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Wednesday, January 12, 2011

अनेक वर्षों से कई सामाजिक-राजनीतिक संगठनों द्वारा दलित समस्याओं को लेकर देश में जगह-जगह चर्चाएं-परिचर्चाएं की जाती रही हैं. सवाल उठाया जाता रहा है कि आखिर कब तक दलित पूरी तरह से आर्थिक-सामाजिक रूप से बेहतर होगा और वह भी समाज में उसी तरह सम्मान के साथ निडर होकर जी सकेगा जैसे समाज के अगड़े जी रहे हैं. ऐसे सवाल भी उठाये जा रहे हैं जो दलितों के लिए केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा लागू की गयी योजनाओं के अपेक्षित परिणाम न आने को लेकर हैं.

जिस आक्रामता के साथ दलित समस्याओं को उठाया जा...

Tuesday, January 11, 2011

श्री कृष्णा आयोग रिपोर्ट आने के बाद पृथक तेलंगाना राज्य की मांग एक बार फिर गरमा गयी है. जस्टिस श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में फरवरी, 2010 में गठित पांच सदस्यीय समिति ने तेलंगाना समस्या के समाधान के लिए सरकार के सामने कई रास्ते खोले हैं, जिस मे प्रमुख सलाह है आंतरिक सुरक्षा और विकास की दृष्टि से आंध्र प्रदेश को ज्यों का त्यों एक संगठित राज्य के रूप मे बनाए रखा जाए.

श्रीकृष्णा कमेटी की इस रिपोर्ट के सुझावों को शुरूआती दौर में कई तेलंगाना समर्थक संगठनों ने रद्द कर दिया है. अलग-अलग...

Monday, January 10, 2011

'आज से आठ दशक और सात साल पूर्व हमारे पूर्वजों ने हमारे इस महादेश में निर्माण किया था एक नए देश का। निर्माण किया था उसका एक खुली आजादी के माहौल में, यह मानते हुए कि हर इंसान हर दूसरे इंसान के बराबर है। कोई भी व्यक्ति किसी से ऊंचा नहीं और ना ही किसी से कोई नीचा है।

और अब हम, उस ही देश की नस्ल, भिड़े हुए हैं एक-दूसरे से एक घमासान जंग में, जो कि यह फैसला कर दिखाएगी कि यह देश या फिर ऐसा कोई भी देश, ऐसी बेहतरीन सोच और ऐसे संकल्प वाला देश, बरकरार रह सकता है भी या नहीं।

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Friday, January 07, 2011

मार्क्स ने कहा था धर्म अफीम है। लेनिन ने कहा था धर्म केवल एक निजी मामला नहीं है। आज हमारे बीच न मार्क्स हैं न लेनिन। मगर धर्म है। मार्क्स और लेनिन के सिद्धांत पुराने पड़ चुके हैं, मगर धर्म पुराना होकर भी खत्म नहीं हुआ। यह निरंतर फैल रहा है। या कहें हम धर्म को अपनी सुरक्षा के लिए फैला रहे हैं। हम डरे हुए हैं। धर्म से अलग नहीं होना चाहते। धर्म और ईश्वर हमारा सहारा हैं। यहां हर कोई धर्म और ईश्वर की छतरी में खुद को सुरक्षित महसूस करता है।

धर्म कितना ही अफीम हो, मगर हम उसे खाने में...

Thursday, January 06, 2011

हर सुबह काम पर जाते वक्त मेरे रास्ते में झुग्गी-झोपड़ियां पड़ती हैं। मुझे दिखाई देते हैं मिट्टी की दीवारों और प्लास्टिक व टीन की छतों वाले छोटे-छोटे अस्थायी घर। इन घरों में कचरा बीनने वाले भी रहते हैं तो चाकरी करने वाले भी। गलियों में फेरी लगाने वाले भी रहते हैं तो रोज कुआं खोदने और रोज पानी पीने वाले मेहनतकश भी।

दिल्ली समेत देश के सभी महानगरों में इस तरह के नजारे आम हैं। लेकिन कुछ दिनों पहले एक सुबह मैं यह देखकर हैरान रह गया था झुग्गियां कहीं भी नजर नहीं आ रही थीं। उनके स्थान...

Tuesday, January 04, 2011

सरकारी कर्मचारी की ज़िन्दगी जी रही डिलमा रूसेफ़ जिस ने पहले कोई चुनाव तक नही लड़ा था, उस के लिए अपने ही देश का राष्ट्रपति बन जाना एक असंभव सपने के सच हो जाने सरीखा है. लाटिन अमरीकी देशो में महिलाओं के लिए इतिहास रचते हुए, डिलमा रूसेफ़ ने ब्राज़ील की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में हाल ही मे शपथ ली. उन्होंने लूला डी सिल्वा की जगह ली है, जिन्हें ब्राज़ील के इतिहास का सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति माना जाता है.

ब्राजील में लिंग असमानता की शिकायतों के बीच एक महिला राष्ट्रपति का...

Monday, January 03, 2011

जनता की कमर तोड़ महंगाई के साथ कदम मिला चुके बीते वर्ष से शायद सबकी सिर्फ यही उम्मीद थी की महंगाई जैसी बीमारी से लोगों को कुछ राहत जरुर मिलेगी क्योंकि वर्ष 2009 ने जनता को महंगाई की आग में बहुत जलाया था लेकिन आग बुझने की आस लगाये बैठी जनता ने अपना एक और वर्ष 2010 के रूप में बिता डाला. गुज़रे साल मे एक तरफ अंत तक राहत के नाम पर सिर्फ महंगाई रूपी जहर को पीते-पीते दामो में बढ़ोत्तरी ही देखने को मिली वहीँ दूसरी तरफ पूरे साल ख़ुशी और देश के विकास में टकटकी लगायी आँखों को अंत में महा घोटालों का तोहफा मिला. अब ऐसे में...

Thursday, December 30, 2010

नहीं, कोई ऐसा नहीं कर सकता कि वह डॉ. विनायक सेन और उनके साथियों को रायपुर की एक अदालत द्वारा आजीवन कारावास दिए जाने पर खुशी मनाए। वैचारिक विरोधों की भी अपनी सीमाएं हैं। इसके अलावा देश में अभी और भी अदालतें हैं। हमें अपनी अदालतों और अपने तंत्र पर भरोसा तो करना ही होगा। आखिर क्या अदालतें हवा में फैसले करती हैं? क्या इतने ताकतवर लोगों के खिलाफ सबूत गढ़े जा सकते हैं? ये सारे सुविधा के सिद्धात हैं कि फैसला आपके हक में हो तो सब कुछ अच्छा और न हो तो अदालतें भरोसे के काबिल नहीं हैं। भारतीय सविधान, जनतंत्र और अदालतों को...

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