आरटीई के तहत कमजोर तबके के लिए 25% आरक्षण लागू करना

आदर्श नियमों में इस बात को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि आखिर निजी स्कूलों में 25 फीसदी आरक्षण को किस तरह से लागू किया जाएगा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम को कारगर बनाने के लिए जरुरी है कि कुछ महत्वपूर्ण सवालों के व्यवस्थित तरीके से विस्तृत जवाब दिए जाएं-

  • कमजोर और पिछड़े तबके की परिभाषा क्या है और इसकी पुष्टि किस तरह से की जाती है?
  • सरकार प्रारंभिक कक्षाओं के लिए इन बच्चों का चयन किस तरह से करेगी?
  • पड़ोस या पूरे गांव/कस्बे/शहर द्वारा स्कूल में प्रवेश के लिए लॉटरी निकाली जाएगी?
  • पड़ोस के हर इलाके में आखिर आपूर्ति और मांग का संतुलन कैसे साधा जाएगा?
  • निजी स्कूलों को इस निशुल्क शिक्षा पर होने वाले खर्च की भरपाई कैसे की जाएगी?
  • सरकार पूरी प्रक्रिया पर कैसे निगरानी रखेगी? प्रक्रिया पर किस तरह के बाहरी निगरानी/सामाजिक लेखा (vigilance/social audit) लागू/प्रोत्साहित किया जाएगा?
  • क्या होगा अगर ये बच्चे बड़ी कक्षाओं में स्कूल बदलना चाहें?

निजी गैर अनुदानित स्कूलों को 25 फीसदी आरक्षण के बदले में की जाने वाली खर्च की भरपाई की गणना न केवल सरकारी स्कूलों में होने वाले आवर्ती खर्च के आधार पर बल्कि अचल संपत्ति और पूंजीगत व्यय के साथ ही मूल्यह्रास और ब्याज की लागत को शामिल करके की जानी चाहिए। इस खर्च में राज्य सरकार द्वारा सभी स्तरों पर प्राथमिक शिक्षा पर किए जाने वाले व्यय को शामिल करना चाहिए. अन्य निजी सार्वजनिक संपत्ति (PPP) की ही तरह सरकार पूंजी के जीवन चक्र (life cycle of capital) तय कर सकती है।

इस विषय पर सी सी एस की तरफ से तैयार सुझावों को पढने के लिए क्लिक करें [PDF | PPT].

मार्च 2010
सीसीएस