल अनुकूल है | पश्चिमी उत्तर प्रदेश की श्री भवानी पेपर मिल ने चावल की भूसी से बिजली बनाने का प्लांट लगाया है|

मिल ने सर्वप्रथम सन 2001 में पहला बोइलर प्लांट लगाया जिसमे जलवाष्प बनायीं जाती थी | इस जलवाष्प का कुछ हिस्सा पेपर बनाने वाले भाग में भेज दिया जाता है और बची हुई जलवाष्प से टर्बाइन इंजन को घुमाया जाता है | इस टर्बाइन से बिजली का निर्माण किया जाता है. सन 2007 में कंपनी के वर्तमान निदेशक सुनील टंडन ने दूसरा बायलर प्लांट लगाया जिस से इस मिल की बिजली सम्बन्धी सभी जरूरते पूरी हो गयी है|

बीते सप्ताह खाद्य महंगाई में एक बार फिर इजाफा हुआ और कई सप्ताहों के अंतराल के बाद वह एक बार फिर दो अंकों में पहुंच गई। ऐसा मुख्यतया प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी होने तथा प्रोटीन समृद्घ तथा महंगे खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार बनी हुई तेजी की वजह से हुआ। आंकड़ों से तो यही संकेत मिलता है कि प्रोटीन समृद्घ पदार्थों की बनिस्बत खराब हो सकने वाले महंगे खाद्य पदार्थ महंगाई दर में कहीं अधिक योगदान कर रहे हैं।

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इस देश में महंगाई, जनसँख्या, मोबाइल समेत लगभग सभी कुछ बढ़ रहा है | अगर कुछ नहीं बढ़ रहा है तो वो हैं महिला लिंग अनुपात| (जन) लोकपाल की समस्या से भी ज्यादा बड़ी समस्या के बारे में पूरा देश हाथ पे हाथ धर के बैठा है | पिछले वर्ष महिला आरक्षण का डंका तो बड़े ज़ोर और शोर से बजाया गया पर जिस तरह से ये 14 वर्षों तक ठन्डे बस्ते में था उसी तरह ये मुद्दा फिर ठंडा पड़ गया है|

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भारत और चीन के तीव्र आर्थिक विकास ने पश्चिमी देशों के लिए संकट पैदा कर दिया है. अभी तक विकासशील देश अपने संसाधनों को स्वेच्छा से सस्ते मूल्य पर पश्चिमी देशों को उपलब्ध करा रहे थे. परिणाम स्वरूप पश्चिमी देशों के बीस फीसदी लोग विश्व के अस्सी फीसदी संसाधनों का उपभोग कर रहे थे. यह व्यवस्था स्थिर थी चूंकि  भारत स्वयं अपने संसाधनों का निर्यात करने को तत्पर था. पिछले दो दशक में भारत एवं चीन के तीव्र आर्थिक विकास ने पश्चिमी देशों के इस सुख में अनायस ही अड़चन पैदा कर दी है. इन दोनों देशों ने संसाधनों की खपत स्वयं बड़े पैमाने पर चालू कर दी है.

संसद में जनलोकपाल की तीन मुख्य मांगों पर सहमति का प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का संदेश लेकर अन्ना के पास पहुंचे केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख ने इसे जनता के सामने पढ़कर सुनाया. इसी के साथ अन्ना ने अपने अनशन को समाप्त करने का ऐलान किया.आजाद भारत में इस अन्दोलन के ज़रिये एक नया इतिहास रचा गया. जनता ने सरकार को अहसास करा दिया कि अब उसको बरगलाया नहीं जा सकता.

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