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Thursday, March 04, 2010

आधुनिकता की दौड़ में सब लोग थोड़े-से दिमागी सुकून की दरकार रखते हैं। इसी के चलते तो अक्सर श्रद्धा, संस्कार और आस्था सरीखे धार्मिक और आध्यात्मिक चैनलों पर बाबाओं को प्रवचन देते हुए और लाखों की भीड़ को उन्हें ध्यान लगाकर सुनते हुए देखा जा सकता है। लेकिन अगर एक बाबा,...

Friday, February 26, 2010

अगर बढ़ते सड़क हादसों पर गौर करें तो पता चलता है कि जहां संपन्नता आने से वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ है वहीं आधुनिक जीवनशैली के चलते जीवन में तनाव भी बढ़ा है। इसी के कारण विशेषज्ञ मानते हैं कि सर्वाधिक हादसे दोपहर और शाम के बीच होते हैं। यानी जरूरत जहां...

Thursday, February 25, 2010

इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी, गोल्फ खिलाड़ी टाइगर वुड और भारतीय राजनीतिज्ञ नारायण दत्त तिवारी में एक असम्मानजनक समानता है. तीनों नाम अलग-अलग देशों और अपने-अपने क्षेत्र के दिग्गजों के हैं। लेकिन अगर इन लोगों के कृत्यों पर नजर डालें तो काफी...

Tuesday, February 16, 2010

हमेशा यह प्रश्न उठता आया है कि राजधानी महिलाओं के लिए कितनी सुरक्षित है? इस तरह का प्रश्न पैदा होना भी स्वाभाविक है क्योंकि आए दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ या फिर बलात्कार की घटनाएं आम जो होती जा रही हैं।

हमारी कानून व्यवस्था...

Friday, February 12, 2010

क्या अपनी मर्जी से किसी के साथ, किसी विशेष दिन घूमना कोई अपराध है?  लेकिन अब ऐसा नहीं रहा है। समाज के कुछ ठेकेदार और परंपरा के पैरोकार अक्सर वैलेंटाइन डे के दिन अति सक्रिय हो जाते हैं और अपनी राजनीति चमकाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति की याद आती  है और...

Wednesday, February 10, 2010

बीटी बैगन की खेती के मसले पर काफी बवाल हुआ. इस मसले पर हितों के जबरदस्त टकराव के बाद सरकार ने फिलहाल इसकी खेती की अनुमति देने के फैसले को टाल दिया है और कहा है कि हम इस पर शोध करेंगे. इस बहस के दौरान कई सवाल उठे. कुछ के जवाब खोजने की बात हुई, कुछ मसले अनसुलझे रहे और कुछ...

Friday, February 05, 2010

इतवार का दिन और दिल्ली में पुस्तक मेला, मुझे वैसे भी पढ़ने-लिखने का थोड़ा शौक रहा है, तो बस मैं पुस्तक मेले के लिए रवाना हो गया। मेरा ऑटो ज्यों ही एक रेड लाइट पर रुका, तो क्या देखता हूं फटेहाल एक किशोर हाथ में कुछ किताबें थामे एकदम मेरे सामने आ गया। उसके पास अरविंद अडिगा की  बूकर पुरस्कार प्राप्त व्हाइट टाइगर, चेतन...

Wednesday, February 03, 2010

आज दुनिया तेजी से सिकुड़ती जा रही है, और देश-प्रदेश की सीमाओं को विकास की राह में बाधा के रूप में नहीं खड़ा नहीं कया जा सकता. विश्व की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में भारत का शुमार हो रहा है, उसे भविष्य की महाशक्ति के तौर पर भी देखा जा रहा है...

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