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Wednesday, April 07, 2010

उत्तर प्रदेश में लगभग चार हजार करोड़ रु. से ज्यादा धन स्मारकों, पार्कों के निर्माण और उनके रख-रखाव पर खर्च किया जा रहा है। लेकिन बात जब शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) को लागू करने की आती है तो राज्य की मुख्यमंत्री केंद्र से अनुदान की दरकार के नाम पर आरटीई को लागू...

Thursday, April 01, 2010

कहते हैं इनसान की पहचान उसके कर्मों से होती है। यह कथन कदम सही भी है, तभी तो अमिताभ आज एक महानायक हैं और नरेंद्र मोदी को धर्मनिरपेक्षतावादी और सभ्य समाज की दरकार रखने वाले लोग फूटी आंख...

Monday, March 22, 2010

एक बच्चा मांद से निकलकर, बड़ी ही बेबसी से अपनी मां का इंतजार करते हुए नजर आता है। उसे इंतजार है, शिकार पर गई मां का। लेकिन वह नहीं जानता कि उसकी मां खुद शिकार बन चुकी है। इसके बाद टीवी स्क्रीन पर...

Friday, March 19, 2010

अगर पुरानी मान्यताओं पर नजर डालें तो पाएंगे कि पंचों को परमेश्वर माना जाता है और ऐसे में पंचायतों का फैसला यानी भगवान का फैसला। अगर यह पंच रुपी भगवान ही खुद को मिले अधिकारों का सदुपयोग न करें, तो इस जमीनी व्यवस्था के पीड़ितों के लिए क्या मायने रह जाते हैं? इस संबंध...

Monday, March 15, 2010

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से स्थानीय अखबारों में यह खबर सुर्खियों में है कि समान व नि:शुल्क शिक्षा अधिनियम के 1 अप्रैल से लागू होने के बाद अब तक कागजों पर दिखाए जाने वाला प्रवेश अब शासन द्वारा करवाया जाएगा, जिससे ये स्कूल आर्थिक रूप से कमजोर 25 प्रतिशत बच्चों को...

Friday, March 12, 2010

ब्राजील में सॉकर, अमेरिका में बास्केटबॉल और भारत की ही तरह पाकिस्तान में क्रिकेट लोगों की के दिलों-जान में बसा है. कहा जाता है कि खेल को जज़्बे के साथ खेलना चाहिए। खेल कभी जुनून बन जाए तो बड़ी बात नहीं जुनून जब खेल बन जाए तो बात बिगड़ जाती है.

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Friday, March 05, 2010

बीते दो दशक की बात करें तो भारत में आर्थिक उदारीकरण के बाद लोगों ने उम्मीदों की नई रोशनी देखी. कई लोगों की जिंदगी बदल गई और कई लोग अपनी जिंदगी बदल रहे हैं. वैश्विकरण के माहौल ने कई लोगों के लिए दुनिया के द्वार खोल दिए. सफलता की कई कहानियों के कई पात्रों की मेहनत और लगन ने...

Friday, March 05, 2010

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि असली स्वराज कुछ लोगों के एकाधिकार से नहीं वरन् सत्ता के दुरूपयोग के उन्मूलन हेतु सभी की अर्जित क्षमता से संभव है। सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किए बिना वास्तविक गणतंत्र की परिकल्पना साकार करना असंभव है। काफी...

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