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Monday, August 05, 2019

जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाने के बहुचर्चित फैसले पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 खत्म होने की सूचना संसद में दी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पहले राज्यसभा और फिर लोकसभा में अनुच्छेद-370 को खत्म करने की जानकारी दी। अनुच्छेद-370 खत्म होने की सूचना मिलते ही राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा हुआ है। जहां कुछ राजनेता इसे एक देश-एक संविधान बता रहे हैं। वहीं विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। आइए 10 बिंदु में जानें...

Wednesday, July 31, 2019

नोबल पुरस्कार विजेता मिल्टन फ्रीडमैन (1912-2006) पिछली सदी के उन कुछ महान अर्थशास्त्रियों में से थे जिन्होंने सारी दुनिया के आर्थिक सोच और नजरिये को बहुत गहरे तक प्रभावित किया और उसे नए आयाम दिए। इस महान उदारवादी अर्थशास्त्री के जन्मदिन के मौके पर यहां प्रस्तुत है उनके लेखों और पुस्तकों से लिए गए कुछ उद्धरण जो उनकी अनूठी आर्थिक दृष्टि को प्रस्तुत करते हैंः 

  • जो समाज समानता को स्वतंत्रता से ज्यादा महत्व देता है उसे दोनों ही नहीं मिल पाते। जो समाज स्वतंत्रता को समानता महत्व देता है उसे काफी मात्रा में दोनों ही मिल जाते हैं...
Monday, July 29, 2019

महान समाज सुधारक, शिक्षा शास्त्री और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ईश्वरचंद्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर, 1820 को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम ठाकुरदास बंधोपाध्याय और माता का नाम भगवती देवी था। माता पिता ने इन्हें ईश्वरचंद्र बंदोपाध्याय नाम दिया था लेकिन विभिन्न विषयों पर इनकी पकड़ और ज्ञान के कारण उनके गांव के लोगों ने उन्हें विद्यासागर नाम की उपाधि प्रदान की थी।

ईश्वरचंद्र...

Monday, June 17, 2019

पब्लिक पॉलिसी थिंकटैंक सेंटर फार सिविल सोसायटीएटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग सर्टिफिकेट कार्यक्रम ipolicy वर्कशॉप। लैंसडाऊन (उत्तराखंड) की खूबसूरत वादियों में स्थित वनवासा रिसॉर्ट में 12 से 14 जुलाई 2019 तक चलने वाले ipolicy वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख बढ़ा दी गई है। अब आईपॉलिसी वर्कशॉप के...

Wednesday, May 15, 2019

दशकों तक भारत में ‘अर्थशास्त्र’ का तात्पर्य गरीबी का अध्ययन रहा है। कुछ समय पहले तक कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाने की शुरूआत ‘गरीबी के दोषपूर्ण चक्र’ नामक सिद्धांत (Theory of vicious circle of poverty) से की जाती थी। इस सिद्धांत के अनुसार गरीबी को दूर नहीं किया जा सकता है। गरीब लोग तथा गरीब राष्ट्र के लिए गरीब रहना नियति है। वास्तव में यह कोरी बकवास है। यदि यह सत्य होता तो संसार आज भी पाषाण युग में होता। जीवनियों (Biography) का इतिहास ‘गरीबी से अमीरी’ का सफर करने वाली कथाओं से भरा पड़ा है।...

Tuesday, May 07, 2019

टैगोर जयंती विशेषः

“हिंदुओं के साथ मुसलमानों का अगर कहीं कोई विरोध है तो मैं हिंदू नहीं हूँ, ऐस कहकर इस विरोध को समाप्त करने की इच्छा, फौरी तौर पर समस्या का सहज समाधान लग सकता है; लेकिन सही मायने में यह उपयुक्त नतीजा नहीं निकाल सकता है। ऐसा कहने से हिंदू-मुस्लिम का विरोध पहले जैसा ही रह जाता है। इससे केवल इतना ही होता है कि ऐसा कहकर हम खुद को इस समस्या से अलग कर लेते हैं।

- रबींद्रनाथ टैगोर...

Thursday, April 18, 2019

स्वतंत्रता सर्वोच्च राजनैतिक मूल्य के रूप में
समाजवादी मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था की इस आधार पर भी आलोचना करते हैं कि यह असमानता को बढ़ावा देती है। उनका विश्वास है कि राज्य के हस्तक्षेप व नियंत्रण से वे समानता को बढ़ावा दे सकते हैं। यही जवाहर लाल नेहरू का समाज का समाजवादी ढांचा (Socialistic pattern of society) नामक ‘महान’ दर्शन था।

जो बाजार में विश्वास रखते हैं वे समानता...

Wednesday, March 06, 2019

मैं अपनी माँ को कुछ समय पहले तक सब्जी विक्रेताओं के साथ मोलभाव करते हुए देखती थी। विक्रेता दो तीन रूपये कम कर देते थे। कुछ दिनों मैं अक्सर खुद को ऐसा ही करता देखती हूं और फिर झुंझलाती हूं। यह एक तरह की हम सबकी किसानों के प्रति विडंबना है। उस दो तीन रुपये अथवा कल और आज में  इससे क्या बदल गया ? आमतौर पर, एक सब्जी विक्रेता को कीमत कम करने से इनकार करते हुए निराशा होगी, एक वयस्क के रूप में मेरी योग्यता पर वह सवाल उठाएगा। इसे सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य हमें उनके बेहतरी के लिए क्या करना है कुछ...

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