कैलाश सत्यार्थी के नाम एक खुला पत्र

श्रीमान सत्यार्थी,
 
नोबेल पुरस्कार जीतने पर आपको बधाई। मलाला युसुफ़ज़ई के साथ नोबेल शांति पुरस्कार जीतने के बाद साक्षात्कार के अपने पहले सेट में दावा किया गया है कि बाल मजदूरी गरीबी का एक कारण हैं। मैं आपके जज्बे की खुले दिल से तारीफ़ करता हूँ, पर मैं आपके विचार से बिलकुल भी सहमत नहीं हूँ। वास्तव में इसका ठीक उलटा है – गरीबी बाल मजदूरी का एक मुख्य कारण है। 
 
यह दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतने की उत्तेजना में दिया गया बयान नहीं है। आप अपने इन विचारों के लिए एक लंबे समय से जाने जाते हैं। लेकिन आपको नोबेल पुरस्कार मिलने से यह मान लेना कि यह धारणा एक शाश्वत सत्य है, बिलकुल ही गलत होगा। 
आपकी अवधारणा समझने में आसान है। अगर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय काम पर भेजेंगे, तो अशिक्षा के कारण गरीब हमेशा गरीब ही रह जायेंगे। अतः कानूनन कठोर प्रावधानों के द्वारा ही इस पर पूरी तरह रोक लगानी उचित है। 
 
लेकिन, आपकी इस अवधारणा में कई सवाल नदारद है। जैसे- क्यों गरीब अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते? वे क्यों अपने बच्चों को काम पर भेजते हैं? क्यों छापों और बचाव अभियान के बावजूद बच्चे वापिस काम पर जाते है? 
 
बाल श्रम के कारणों में मांग और आपूर्ति पक्ष दोनों शामिल है – यानी कि बाल मजदूरों की बाज़ार में मांग और उनकी सस्ती उपलब्धता।  
बाल मजदूरी का सबसे बड़ा कारण है – सरकारी स्कूलों में पढाई ना होना। भारतीय सरकारी स्कूल अध्यापक-अनुपस्थिति के मामले में विश्व में युगांडा के बाद दूसरे नंबर पर है। शिक्षा की गुणवत्ता जांचने वाली पीसा स्टडी में भारत का प्रदर्शन इतना खराब था कि सरकार ने उसके बाद कभी उसमे भाग नहीं लिया। ‘प्रथम’ द्वारा किया जाने वाला ‘असर’ सर्वे हमें बताता है कि सरकारी स्कूलों के अधिकतर बच्चे पांचवी कक्षा में होने के बावजूद तीसरी कक्षा के स्तर पर नहीं पहुँच पाते। जब सरकारे स्कूलों में पढाई ही नहीं होगी, तो क्यों बच्चे स्कूल जाना चाहेंगे और क्यों अभिभावक उन्हें स्कूल भेजना चाहेंगे?
 
बाल श्रम की सस्ती उपलब्धता का कारण है – भारतीय अर्थव्यवस्था में अनौपचारिक या असंगठित सेक्टर का तेजी से विकास। 120 करोड़ नागरिकों के देश में केवल 3 करोड़ कर्मचारी जो की संगठित सेक्टर में है, ४०० श्रम कानूनों में किसी ना किसी कानून के अंतर्गत आते है। करीब ३६ करोड श्रमिक किसी भी सार्थक श्रम कानून के अंतर्गत नहीं आते। चूँकि संगठित सेक्टर कठोर श्रम कानूनों व नियमों में अत्यधिक जकडा हुआ है जिससे श्रम नियमों की कड़ी निगरानी तो होती है पर इसके अनपेक्षित परिणामस्वरुप काफी काम असंगठित, अनौपचारिक क्षेत्र को जाता है/ नतीजतन, असंगठित कृषि क्षेत्र के बाद बाल श्रम का सबसे बड़ा नियोक्ता असंगठित सेक्टर है। बड़ी उद्यमों में मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, कुछ बुनियादी सुविधाएँ तो देनी आवश्यक है ही  साथ ही उन्हें नौकरी से निकालना या छंटनी करना बहुत ही मुश्किल है। और इसलिए संगठित सेक्टर में कठोर श्रम कानूनों के कारण लागत अधिक होती है। सो, अपनी लागत कम करने के लिए, अक्सर काम को ठेकेदारों को दिया जाता है जिनपर निगरानी रख पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। असंगठित क्षेत्र का संगठित ना हो पाना, आधुनिकरण ना कर पाना या व्यापार के पैमाने को न बढ़ा पाना – ये बाल मजदूरी की मांग के कारण है। एक और सगठित सेक्टर में अत्यधिक कड़े कानून है, दूसरी और असंघटित सेक्टर में कोई निगरानी नहीं। ज़रूरत संतुलन बनाने की है। 
 
गरीबी का एक कारण लाईसेंस परमिट राज भी है। शहर के सूक्ष्म-उद्यमों, जैसे की साइकिल रिक्शा, ऑटो रिक्शा, रेहड़ी-पटरी आदि को देखे तो इन सभी में व्यापार के विस्तार पर रोक है। आप एक से अधिक परमिट नहीं ले सकते और ना ही परमिट किराए पर दे या ले सकते हो। तो फिर, गरीब कैसे अपने व्यवसाय को बढ़ा पायेगा और अमीर बनेगा? इसी तरह, कृषि में भी, भू-सुधार कानूनों के परिणामस्वरूप छोटे भू-पट्टों बने, जिन के कारण खेती की उत्पादकता बहुत कम रह गयी, और गरीब किसानों को शहरों की और पलायन करना पड़ा। 
 
1991 और 2001 के बीच बाल श्रम (5-14 साल के आयु वर्ग के बच्चों) में वृद्धि हुई – 1,12,00,000-1,26,00,000. लेकिन 2011 में, यह संख्या मात्र 43 लाख रह गयी। यह सरकारी जनगणना के आंकड़े हैं और (अनौपचारिक अनुमान भारत में 6 करोड बच्चे मजदूर है) जो काफी कम है। उसे ध्यान में रखते हुए भी, 2001 और 2011 के बीच इस ज़बरदस्त गिरावट का उच्च विकास दर और गरीबी में कमी से कुछ तो सम्बन्ध अवश्य है, ऐसा हम कह सकते है।
 
सुरेश तेंदुलकर सूत्र के अनुसार, 1993-94 और 2004-05 के बीच गरीबी 0.74 प्रतिशत अंक घटी और 2004-05 और 2011-12 के बीच गरीबी 2.18 प्रतिशत अंकों घटी। हालांकि जागरूकता और सतर्कता भी बढ़ गई है और पुलिस में भी इस अवधि के दौरान सुधार हुआ है, लेकिन फिर भी इन आंकडो के बीच ठोस सम्बन्ध है।
 
सत्यार्थी जी, बाल मजदूरी के जड़ से उन्मूलन के लिए तीन सबसे प्रभावी उपाय है – अच्छे स्कूल, उच्च विकास दर और श्रम कानूनों में सुधार। 
बाल श्रमिकों की बुनियादी आर्थिक कारणों को संबोधित बिना आप कितने ही छापा मार अभियान चलाये, यह समस्या जड़ से खत्म नहीं होगी।
 
 
- प्रशांत नारंग 
(लेखक आई-जस्टिस, सेन्टर फॉर सिविल सोसाइटी में अधिवक्ता है)