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Friday, May 22, 2020
राजा राम मोहन राय का जन्म 22 मई, 1772 ई. को बंगाल के एक गांव राधा नगर में एक बंगाली ब्राम्हण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम रमाकान्त राय एवं माता का नाम तारिणी देवी था। राजा राम मोहन राय को दुनिया एक महान भारतीय सामाज सुधारक के तौर पर पहचानती है लेकिन शिक्षा सुधार के क्षेत्र में दिया गया उनका योगदान किसी भी प्रकार से कम नहीं है। शिक्षा सुधार के क्षेत्र में किए गए कार्यों के कारण भारतीय जनमानस के बीच उन्हें “आधुनिक भारत के निर्माता” के तौर पर पहचान मिली। राजा राम मोहन राय ने समाज में परिवर्तन लाने के लिए अनेक प्रयास किए और हिंदू परंपराओं...
Friday, May 08, 2020
सरकारों को कम से कम योजनाएं बनानी चाहिए। सरकारें जितनी अधिक योजनाएं बनाती हैं, लोगों के लिए व्यक्तिगत योजनाएं बनाने में उतनी अधिक परेशानी होती हैः एफ.ए. हायक (नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री)
Thursday, May 07, 2020

राज्य नामक अमूर्त प्राणी, भारत पर राज्य कर रहा है। हमने अपने देश में कुछ खाद्य पदार्थों के ब्रांड्स के विज्ञापन देखे हैं, जिन्हें बनाने और पैक करने की सारी प्रक्रिया बिना हाथ लगाए पूरी की जाती है। यह विवरण भारत की शासन व्यवस्था पर भी लागू होता है, जो कि हरसंभव मानवीय (जनता) से संपर्क से दूरी बनाए रहती है। राज्यपाल हमारी भाषा समझने को जरूरी नहीं मानते हैं। वे हमसे व्यक्तिगत संपर्क स्थापित करने को भी जरूरी नहीं मानते हैं। वे हमसे सिर्फ अफसरों के रूप में मिलते हैं।

रबीन्द्र नाथ टैगोर (1861-...

Saturday, April 11, 2020

ज्योतिराव गोविंदराव फुले का जन्म वर्ष 1827 में 11 अप्रैल को सतारा, महाराष्ट्र में हुआ था। वे जाति से माली थे और उनके परिवार का मुख्य व्यवसाय फूलों का था। जब उनकी उम्र मात्र 9 माह थी तभी उनकी मां चल बसी। बालक ज्योतिराव ने भी काफी समय तक अपने पिता के साथ फूलों के गजरे बनाने और बेचने का काम किया। जीविकोपार्जन के लिए उन्होंने खेती भी की। उनके पिता उन्हें स्कूल नहीं भेजते थे। उन्हें लगता था कि पढ़ लिख जाने के बाद ज्योतिराव को काम करने में शर्म आएगी। लेकिन ज्योतिराव की पढ़ाई में रूचि और तेज दिमाग को देखते हुए बाद में उनका...

Friday, April 03, 2020

प्रमुख भारतीय उदारवादी चिंतक हृदयनाथ कुंजरु का जन्म 1 अक्टूबर 1887 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित अयोध्या नाथ कुंजरु और माता का नाम जनकेश्वरी था। वह लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे और चार दशकों तक संसद और विभिन्न परिषदों को अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1946 से 1950 तक वह उस कांस्टिटुएंट असेम्बली ऑप इंडिया के सदस्य भी रहे जिसने भारत का संविधान तैयार किया था। वह देश दुनिया की घटनाओं पर पैनी नजर और रूचि रखते थे। उन्होंने इंडियन काउंसिल ऑफ...

Thursday, February 13, 2020

‘वो’ प्रेम का आपातकाल था। यह प्रेम का स्वर्णकाल है। ‘वो’ यानि वह दौर, जब हम अपने कस्बे में इश्क की संभावनाएं उसी शिद्दत से खंगाल रहे थे, जैसे हेमंत बिरजे और चंकी पांडे जैसे कलाकर बॉलीवुड में सफलता खंगाल रहे थे। बाप-दादा के कालखंड में प्रेम की खंड-खंड संभावनाओं को हमने देखा ही नहीं, तो उस पर नो कमेंट।

हमारे जमाने में लड़की से बात करना ओलंपिक मेडल जीतने सरीखा था। उस वक्त जिस तरह ओलंपिक से भारतीय खिलाड़ी प्रायः बिना पदक लिए ही वापस आते थे, उसी तरह 99.99 फीसदी मामलों में लड़के भी बिना बात किए ही वापस...

Thursday, January 30, 2020

बाजार, नागरिक समाज का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। बाजार का उद्भव का कारण ही यह है कि मनुष्य व्यक्तिगत रूप से किए जाने वाले कार्य की तुलना में अन्य लोगों के सहयोग से ज्यादा हासिल कर सकता है और इसका अनुभव भी किया जा सकता है। यदि हम ऐसे प्राणी होते जिसके लिए व्यक्तिगत रूप से किए जाने वाले कार्यों की तुलना में सहकारिता के तहत किया जाने वाला कार्य ज्यादा उत्पादक नहीं होता, या फिर हम सहकारिता के लाभों को समझ पाने में असमर्थ होते तो हम अवश्य ही अलग थलग व एकाकी रहते। लेकिन इससे भी बुरा यह है जैसा कि...

Tuesday, January 28, 2020

बाजार की प्रक्रिया के समर्थिक प्रायः प्रतिस्पर्धा के लाभों पर जोर देते हैं। प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया लोगों को सतत परीक्षण, अविष्कार व परिवर्तनशील परिस्थितियों की प्रतिक्रिया में उसके साथ सामंजस्य स्थापित करने की अनुमति प्रदान करते हैं। यह अपने उपभोक्ताओं की सेवा के लिए व्यवसायों को लगातार मुस्तैद खड़े रखने के लिए मजबूर करता है। यह आसानी से देखा जा सकता है कि प्रतिस्पर्धी प्रणाली, केंद्रीयकृत व्यवस्था अथवा एकाधिकार युक्त प्रणाली की तुलना में विश्लेषणात्मक और अनुभवजन्य दोनों ही प्रकार से, अधिक बेहतर परिणाम प्रदान करती है...

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