अविनाश चंद्रा's blog

एक मुक्त अर्थव्यवस्था का मतलब है सरकार की भूमिका काफी हद तक सीमित ही होगी। सामाजिक नियंत्रण भी बहुत ज्यादा सीमित रखना होगा। नियंत्रण की सोच का आधार ही यह है कि वह उसी वक्त हस्तक्षेप करे जब लोग कोई गलत कदम उठाएं। आप किसी व्यक्ति को चोरी से रोकते  हो, किसी दूसरे को पीटने से रोकते हो, किसी को ठगने से रोकते हो, मालिक को नौकर को ठगने सो रोकते हो-यह जायज है। लेकिन आप किसी व्यक्ति को उसका काम करने से नहीं रोकते। इसलिए नियंत्रण तो पुलिसी उपाय है ताकि किसी को वह काम करने से रोका जाए जो उसे नहीं करना चाहिए। सरकार को मां की तरह व्यवहार नहीं करना चा

Category: 

सर्वप्रथम मैं यहाँ साफ कर देना चाहता हूँ कि हम यहाँ किस प्रकार की समानता की बात कर रहे हैं। हम यहाँ कानून के समक्ष हर आदमी की समानता की बात नहीं कर रहे हैं, जिसमें आपकी जाति, धर्म, लिंग, वर्ग, इत्यादि से ऊपर उठ कर आपको देखा जाता है तथा आप दोषी हैं या निर्दोष यह सिर्फ इस आधार पर तय होता है कि आपने कोई अपराध किया है या नहीं। यही पश्चिमी सभ्यता का आधार है। यद्यपि प्रायः हम इस पर पूर्णतः खरे नहीं उतर पाते हैं और मुक्षे आशंका है कि कोई कल इस धारणा का विरोध न करने लगे।

Category: 

देश में प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने फिलहाल प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही थोक व खुदरा व्यापारियों के लिए प्याज के भंडारण की नई सीमा भी तय कर दी है। नए नियम के तहत खुदरा व्यापारी जहां 2 टन प्याज का भंडार कर सकते हैं वहीं थोक व्यापारियों के द्वारा भंडारण की सीमा 25 टन निश्चित की गई है। यह तब है जबकि कुछ ही समय पूर्व प्याज सहित अन्य वस्तुओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर करते हुए इसके भंडारण की अधिकतम सीमा को समाप्त कर दिया गया था। सरकार के इस कदम से व्यापारी खासे नाराज हैं विरोध स्वरूप नासिक की सभ

मोदी सरकार ने कृषि सुधार के लिए जिन दो बिलों को लोकसभा और राज्यसभा से पास करवाया है उसमें एक का संबंध कांट्रैक्ट फार्मिंग यानी अनुबंध खेती से है। सरकार का जहां इसे किसानों विशेषकर छोटे व सीमांत किसानों के लिए फायदेमंद बता रही है वहीं कुछ किसान समूह व राजनैतिक दल इसे एक छलावा बता रहे हैं। उनका कहना है कि नए प्रावधानों के कारण किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बन जाएगा और सारा फायदा कंपनी उठा ले जाएगी। इस विषय पर “आजादी.मी” ने किसानों के देश के सबसे बड़े संगठन शेतकरी संगठन से जुड़े गुनवंत पाटिल से बा

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के मुख्य प्रणेता, बापू के नाम से विख्यात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी यानी मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था। इस प्रकार यह उनकी 151वीं जयंती है। बापू सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार विरोधी अभियान के अग्रणी नेता थे। उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर आधारित थी। इसी सिद्धांत के आधार पर उन्होंने भारत को आजादी दिलाई और समस्त विश्व को नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले 1915 में राजवैद्य

Category: 

जन्मदिन मुबारकः
प्रमुख भारतीय उदारवादी चिंतक हृदयनाथ कुंजरु का जन्म 1 अक्टूबर 1887 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित अयोध्या नाथ कुंजरु और माता का नाम जनकेश्वरी था। वह लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे और चार दशकों तक संसद और विभिन्न परिषदों को अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1946 से 1950 तक वह उस कांस्टिटुएंट असेम्बली ऑफ इंडिया के सदस्य भी रहे जिसने भारत का संविधान तैयार किया था।

Category: 

मैं हिंदी हूँ, मैं भाषा हूँ। मैं राष्ट्रगौरव की अभिलाषा हूँ।।
मैं सज्जा हूँ, मैं जीवन हूँ। मैं भावों का दर्पण हूँ।।
मैं अमृत हूँ, मैं संगत हूँ। मैं प्रेम की चिर यौवन हूँ।।
मैं हिंदी हूँ, मैं भाषा हूँ। मैं राष्ट्रगौरव की अभिलाषा हूँ।।

Category: 

दुनिया भर में 67 करोड़ लोगों के द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली ‘हिंदी’ विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। मैंड्रिन (चीनी) और अंग्रेजी का स्थान क्रमशः पहला और दूसरा है। दुनिया भर में एक ओर जहां तमाम भाषाएं विलुप्त हो रही हैं और उनके संरक्षण और संवर्द्धन के लिए अनेक कदम उठाने की जरूरत पड़ रही है वहीं हिंदी का प्रसार दिन दूनी रात चौगुनी गति से हो रहा है। लेकिन ऐसा हमेशा से ही नहीं था। आजादी के पहले व बाद में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर प्रयास किए जाते रहे। लोकमान्य तिलक, लाला लाजपत राय, पं.

Category: 

यह कहने की आवश्यकता नहीं कि मैं प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हूं। मैं शराब पर प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हूं। मैं सिगरेट पीने पर लगाए गए प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हूं; मैं सैक्रीन व साइक्लामेट पर प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हूं वरन मैं बस इस पक्ष में हूं कि हर किसी को खतरों से अवगत कराया जाए और उन्हें इस बात की छूट मिले कि अपनी पूरी बुद्धिशीलता व अपने निर्णय के अनुसार वे वही करें जो करना चाहते हैं।

Category: 

कोरोना महामारी से मंद पड़ी कारोबार की रफ्तार की तेज करने के लिए हरियाणा सरकार जिला स्तर पर तैनात नोडल अफसरों को और अधिक शक्तियां प्रदान करने जा रही हैं। राज्य को उम्मीद है कि कारोबार की सुगमता बढ़ाए जाने से जहां राज्य में निवेश के द्वार खुलेंगे वहीं कोरोना काल में गिरे राजस्व संग्रह में भी सुधार की संभावना बढ़ेगी। अभी तक नए निवेश के लिए सीएलयू, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी व बिजली कनेक्शन से लेकर 20 से अधिक विभागों की 80 तरह की मंजूरियां  चंडीगढ़ स्थित हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र से दी जाती हैं। अब ये मंजूरियां जिला स्तर पर ही जिला उद्योग केंद्रों में तैनात नोडल

Pages