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Tuesday, November 30, 2010

म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता और सालों से राजनैतिक बंदी रही औंग सान सू ची की हाल ही में हुई रिहाई मानवाधिकार की एक बड़ी जीत है. पिछले 15 सालों  से नज़रबंद रही 65 वर्षीय सू ची ने पूरा जीवन म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली के लिए लगा दिया. ख़ुशी की बात ये रही कि उनकी रिहाई म्यांमार में पिछले दो दशकों में पहली बार हुए लोकतांत्रिक चुनाव के ठीक एक हफ्ते बाद की  गई. म्यांमार के सैन्य शासकों से अन्य राजनैतिक बंदियों को रिहा करने की अपील की गयी है जिस से लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक बल मिलेगा.

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Saturday, November 27, 2010

देश में इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर बवाल मचा है। संचार मंत्री ए. राजा को 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में पद से जाना पड़ा। कॉमनवेल्थ गेम्स में घोटाले को लेकर कुछ लोगों की गिरफ्तारियां तक हो चुकी हैं। मुंबई की आदर्श सोसायटी के मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की कुर्सी छिन गई। इन मुद्दों पर संसद कुश्ती का अखाड़ा बनी हुई है। कर्नाटक में मुख्यमंत्री येदुरप्पा को मुख्यमंत्री के बजाय भू माफिया की संज्ञा दी जा रही है।

भ्रष्टाचार को लेकर देश के प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा,...

Tuesday, November 16, 2010

पिछले 10-15 सालों में भारत में आउटसोर्सिंग उद्योग ने बहुत प्रगति की है. आउटसोर्सिंग से ना सिर्फ लाखो लोगो को रोज़गार मिला, देश की GDP (सकल घरेलू उत्पाद) को भी इसकी वजह से एक बड़ा उछाल मिला. विश्व के बड़े और विकसित देश आज भारत सरीखे कई अन्य विकाशील देशों से अपने काम सस्ती दरों पर कराते हैं. सस्ती जगहों में अपना काम आउटसोर्स करने के कई फायदे हैं. अव्वल तो इन देशों को कम दरों पर काम करने वाले पर काबिल कर्मचारी मिल जाते हैं. खासतौर पर भारत में काम करने लायक युवा जनता ना सिर्फ अच्छी अंगेजी बोलना जानती है, वो कंप्यूटर...

Thursday, November 11, 2010

देश में लगभग 6 करोड़ लोग हैं जो नियमित इंटरनेट का उपयोग करते हैं. देश की कुल जनसंख्या के लिहाज से यह संख्या कुछ खास नहीं है लेकिन संसाधनों की उपलब्धता को देखें तो यह संख्या कम भी नहीं है. छह करोड़ लोगों की इस संख्या में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ोत्तरी भी हो रही है. ऐसे समय में ब्लॉग का जन्म और प्रसार वैकल्पिक मीडिया की तलाश में लगे लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

कुछ लोगों की मेहनत, समझ और सूझबूझ का परिणाम है कि यह तकनीकी रूप से लगातार और अधिक सक्षम और कारगर होता जा रहा है.

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Monday, November 01, 2010

सवाल शुरू होता है खुद से ‘क्या हमने कोई काम ले-दे कर करवाया है?’ बस, देश में रिश्वत के स्तर और समाज में उसकी मान्यता का अंदाजा यहीं से लग जाएगा. चाय पानी, सुविधा शुल्क, फिक्सिंग, घूस और न जाने कितने नामों से प्रचलित रिश्वत हमारी प्रणाली में घुन्न की तरह लगी और बढती चली गई. न तो रिश्वत नयी बात है और न ही भारत में इसका होना कोई अजूबा. हां, बीते वर्षों में यहां इसका प्रचलन जिस तरह से बढा है और यह धारणा बनी है कि कोई काम बिना लिए - दिए नहीं होगा, वह चिंताजनक है.

भ्रष्टाचार करने वाले हजार के नोटों...

Thursday, October 28, 2010

वस्तुतः नक्सलवाद की नींव रखने वाले चारू मजुमदार और कनु सान्याल के मन में सत्ता के खिलाफ सशस्त्र आन्दोलन शुरुआत करने का विचार तभी आया होगा जब उन्होंने संभवतः यह महसूस किया होगा कि भारतीय मजदूरो और किसानो की दुर्दशा के लिए सरकारी नीतिया जिम्मेदार है,और उसी के कारण उच्च वर्गों का बोलबाला हो गया है.

और शायद सौ फीसदी वे गलत भी नहीं है. अतः निश्चय ही आज ये सशस्त्र विद्रोह नक्सलवाद का उग्र रूप धारण कर चुका है, जो देश के लिए एक सबसे बडा खतरा बनकर मंडरा रहा है.

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Wednesday, October 27, 2010

भाषा मुँह से निकली ध्वनियों से अलग भी कुछ होती है? क्या होती है? हमारी सोच का विस्तार और सीमा? हमारे चिन्तन का शिल्प? ज्ञानकोष का खाता? सामाजिक और नैतिक मूल्यों की परम्परा?

मेरी परिवार की एक बारह साल की बच्ची को ठीक से 'क ख ग घ' नहीं आता। तीस के आगे गिनती भी नहीं आती। मैं इस बात से अवसादग्रस्त हुआ हूँ। ये भाषा के अप्रसांगिक होने के संकेत हैं। हालांकि बातचीत वह हिन्दी में ही करती है मगर ज्ञानार्जन के लिए उसे हिन्दी वर्णमाला और अंकमाला की ज़रूरत नहीं। एक सफल जीवन जीने के लिए उसे...

Tuesday, October 26, 2010

प्रिय प्रधानमंत्री जी,

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि सुप्रीम कोर्ट को ‘‘सम्मानपूर्वक’’ फटकारते हुए आप ने कहा है कि अनाज, सड़ते हुए खाद्यान्न का निपटारा जैसे सभी सवाल नीतिगत मामले हैं. आप बिल्कुल सही कह रहे हैं और बहुत दिनों बाद ऐसा किसी ने कहा है. ऐसा कर आप संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सार्वजनिक बयानबाजी में ईमानदारी लाने की एक छोटी-सी कोशिश कर रहे हैं, जिसकी बहुत कमी महसूस की जा रही थी. बेशक यह आपकी सरकार को तय करना है कि वर्तमान में लाखों टन सड़ते अनाज का क्या करना है, कोर्ट को...

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