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Wednesday, September 26, 2018

हमारी मांग स्कूलों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए कानून

भारत में, शिक्षा हमेशा व्यक्तियों और समुदाय के स्वैच्छिक प्रयासों के माध्यम से समाज की ज़िम्मेदारी रही है। बतौर माध्यम, भारत में अंग्रेजी भाषा में औपचारिक शिक्षा की शुरूआत औपनिवेशिक काल में हुई। इससे शिक्षा के क्षेत्र में मानकीकरण का प्रवेश हुआ। स्वतंत्रता के बाद, सभी को शिक्षा प्रदान करने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंपी गई थी। राज्यों की कमजोर क्षमता और...

Tuesday, August 14, 2018

पढ़े-लिखे बेरोजगारों की विशाल फौज को देखकर लोग अनायास ही कह देते हैं कि शिक्षा को 'रोजगार परक' बनाया जाना चाहिए। उनका तात्पर्य यह होता है कि जिन क्षेत्रों में रोजगार की अधिक संभावाएँ हैं, उनसे संबंधित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। देश के अधिकांश महाविद्यालयों में शिक्षा के नाम पर भाषा, साहित्य, इतिहास, राजनीति, समाजशास्त्र, विज्ञान, आदि विषय ही पढ़ाए जाते हैं। और इन विषयों की डिग्री लेने से किसी को कोई नौकरी मिलेगी, इसका कोई भरोसा नहीं। अत: ऐसे विषयों की पढ़ाई एवं उन पर होने वाले सरकारी खर्च...

Tuesday, August 07, 2018

यह अच्छा हुआ कि प्रधानमंत्री ने लखनऊ में उद्योगपतियों के बीच यह कहा कि वह उनके साथ खड़े होने में डरते नहीं। इसी के साथ उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश के विकास में उद्योगपतियों की भी भूमिका है। वैसे तो इस सामान्य सी बात को हर कोई समझता है, लेकिन कुछ लोग इस बुनियादी बात को समझने से इन्कार करने के साथ ही आम जनता को बरगलाने का काम भी कर रहे हैं।

दरअसल इसीलिए प्रधानमंत्री की ओर से यह कहा जाना उल्लेखनीय है कि वह उन लोगों में नहीं जो...

Sunday, July 22, 2018

नेताजी का मन उदास था। रह रहकर कुछ अजीब सी 'फीलिंग' हो रही थी। चलते मॉनसून सत्र में उनका काम में मन नहीं लग रहा था। इलाके के लोगों ने कई सवाल देकर भेजा था उन्हें लेकिन वो आज साथी सांसदों के लिए भी खुद एक सवाल बन गए थे। उनके मुरझाए हुए चेहरे को देखकर आलाकमान ने भी उन्हें आज जरुरी हो तो सिर्फ गांधी प्रतिमा के पास मुंह पर काली पट्टी बांधने का काम दिया था, जबकि जिनके चेहरे पर तेज था, उन्हें वेल में उतरकर हल्ला-गुल्ला करने और कागज उड़ाने जैसे तमाम अधिकार थे। नेताजी को डर सताने लगा था कि हाल यही रहा तो उनका टिकट कट सकता है।...

Thursday, July 19, 2018

जब हम अपनी आज़ादी का उपयोग जिम्मेदारी से करते हैं, तब हमें पता चलता है कि वास्तव में हम कुछ अलिखित नियमों तथा शर्तों से बंधे हुए हैं। हमें पता चलता है कि हम कुछ भी अंधाधुंध करने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं।

मेरे गुरु महर्षि अमर ने हमें समझाया था कि हमें इच्छा-स्वातंत्र्य का वरदान मिला हुआ है। हम कुछ भी यहां तक कि गलत चुनने के लिए भी स्वतंत्र हैं। हम कभी गलत चीजों का चुनाव करते हैं, गलतियां करते हैं, असफल होते हैं। किंतु हम सीखते हैं और बदलते हैं। यह एक महत्वपूर्ण सत्य है...

Sunday, July 15, 2018

भरी गर्मी और तपती दोपहरी से बचने के लिए आपने अपने कमरे में लगवाने के लिए नया एसी लिया है लेकिन आप अपना कमरा कितना ठंडा करेंगे इसका फैसला सरकार करेगी। ये सुन आपका चौकना स्वाभाविक है लेकिन सरकार कुछ ऐसा ही करने का मन बना रही है।

ऊर्जा मंत्रालय ने एनर्जी बचाने के मकसद से सलाह दी है कि एसी की डिफॉल्ट सेटिंग 24 डिग्री सेल्सियस रखी जाए। ऊर्जा मंत्रालय ने हाल में एयर कंडीशनर बनाने वाली प्रमुख कंपनियों और उनके संगठनों के साथ बैठक में कहा...

Friday, July 06, 2018

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रिपोर्ट तैयार, केंद्र सरकार से विधि आयोग ने की सिफारिश

एजेंसी|नई दिल्ली

विधि आयोग ने देश में जुए और क्रिकेट सहित सभी खेलों पर सट्‌टेबाजी को वैध करने की सिफारिश की है। गुरुवार को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को सौंपी रिपोर्ट में आयोग ने सुझाव दिया है कि इन गतिविधियाें को रेगुलेट करके सरकार को टैक्स...

Monday, July 02, 2018

टेलीविजन पर 'साफ नीयत सही विकास' के विज्ञापन को लगभग घूरते हुए पड़ोसी शर्मा जी बुदबुदाए- "हद है...क्या बकवास है। बंद करो इसे यार।" ज़िंदगी जिस तरह मेरे साथ दिन में कई बार मजाक करती है, मैंने सोचा थोड़ा मजाक शर्माजी के साथ कर लिया जाए। मैंने पूछा- "आपने विज्ञापन को बकवास कहा या टीवी को या मुझे। आपने टीवी को बंद करने के लिए कहा, विज्ञापन को या मुझे।" शर्माजी झुंझलाए। बोले-"अब तुम दिमाग का दही मत करो। वैसे ही 18 घंटे लेट घर पहुंचा हूं। दिमाग सही ठिकाने पर नहीं है।"

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