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Monday, February 18, 2019

अंतरिम बजट आने के बाद स्मार्ट विश्वविद्यालय ने बजट और गरीब विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, इस प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार पानेवाला निबंध इस प्रकार है-

भारत में गरीबी का मामला बहुत पेचीदा है, आप किसी व्यक्ति को गरीब कह दें, तो वह बुरा मान जायेगा। पर कार पर चल रहा बंदा भी अपने सिलेंडर में छूट-सब्सिडी लेने को गरीबी नहीं, मानवाधिकार समझता है। ऐसे ऐसे गरीब हैं भारत में जो सब्सिडी, पेंशन वगैरह लेने के लिए एकैदम गरीब है पर...

Wednesday, February 06, 2019

मैं एक अभिभावक हूं और अपने बच्चे की शिक्षा और व्यापक शिक्षा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण हितधारक हूं। मेरी आवाज नहीं सुनी गई।

हाल ही में, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में एक कथित सर्क्युलर की बाढ़ सी आ गई थी, जिसमें समस्त राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने यहां पढ़ाए जाने वाले विषयों और स्कूली बस्तों के वजन को भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार नियमित करने को कहा गया था। हालांकि मुझे मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की...

Wednesday, January 30, 2019
जबतक गलती करने की स्वतंत्रता न हो, तबतक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं : महात्मा गांधी
Monday, January 21, 2019

चालू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित- लोकतंत्र में रिजार्ट -विषय पर निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त निबंध यह है-

लोकतंत्र में रिजार्ट का कितना महत्व है, यह हम देख चुके हैं। चुने हुए प्रतिनिधि, जिनसे उम्मीद की जाती है कि वो विधानसभा में दिखेंगे या जनता की सेवा करते हुए दिखेंगे, वो अकसर रिजार्ट में पाये जाते हैं। रिजार्ट का हिंदी अनुवाद है-आश्रय। यानी हम कह सकते हैं कि लोकतंत्र को अब जहां...

Monday, December 17, 2018

- अंतर्राष्ट्रीय लघु फिल्म प्रतियोगिता में ‘ड्रीमर्स ऑफ ब्रेसवाना’ और ‘ब्रिंगिग स्कूल्स वेयर देयर इज नन’ को क्रमशः दूसरी और तीसरी श्रेष्ठ फिल्म का खिताब

- एडुडॉक फेलो वर्ग में विकिरण को श्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म का पुरस्कार

नई दिल्ली। चौथे अंतर्राष्ट्रीय लघु फिल्म प्रतियोगिता ‘एडुडॉक’ का आयोजन इंडिया हैबिटेट सेंटर स्थित जुनिपर हॉल में किया...

Friday, December 14, 2018

- 10वें स्कूल च्वाइस नेशनल कॉंफ्रेंस के दौरान शिक्षाविदों ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली को बताया अप्रासंगिक

नई दिल्ली। देश की शिक्षा प्रणाली दशकों पुराने ढर्रे पर चल रही है जबकि दुनिया तेजी बदल रही है। अलग अलग छात्रों की सीखने व समझने की क्षमता अलग अलग होती है जबकि वर्तमान प्रणाली अभी भी सभी छात्रों को समान तरीके से ‘ट्रीट’ करती है। छात्रों का सर्वांगीण विकास हो इसके लिए जरूरी है कि उन्हें वैकल्पिक शिक्षा प्रणाली के...

Wednesday, September 26, 2018

हमारी मांग स्कूलों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए कानून

भारत में, शिक्षा हमेशा व्यक्तियों और समुदाय के स्वैच्छिक प्रयासों के माध्यम से समाज की ज़िम्मेदारी रही है। बतौर माध्यम, भारत में अंग्रेजी भाषा में औपचारिक शिक्षा की शुरूआत औपनिवेशिक काल में हुई। इससे शिक्षा के क्षेत्र में मानकीकरण का प्रवेश हुआ। स्वतंत्रता के बाद, सभी को शिक्षा प्रदान करने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंपी गई थी। राज्यों की कमजोर क्षमता और...

Tuesday, August 14, 2018

पढ़े-लिखे बेरोजगारों की विशाल फौज को देखकर लोग अनायास ही कह देते हैं कि शिक्षा को 'रोजगार परक' बनाया जाना चाहिए। उनका तात्पर्य यह होता है कि जिन क्षेत्रों में रोजगार की अधिक संभावाएँ हैं, उनसे संबंधित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। देश के अधिकांश महाविद्यालयों में शिक्षा के नाम पर भाषा, साहित्य, इतिहास, राजनीति, समाजशास्त्र, विज्ञान, आदि विषय ही पढ़ाए जाते हैं। और इन विषयों की डिग्री लेने से किसी को कोई नौकरी मिलेगी, इसका कोई भरोसा नहीं। अत: ऐसे विषयों की पढ़ाई एवं उन पर होने वाले सरकारी खर्च...

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