मानव एवं विचार - चलें हम बच्चों को फंड दे, स्कूलों को नहीं !

भारतवासी स्कानडिनाभिया के बारे में बहुत कम जानते हैं- स्वीडन के राष्ट्र नॉर्वे, डेनमार्क,फीनलैण्ड,और आइसलैण्ड। कुछ भारतीय पुरूष स्वीडन की आकर्षक ब्लोण्ड की कल्पना करते  होंगे अन्य आज की फिनलैण्ड की नोकिया फोन के प्रति आशक्त  होंगे। भूगोल शास्त्री उत्साही इसे मध्य रात्री की सूरज-भूमि के रूप में जानते हैं। प्राचीन उदारवादियों जैसे कि मैं स्कानडिनाभिया को याद करते उनकी अतिनियमित अत्यधिक कर अदा करने वाले नौकरशाही अर्थशास्त्र जो महान फिल्म निर्माता इंगमर बर्गमन तथा टेनिस के पौराणिक बीजोर्न बोर्ग को भी हांक दिया है।

ये सारे बदलाव आर्थिक सुधार के बाद आया है। स्कानडिनाभिया आज समाजवादी तथा पूंजीवादी दोनों को बेहत्तार तरिके से जोड़ता है। इसकी सरकार सबसे अधिक जिम्मेदार है। जो अपनी प्रजा के गहन सुरक्षा हेतु खटौला उपलब्ध करता है। यह दुनिया भर में व्यवसाय करने की अच्छी जगह बन गयी है। यह मात्र एक दिन किसी व्यवसाय को शुरू करने या अंत करने के लिए लेता है। आप मजदूरों की बहाली तथा चेतावनी बड़ी आसानी से कर सकते हैं। वे लगभग नौकरशाही अत्याचार को मिटाते हुए लाल फीता साही को निर्दयता पूर्वक काट दिया है। स्कानडिनाभिया आज दुनिया का शत्रु है, जो उच्च कोटी की जीविका को बेहत्तार सामाजिक कल्याण से जोड़ा है।

अत्यंत प्रभावशाली पाठ भारत को स्वीडन की शिक्षा प्रगति जो 1990 की है उससे है। स्वीडेन ने अपने सिध्दांत को विकेन्द्रीत कर दिया है। स्कूल नियंत्रण का भार केन्द्र से नगरपालिका को दे दिया गया है तथा अभिभावकों को छूट दी गई है  कि वे चयन स्कूलों में या निजी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजें (पंरतु वाउचर का भुगतान राज्य सरकार ही करेगी)। परिणामत: अनेक नये स्कूल खोले गए है जो अपनी आमदनी हेतु वाउचर के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। नीजि स्कूलों की संख्या दस गुणा ज्यादा बढ़ गई है न्यूनतम एक से दस प्रतिशत तक।

सबसे महत्तवपूर्ण सफल रही 30 नीजि स्कूलों की कड़ी, जो दलों में पढ़ने के लिए तथा उनकी अपनी गति के अनुसार प्रगति करने का प्रोत्साहन देते हैं। बच्चे हर सप्ताह पन्द्रह मिनट अपने शिक्षक के साथ बिताते हैं, पिछले सप्ताह की प्रगति का मूल्यांकन करने तथा आने वाले सप्ताह के लिए लक्ष्य निर्धारित करने। यह जानकारी वेबसाइट में अभिभावकों की समीक्षा के लिए दी जाती है। सफल शिक्षक बच्चों के परिणाम के अनुसार लाभांस कमाते हैं। हाल के सर्वेक्षण्ा मे लगभग नब्बे फीसदी अभिभावकों ने यह कहा है ं कि ''स्कूल चयन'' तथा प्रतिस्पर्धा से गुणवता में सम्मिलित रूप से काफी विकास हुआ है। गरीब जनता सबसे अधिक खुश हैं, क्योंकि उनके बच्चे अब मुफ्त में स्कूल जाते हैं। जिस प्रकार अमीर बच्चों को दुनिया में चमकने का मौका मिलता है उसी प्रकार गरीब बच्चों का खराब स्कूल छोड़ने की योग्यता का समान मौक मिलता है।

यद्यपि  भारत की तुलना में स्वीडेन काफी छोटा देश है उनका स्कूल नमूना अपनाना  फायेदमन्द है। कम से कम हमारे कुछ शहरों में हमारे सरकारी स्कूल विकल हो गए है, शिक्षकों की अनुपस्थिति काबू से बाहर है तथा कहीं कोई जिम्मेदारी नहीं है। परिणामत: यहां तक कि गरीब अभिभावकगण भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से निकाल रहे हैं तथा उन्हें सस्ते नीजि स्कूलों में भेज रहे हैं (जो एक सौ से दो सौ प्रतिमाह लेते है)। अगर किसी भारतीय राजनेता को स्वीडन का नमूना की वकालत करनी है तो बच्चों को फण्ड दें, स्कूलों को नहीं इससे अभिभावकगण राजनेताओं के प्रति इतने कृतज्ञ होंगे कि राजनेता अपना पद कभी नहीं हारेंगे। अच्छे स्कूलों की संख्या बड़ेगी। अति निर्धन बच्चों को उसी तरह का मौका मिलेगा जैसा कि मध्य वर्ग के बच्चों को मिलता है, तथा सरकारी स्कूल प्रगति करेगा क्योंकि शिक्षकों का वेतनमान अभिभावकों के वाउचर द्वारा भुगतान किया जायेगा। इस प्रकार यह हर दिन दीवाली होगी!

स्वीडन के सरकारी बजट पर कोई धक्का नहीं पहुंचा है नीजि स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को सहयोगा देने से क्योंकि नगरपालिका ने अति असंतोषजनक परिणाम दिखाने वाले स्कूलों को बन्द करने या उनके खर्च में कटौती करने का कार्यभार उठाया है। न ही किसी सामाजिक प्रजातंत्र राजनेताओं की इस पर टिप्पणी करने का साहस हुआ जो मतदाताओं में  स्पष्ट रूप से मशहूर है। स्वीडेन के स्कूल सुधार काफी बेहत्तार उदाहरण है, जो स्कानडिनाभिया  नमूना के लिए आकर्षक है।

इसकी अपनी समस्याएं है, लेकिन भारत की तरह यह लाल फीतासाही से ग्रसित नहीं है, न ही नीजि उद्योग के प्रति कठोर। यह राज्य को महत्तवपूर्ण भूमिका सामाजिक रूप से जिम्मेदारा परिवेश स्थापित करने हेतु जिसके तहत नीजि उद्योग विकसित होता है। स्कूल कें मामले में, स्वीडेन की सरकार साधन उपलब्ध कराती है तथा कुछ बुनियादी निर्देश निर्धारित करती है और तब नीजि विभाग को कार्य करने दिया जाता है। यह भारत के लिए बनाया गया सार्वजनिक निजी साझेदारी है।

गुरचरण दास